विष्णु अनन्तशय्या की अवस्था में विराजमान हैं केरल के इस मंदिर में

चयनिका निगम

14th April 2021

केरल का हजारों साल पुराना मंदिर है श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर। तिरुवनंतपुरम के इस मंदिर में विष्णु जी खास लेटी हुई अवस्था में विराजमान है।

विष्णु अनन्तशय्या की अवस्था में विराजमान हैं केरल के इस मंदिर में

केरल की सुंदरता से दुनियाभर के लोग वाकिफ हैं। इस राज्य में प्राकृतिक सुंदरता तो है ही मंदिरों की भी एक लंबी लाइन है। ये ऐसे मंदिर हैं, जो सालों पुराने हैं, सुंदर हैं और इनकी अपनी धार्मिक अहमियत भी है। इन्हीं मंदिरों में से एक है पद्मनाभास्वामी मंदिर। विष्णु के 108 पवित्र मंदिरों में एक इस मंदिर की कई खासियतों में से एक है यहां भगवान विष्णु अनन्तशय्या की अवस्था में हैं। इसके अलावा यहां के दरवाजों से मिले करोड़ों रुपए कीमत के जेवर भी हैरान करते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं इस मंदिर से जुड़ी कई और ख़ासियतें भी हैं। इनको एक बार तो जरूर जान लेना चाहिए। 

कैसे पहुंचें-

इस मंदिर तक आने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन तिरुवनंतपुरम सेंट्रल है जो करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर है। जबकि तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट यहां से सिर्फ 6 किलोमीटर दूर है। 

5000 साल पुराना है मंदिर-

ये मंदिर अद्भुत है और ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इसको बनाने का समय कलयुग से 5000 साल पहले का माना जाता है। लेकिन इसकी खूबसूरती और विशालता देखते ही बनती है। 

6 दरवाजे, करोड़ों के जेवर-

भारत के केरल राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम के पूर्वी किले के भीतर स्थित श्री पद्मनाभस्वामी में कुल 6 दरवाजे हैं। जिनमें से कुछ को ही अभी तक खोला गया है। जिसमें से 1 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा के जेवर मिले थे। इतने जेवर तब हैं, जब अभी कुछ दरवाजे खोले ही नहीं गए हैं। मगर इन दरवाजों को बंद किसने किया जेवर किसने रखे ये की नहीं जानता है। इन जेवरों की वजह से ही इस मंदिर को सबसे धनी मंदिर माना जाता है। 

विष्णु अनन्तशय्या की अवस्था-

ये मंदिर इसलिए खास है क्योंकि भगवान विष्णु यहां लेटी हुई अवस्था में हैं। भगवान विष्णु यहां भुजंग सर्प अनंत पर लेटे हुए हैं।

18 फीट लंबी प्रमुख प्रतिमा-

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की प्रमुख प्रतिमा अपने निर्माण की वजह से खास है। इसकी ऊंचाई करीब 8 फीट लंबी है। इसमें 12008 शालिग्राम हैं। ये शालिग्राम नेपाल की गंधकी नदी के किनारों से लाए गए हैं। खास बात ये है कि प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग दरवाजों से देखा जा सकता है। पहले दरवाजे से सिर के साथ सीना दिखता है तो दूसरे दरवाजे से हाथ दिखते हैं। इसके अलावा तीसरे दरवाजे से प्रतिमा के पैर दिखाई देते हैं।

खास पोशाक-

इस मंदिर में प्रवेश करने के लिए खास कपड़े पहनने होते हैं। पुरुषों को धोती पहननी होती है और महिलाओं को साड़ी या हाफ साड़ी। 

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