किशोर आत्महत्याओं की बढ़ती दर क्या है वजह

मोनिका अग्रवाल

29th April 2021

'आत्महत्या’ कहने और सूनने में जरुर छोटा सा शब्द है लेकिन जब कोई किशोर इस रास्ते को अपनाकर खुद को खत्म कर लेता है तो माता-पिता के लिए ये जीवनभर का दुःख होता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा ऐसा कदम ना उठाए तो अपने बच्चे को समझें।

किशोर आत्महत्याओं की बढ़ती दर क्या है वजह

किशोर आत्महत्याओं की बढ़ती दर

माता-पिता के लिए उनके बच्चे अनमोल होते हैं, जिन बच्चों को वो अपने खून से सींचते हैं वो बच्चे ही जब आत्महत्या का रास्ता चुन लें तो ये माता-पिता के लिए सबसे बड़ा दुःख होता है। जब बच्चा खुद को मौत के घाट उतार लेता है तो ये बिलकुल किसी बुरे सपने की तरह ही लगता है। हमारे देश में किशोरों की आत्महत्या की दर लगातार बढ़ती जा रही है। शोध के मुताबिक ज्यादातर टीन एजर्स  आत्महत्या का रास्ता भी तभी चुनते हैं, जब वो खुद को असहाय और निराश महसूस करते हैं। ऐसे में माता-पिता को भी इस बात की भनक नहीं लग पाती कि उनका बच्चा किस तरह की परिस्थिति से जूझ रहा है और वो किस परिस्थिति से परेशान होकर ये कदम उठा रहा है। ये सच डरावना है लेकिन माता-पिता के लिए इस समस्या का सामना करना बेहद मुश्किल है। ऐसे में माता-पिता क्या कुछ कर सकते हैं जिससे उनके बच्चे ये कदम ना उठाएं। इसे विषय पर आधारित है हमारा आज का ये लेख।

समझें किशोरों का दिमाग- किसी भी किशोर से आत्महत्या के बारे में बात करने से पहले, उसके दिमाग में क्या चल रहा है इस बारे में समझ लें। ज्यादातर माता-पिता की यही शिकायत रहती है कि उनका बच्चा अचानक बात-बात पर बिगड़ने लगता है और आक्रामक होने लगता है। आपको बता दें बच्चों के अंदर ये प्रवत्ति तभी आती है जब जब उनका दिमाग कई तरह के बदलावों से गुजर रहा होता है। तेजी से बढ़ने के कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते हैं, जिससे जिद्दीपन भी आने लगता है। परेशानी के दौर में जब उनके पास कोई सपोर्ट नहीं होता तो वो आत्मघाती मुद्दों की ओर झुकने लगते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो जब बच्चा मन मुताबिक चीजें हासिल नहीं कर पाता तो उसके अंदर की निराशा के चलते वो आत्महत्या का रास्ता चुन लेता है। 

क्यों होता है ट्रिगर- समान्य सी बात है कि जब कोई चीज मन को बार बार ठेस पहुंचाती है तो वो किसी ट्रिगर की तरह हो जाती है। हमारे देश में आत्महत्या के आंकड़ों की बात करें तो लगभग हर रोज तीन सौ से ज्यादा लोग आत्महत्या का रास्ता चुनते हैं। जिसमें किशोर सबसे ज्यादा होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो जब बच्चे किसी परीक्षा में फेल हो जाते हैं और उनके मन में माता-पिता द्वारा डांटे जाने का डर होता है तो उन्हें अपने आत्मसम्मान की चिंता सताने लगती है। ये समय किशोरों के लिए सबसे भारी समस्या होती है। माता-पिता के लिए यहां सबसे ज्यादा जरूरी है, अपने बच्चे को समझना और उसे समझाना। ताकि वो इससे ट्रिगर होकर आत्महत्या का रास्ता ना चुनें।

 

किशोर आत्महत्याओं की बढ़ती दर

क्या है सबसे ज्यादा खतरनाक- शोध के मुताबिक एक बच्चे की क्षमता के आधार पर जब उसकी उपलब्धियों को आंका जाता है तो जाहिर है कि उसकी पढाई लिखाई को लेकर भी मुद्दे उठ सकते हैं। परिवार के अंदर बच्चों को एक दूसरे से ज्यादा या कम आंकने के मानों प्रथा सी है। कुछ बच्चों के लिए काफी अपमानजनक हो सकता है। जिसके वजह से वो आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।

 

दुर्व्यवहार या शोषण में है कारण-बच्चों में सबसे ज्यादा और सबसे आम चिंता या तनाव का कारण यही है कि वो जब भी दुर्व्यवहार, शारीरिक रूप से शोषण का शिकार, या नशे के लती हो जाते हैं। ऐसे में वो चिंता औउर डर की ऐसी खाई में गिरने लगते हैं जिनकी भनक माता-पिता को लग भी नहीं पाती और वो आत्महत्या कर लेते हैं। ऐसे में बच्चे अपने माता पिता से कुछ भी कहने या शेयर करने में डरते हैं।

क्या पालन पोषण में कमी?- अगर बात किशोरों की आत्महत्या की हो रही है तो माता-पिता के जहन में ये सवाल उठाना आम है कि कहीं उनके द्वारा बच्चे के पालन पोषण में कोई कमी तो नहीं आ रही? विशेषज्ञों की मानें तो आपको ये जानना जरूरी है की आपके बच्चे के जीवन में क्या चल रहा है। आप स्वत्रंत होकर बच्चे से बात करें। बच्चों में आ रहे बदलावों को लेकर जागरूक रहें। उन्हें गाइड करें और उनसे बात करें कि वो अपने जीवन में क्या चाहते हैं। उन्हें थोड़ा स्पेस भी दें। क्योंकि बंदिशें बच्चों के दिमाग बुरी तरह से प्रभावित भी कर सकती हैं। अगर आपको लगे कि बच्चे अब आपसे कंट्रोल नहीं हो सकते तो विशेषज्ञ के पास ले जाने में भी देरी ना करें।

किसी भी माता-पिता के लिए ये सीखना सबसे ज्यादा जरुरी है कि वो अपने बच्चों की असफलताओं को पहचान कर उसे सही रास्ते में लेकर चलें। जिस दिन आपने ये कर दिखाया, आप बच्चों को आत्महत्या का रास्ता चुनने से भी रोक पाएंगे।

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