गर्मियां और झुलसती त्वचा

मीना भण्डारी

8th April 2021

चिलचिलाती गर्मी न केवल हमारे शरीर को प्रभावित करती है बल्कि हमारी त्वचा भी इससे प्रभावित होती है। इसलिए फूल सी कोमल त्वचा को गर्मी से बचाकर रखना बहुत जरूरी है, वो कैसे आईये जानें।

गर्मियां और झुलसती त्वचा

गर्मी की तेज धूप और गर्म हवाएं हमारी खूबसूरती को छीन लेती है और कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याएं भी पैदा हो जाती हैं, जिसको अनदेखा करने पर हम कई तरह के रोगों से भी ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसा न हो इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी त्वचा का खास ख्याल रखें ताकि गर्म हवाएं हमारी त्वचा को नुकसान न पहुंचा सके। 

त्वचा की देखभाल

  • चेहरे को रोजाना तीन-चार बार फेसवॉश से धोएं।
  • रूखी त्वचा के लिए हल्के फ्रेशनर व टोनर का इस्तेमाल करें।
  • तैलीय त्वचा के लिए अच्छे प्राकृतिक प्रोडक्ट का प्रयोग करें।
  • अपनी त्वचा को कोमल और चिकना बनाए रखने के लिए प्राकृतिक मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें।
  • मौसम को ध्यान में रखकर ऐसा फेशियल करवाएं जो एंटी टैनिंग हो साथ ही त्वचा में ऑयल और मॉइश्चराइजर लेवल को संतुलित रखता हो।

गर्मियों में त्वचा संबंधी बिमारियां व उपाय

  • घमौरियां गर्मियों की बीमारी है। यह बीमारी फुंसियों के रूप में प्रदर्शित होती है और यह समस्या तब और अधिक असहनीय हो जाती है जब आप काफी देर तक घर से बाहर रहते हैं। जिन लोगों को काम करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, वे धूप, गर्मी, प्रदूषण या नमी से नहीं बच सकते। ज्यादा पसीने से अक्सर घमौरियां हो जाती हैं, छोटे छाले पड़ जाते हैं और ये त्वचा की परतों और चुस्त कपड़े वाले स्थानों पर ज्यादा होती हैं। घमौरियों के लिए आप अपनी दादी मां के जमाने के बेहतरीन नुस्खे आजमाएं, जैसे-
  • मटर के फूल, चंदन और धनिया पाउडर बराबर मात्रा में लेकर इसमें थोड़ा सा गुलाबजल और जायफल मिलाएं। इस प्रकार तैयार पेस्ट को प्रभावित जगह या पूरे शरीर पर लगाएं। थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से धोएं। आप ताजगी और स्फूर्ति का अहसास करेंगे।
  • घमौरियों के लिए एक चम्मच चंदन पाउडर के पेस्ट को एक छोटे कपूर और छाछ के साथ मिलाएं। घर में बने इस पेस्ट को नहाने से कुछ मिनट पहले लगाएं और ठंडे पानी से नहाएं। आपकी फुंसियां  बड़ी तेजी से पूरी तरह से गायब हो जाएंगी।
  • गर्मी के मौसम में मुंहासों की समस्या हो जाती है इसलिए इनसे बचने के लिए तैलीय भोजन का सेवन न करें और नट्स और गेंहू से भरपूर खाने का सेवन करें।

क्या खाएं

  • अत्यधिक पसीना निकलने के कारण आप अक्सर डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का शिकार हो जाते हैं, जिसका असर आपकी त्वचा पर साफ नजर आता है। डिहाइड्रेशन से बचने का सबसे बढ़िया उपाय है कि आप ढेर सारा पानी पीएं, आप चाहें तो लस्सी और नारियल पानी भी ले सकते हैं।
  • अत्यधिक वसायुक्त और तला हुआ भोजन खाने से सुस्ती आती है, जिससे आपके शरीर की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है। यह आपकी त्वचा पर भी असर डालता है और इसे बेजान और बदसूरत बना देता है।
  • बहुत ज्यादा कॉफी और चाय पीने से बार-बार पेशाब आता है, जिससे शरीर का पानी बाहर निकल जाता है और त्वचा का रूखापन बढ़ जाता है।
  • हल्का और आसानी से हजम होने वाला हेल्दी भोजन लें।
  • चुस्त, त्वचा से चिपके वस्त्र रक्त संचार में बाधा उत्पन्न करते हैं, इनसे अधिक पसीना आता है और आप असहज हो जाते हैं। ढीले-ढाले और हल्के रंग के कपड़े पहनें और दिनभर ठंडक का अहसास करें।
  • दिन में दो बार स्नान करें। प्रिकली हीट पाउडर का इस्तेमाल करें।
  • सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक धूप में जाने से बचें, क्योंकि इस समय पराबैंगनी किरणें अपने चरम पर होती हैं। घर से बाहर निकलने से आधे घंटे पहले शरीर के खुले हिस्सों पर 15-30 के एसपीएफ वाले सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग करें और हर 4-6 घंटे बाद इसे दुबारा लगाएं।
  • नींबू, जैतून का तेल, साबुत अनाज, नट्स, गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां और बीजों का सेवन करें।
  • अम्लीय आहार जैसे- डेयरी उत्पाद, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और चीनी के सेवन में कमी लाएं। दही या मट्ठा का अधिक सेवन करें।
  • अपने पोषण विशेषज्ञ की देख-रेख में कैल्शियम-खनिज सप्लीमेंट लें।
  • एक दिन में कम से कम 10 से 12 गिलास ताजा और स्वच्छ पानी पीकर अपनी त्वचा को हाइड्रेट बनाएं। यह आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकालने और त्वचा को जल्दी बूढ़ी होने से रोकने में प्राकृतिक ढंग से मदद करता है।
  • नियमित रूप से व्यायाम करने से मांसपेशियां प्रभावी तरीके से काम करने के लिए मजबूत बनेंगी। इससे आपकी त्वचा को अधिक ऑक्सीजन मिल सकेगी। जब आप व्यायाम करते हैं तो इससे जो पसीना निकलता है उसके साथ शरीर में जमा कई विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
  • तनाव मुक्त और खुशी से भरपूर जीवनशैली कई तरीके से आपकी मदद करेगी। ज्यादा तनाव के कारण आपकी त्वचा रूखी बन जाती है और बूढ़ी लगने लगती है। जब आप तनाव से बाहर आते हैं तो शरीर भी सही ढंग से कार्य करने लगता है और आपकी त्वचा पर बढ़ती उम्र का असर धीमा हो जाता है।
  • त्वचा की साफ-सफाई और अच्छी त्वचा देखभाल एक-दूसरे के पूरक हैं। जब आप अपनी त्वचा को साफ-सुथरा और स्वस्थ रखते हैं तो आप इसे विनाशकारी फ्री रेडिकल्स, जो आपकी त्वचा की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं, से मुक्त रखने में सहायता करेंगे।

 

इस्तेमाल करें पर ध्यान से

रोजमर्रा की दिनचर्या में हम न जाने कितनी ही चीजों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन शायद ही कभी हम ये जानने की कोशिश करते हैं कि ये चीजें हमारे लिए कितनी नुकसानदायक व फायदेमंद है?

हाल के वर्षों में त्वचा की देखभाल से जुड़े प्रसाधनों में लोगों की रुचि बढ़ी है। त्वचा की देखभाल के लिए बाजार सौंदर्य प्रसाधनों से भरे पड़े हैं। लेकिन यह जानना जरूरी है कि आप क्या इस्तेमाल करें और क्या न करें? कई बार हम जिन सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करते हैं वे त्वचा की खूबसूरती बढ़ाने के बजाय कई तरह की समस्याएं पैदा कर देते हैं। ऐसे में ये जानना जरूरी है क्या प्रयोग करें और क्या न करें?

हेयरडाई : हेयरडाई पर लिखे लेबल को अच्छी तरह पढ़ कर सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करें। डाई में अत्यधिक घातक तत्त्व होते हैं जैसे- फिनाइलिन डायामीन। यह तत्त्व कैंसर की संभावना को बढ़ा देता है। कोशिश करें कि त्वचा कम से कम संपर्क में आए।

हेयर स्प्रे : स्प्रे में छोटे-छोटे कण श्वांस नली के माध्यम से नीचे उतर कर ऑक्सीजन के साथ मिलकर रक्त में घुल जाते हैं। अगर स्प्रे इस्तेमाल करें तो खुली जगह पर करें।

मॉइश्चराइजर: कुछ मॉइश्चराइजर में आइसोप्रोपाइल मायरिस्ट्रेट होता है जो कि मुंहासों को बढ़ावा देता है। इसलिए आइसोप्रोपाइल युक्त मॉइश्चराइजर का प्रयोग कम से कम करें।

शैंपू: शैंपू में सोडियम लॉरिक सल्फेट व डीईए तो नहीं है, ये तत्त्व कुछ फेशवॉस में भी होते हैं। यह तंत्रिका तंत्र के लिए अत्यधिक नुकसानदेह होता है। इसी प्रकार जूं को मारने वाले शैंपू में प्रयुक्त घातक तत्त्व लिडेन त्वचा में अवशोषित होकर शरीर में इक_ïा होता रहता है। इसलिए जूं मारने वाले शैंपू का प्रयोग कम से कम करें।

टूथपेस्ट : फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल भूलकर भी न करें। ये शरीर पर खराब प्रभाव डालते हैं। इसी प्रकार कुछ टूथपेस्ट सुपरवाइट करने का दावा करते हैं, लेकिन इसमें प्रयुक्त छोटे-छोटे कण दांतों के ऊपरी सतह को खरोंच कर क्षति पहुंचाते हैं।

डियोडरेंट: डियोडरेंट पसीने की बदबू को रोकते हैं। एंटी पर्सपिरेंट पसीना आने से रोकने का काम करते हैं। इसमें एल्यूमिनियम व जिरकोनियम का प्रयोग होता है। एल्यूमिनियम तत्त्व दिमाग को क्षति पहुंचाते हैं। डियो का प्रयोग कम से कम करें।

साबुन: आजकल हर साबुन आपको कीटाणुरहित रखने का दावा करते हैं। देखें कि इसमें जहरीला तत्त्व ट्राईक्लोसान तो नहीं। यह तत्त्व लीवर को नुकसान पहुंचाता है।

माउथवॉश : 25त्न से अधिक अल्कोहल वाले माउथवॉश का लंबे समय तक प्रयोग करने से मुख व गले के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे माउथवॉश से दूर रहना चाहिए।

लिपस्टिक : लिपस्टिक, आई लाइनर व मस्कारा में लेड नामक धातु होता है। जांच के लिए लिपस्टिक को हाथ पर लगाएं, फिर उस पर सोने की अंगूठी रगड़ें। यदि लिपस्टिक का रंग काला पड़ जाता है तो समझ लीजिए इसमें लेड मिला है। ऐसी लिपस्टिक का प्रयोग भूलकर भी न करें।

आपका सौंदर्य प्रसाधन देसी हो या विदेशी, कितना भी महंगा क्यों न हो, उसमें लिखे निर्देशों को ध्यान से पढ़िए, कहीं इसमें घातक तत्त्व तो मौजूद नहीं हैं। ऐसे सौंदर्य प्रसाधन जिससे आपको एलर्जी हो उसे लगाना तुरंत बंद कर दें। उसी प्रकार साबुन, हेयरडाई, डियो आदि में लिखे निर्देशो को भी अवश्य पढ़ें।

यह भी पढ़ें -डिप्रेशन को करना चाहते हैं दूर तो डाइट में शामिल करें ये 4 चीज़ें

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