विश्व में रामायण का गौरव

डॉ. हनुमान प्रसाद उत्तम

5th April 2021

र्यादा पुरुषोत्तम राम लोकजीवन तथा लोकमानस के इतने निकट रहे हैं कि उनकी जीवन-कथा खुद जीवन पर भरोसा दिलाने वाली बनी हुई है। अन्याय के विरुद्ध न्याय के संघर्ष पर श्रद्धा इस कथा के मूल में है।

विश्व में  रामायण का गौरव

रामकथा को अंग्रेजी साहित्य में स्थान दिलाने का सर्वप्रथम श्रेय 'फ्रेडरिक सालमन ग्राऊच को दिया जाता है। जिन्होंने प्रथम बार रामचरित मानस का अंग्रेजी में अनुवाद किया जिसका प्रथम संस्करण 1983 में प्रकाशित हुआ। 'रेव हिल' ने भी रामचरित मानस का अंग्रेजी में अनुवाद किया है, जो बहुत ही असरकारी ढंग से किया है। रामचरित मानस का अंग्रेजी पद्य में अनुवाद करने का श्रेय 'जी. एटाकिन्स को मिला। जिन्होंने पद्यानुवाद करते समय तुलसीदास की छंद योजना का पूर्ण निष्ठा के साथ पालन किया ।

फ्रांस में रामकथा ने काफी शोहरत पाई है। फ्रांसीसी भाषा के विख्यात फ्रेन्च मनीषी 'गार्सा द तासी' ने सुंदरकांड का अनुवाद किया था। फ्रेंच भाषा में 'डेनोविलि ने भी संक्षिप्त रामकथा लिखी हैै। डेलीलिए ने भी एक रामकथा 1809 में लिखी थी। फ्रांस के प्रख्यात लेखक 'इयोलित फोस ने भी वाल्मीकि रामायण का फ्रांसीसी भाषा में अनुवाद किया था। 1903 में फ्रांसीसी लेखक रसेल ने रामचरित से प्रभावित होकर वाल्मीकि रामायण का पुन: नए रूप में अनुवाद किया। सन् 1950 में फ्रांस की लेखिका 'शारतोल वादवेलि ने रामचरित मानस के विभिन्न कांडों का खण्डश: अनुवाद किया था और तुलसी रामायण के स्रोत तथा उनकी रचना पर अनुसंधान किया।

रूस में 'रामचरित मानस अत्यंत लोकप्रिय है। इसको लोकप्रियता दिलाने का श्रेय रूसी विद्वान प्रोफेसर 'वारन्निकोव को जाता है। जिन्होंने रूसी भाषा में रामचरित मानस का पद्यानुवाद किया, प्रकाशन 1948 में हुआ। इस अनुवाद के लिए उन्हें सोवियत संघ के सर्वोच्च पुरस्कार 'ऑर्डर ऑफ लेनिन से सम्मानित किया गया था। रूसी विद्वान 'लियो टॉलस्टाय ने अपने तमाम उद्धरणों में भगवान राम के आदर्शों की कई झलकियां प्रस्तुत की हैं। 

हॉलैंड के 'ए रोजरियस ने डच ईस्ट इंडिया कम्पनी के पादरी की हैसियत से रामकथा का प्रकाशन 'दि ओपन दोरे सन् 1681 में किया था। एक अन्य लेखक 'बल डे पुस की रचना 'आव गोर्ड सेप डर ओस्ट में रावण चरित्र से राम के स्वर्णारोहण तक की कथा की विवेचना है। इतालवी मनीषी डॉ. 'एल.पी. टेसीटेरी ने भी रामकथा पर पर्याप्त शोध किया है।  पुर्तगाल के डॉ. 'कालेण्ड ने तीन पुर्तगाली रामचरित पुस्तकों का प्रकाशन किया। जबकि जर्मनी में 'चीनने वाला नामक रामकथा 18वीं शदी में लिखी गई है। 

संसार में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली चीनी भाषा में भी रामायण का अनुवाद हो चुका है। चीन के विद्वान 'काड.सड.ही. ने बाल्मीकि रामायण का अनुवाद किया था। चीनी वासी रामायण में वर्णित हनुमान चरित से विशेष रूप से प्रभावित थे। 16वीं सदी में हनुमान को केन्द्रीय चरित बनाकर वहां उपन्यास भी लिखा जा चुका है।

म्यांमार (बर्मा ) में सन् 1800 ई. के करीब 'रामायागन की रचना हुई। ईसा की छठी शताब्दी में श्रीलंका के संस्कृत कवि 'कुमारदास ने 'जानकी हरण' नामक काव्यशास्त्र लिखा। इस शास्त्र में सीता हरण की घटना को बहुत ही मार्मिक, करुण तथा अद्ïभुत रूप से प्रस्तुत किया गया था।

पूर्वी तुर्कीस्तान की 'खेतानी रामायण तथा तिब्बत की 'तिब्बती रामायण गुण भद्र की बहुत कथा से प्रभावित हैं। इंडोनेशिया की प्राचीनतम रामायण 'ककविन है, बाद में जावा की 'सेक्रेड राम रचना भी बहुत लोकप्रिय हुई है। ये दोनों रचनाएं बाल्मीकि रामायण से प्रभावित हैं।

इनके अलावा मलाया में 'हिकायत सेरी राम, खमेर में सकेंति, थाईलैंड में राम कियेन लाओस में 'राम जातक आदि भी रामकथा की महत्त्वपूर्ण तथा लोकप्रिय रचनाएं हैं। ये अब भी वहां पर नाटक के रूप में खेली जाती हैं। जापान, मलेशिया, थाईलैंड, बर्मा, कम्बोडिया, पाकिस्तान आदि अनेक देशों में तो पुरातन भित्ति चित्रों, मंदिरों और संग्रहालयों के माध्यम से रामकथा मौजूद है।

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