सनस्क्रीन और एसपीएफ से जुड़ी 10 जरूरी बातें

राजलक्ष्मी त्रिपाठी

15th April 2021

किसी भी कंपनी का सनस्क्रीन लोशन इस्तेमाल करने से त्वचा कुछ हद तक सुरक्षित तो रहती है, लेकिन कई बार त्वचा संबंधी समस्याओं से भी दो-चार होना पड़ता है।

सनस्क्रीन और एसपीएफ से जुड़ी 10 जरूरी बातें

गर्मियों में सबसे बड़ी चिंता होती है अपनी त्वचा को धूप की अल्ट्रॉवायलेट किरणों से बचाने की जिसकी वजह से न केवल आपकी त्वचा झुलसने लगती है, वरन टैनिंग की समस्या भी होने लगती है। गर्मियों में त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए आमतौर पर आप सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करती हैं। इससे त्वचा कुछ हद तक सुरक्षित तो रहती है, लेकिन कई बार त्वचा संबंधी समस्याओं से भी दो-चार होना पड़ता है। इससे बचाव के लिए जरूरी है सनस्क्रीन का चयन करने से पहले किसी डर्मेटॉलजिस्ट से सलाह ले ली जाए।

तीरथराम शाह हॉस्पिटल में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता रानी का कहना है, 'यह सच है कि सनस्क्रीन लगाकर तपती गरमी में भी आप अपनी त्वचा को तरोताजा बनाए रख सकती हैं। लेकिन आपकी त्वचा के लिए कौन-सा और कितने एसपीएफ का सनस्क्रीन उपयुक्त है, इसकी जानकारी होना भी जरूरी है। आपकी त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से ही होता है। इसकी वजह से त्वचा झुलस जाती है और नियमित तौर पर धूप में पड़ने वाले शरीर के खुले हिस्सों पर टैनिंग हो जाती है। इससे बचने के लिए आप जब भी अपने घर से बाहर जाएं, तो निकलने से दस मिनट पहले अपने शरीर के खुले हिस्सों पर अच्छी तरह से 30 एसपीएफ युक्त अच्छी किस्म का सनस्क्रीन लोशन लगाएं।

सनस्क्रीन से जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्यों को समझकर आप गर्मियों में भी अपनी त्वचा की बेहतर देखभाल कर सकती हैं।

पूरी देखभाल के लिए

बाजार में मिलने वाली सभी सनस्क्रीन क्रीम एक सी नहीं होती हैं। यह कतई जरूरी नहीं है कि आपकी सहेली की स्किन टोन पर जो सनस्क्रीन सूट कर रही है वो आप पर भी सूट करेगी। अगर आपकी त्वचा पिगमेंटेड है या फिर अन्य कोई स्किन प्रॉब्लम है तो फिर त्वचा विशेषज्ञ द्वारा बताई गई सनस्क्रीन का इस्तेमाल ही बेहतर होता है, जिससे कि सूर्य की यूवीए और यूवीबी किरणों से पूरी तरह बचाव हो सके और आपकी त्वचा तरोताजा रहे। इसके अलावा अपने लिए हमेशा किसी अच्छी कम्पनी के उत्पाद का ही चयन करना चाहिए।

इस्तेमाल से पूर्व पढ़ें

आप अपने लिए जिस भी कम्पनी के सनस्क्रीन का चयन करती हैं, उसके इस्तेमाल से पहले उस पर लिखी हुई जानकारी को पढ़ना बेहद जरूरी है, जिससे आपको पूरा फायदा हो। सभी प्रोडक्ट्स पर उसके इस्तेमाल से संबंधित जरूरी जानकारी दी गई होती है, लेकिन आप में से बहुत कम ऐसे होंगे, जो उस जानकारी को पढ़ते हों। सनस्क्रीन धूप में जाने से कितनी देर पहले लगाना है या फिर वह कितनी देर तक प्रभावी होगा, इस सब बातों की जानकारी जरूरी है।

एसपीएफ-30 या उससे ज्यादा 

चेहरे पर सनस्क्रीन लगाते समय सुनिश्चित करें कि आपके लिए कितने एसपीएफ का सनस्क्रीन लोशन उपयुक्त होगा। आमतौर पर विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि 30 एसपीएफ वाली क्रीम लगाने से सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचा जा सकता है जबकि सचाई यह है कि 30 एसपीएफ वाली क्रीम 97 प्रतिशत तक बचाव करती है जबकि 15 एसपीएफ युक्त क्रीम से 93 प्रतिशत तक बचाव होता है और 50 एसपीएफ से 98 फीसदी तक सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाव होता है। आप अपने लिए उपयोगिता के हिसाब से एसपीएफ का चयन करें। अगर आपको ज्यादा देर तक धूप में नहीं रहना है, तो अपने लिए कम एसपीएफ वाली क्रीम का भी चयन कर सकती हैं।

डस्की स्किन को भी चाहिए सनस्क्रीन

आमतौर पर लोगों में यह धारणा है कि सूरज की तेज किरणों से सिर्फ फेयर स्किन टोन वालों को ही नुकसान होता है इसलिए उन्हें ही सनस्क्रीन लोशन लगाना चाहिए। लेकिन एफडीए द्वारा 2011 में किये गये सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचने के लिए डस्की स्किन को भी एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन लोशन लगाने की जरूरत होती है। सनस्क्रीन के इस्तेमाल से ना केवल सनबर्न आदि की समस्या से छुटकारा मिलता है वरन् एजिंग और स्किन कैंसर जैसी समस्याओं से भी।

कारगर नहीं है एसपीएफ 2-4

कम नंबर वाला सनस्क्रीन लोशन या क्रीम सिर्फ सामान्य बॉडी लोशन की तरह होता है, जिसका इस्तेमाल आप सिर्फ ब्यूटी प्रोडक्ट के तौर पर करती हैं। यह तेज धूप में कारगर नहीं होता है। इसके इस्तेमाल से ना तो आप टैनिंग और सनबर्न की समस्या से निजात पा सकती हैं ना ही इसका प्रयोग आपको एजिंग की समस्या और त्वचा संबंधी समस्याओं से छुटकारा दिला सकता है।

वॉटरप्रूफ नहीं होती

अगर आप यह सोच रही हों कि मेकअप की ही तरह सनस्क्रीन भी वाटरप्रूफ होती है तो यह सच नहीं है। कोई भी सनस्क्रीन ऐसी नहीं होती जो वाटरप्रूफ हो। अगर आपने अपने चेहरे पर और शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लगाई है और आपको पसीना आ रहा है तो सनस्क्रीन प्रभावी नहीं रह जाती है। कंपनियां कितना भी दावा करें कि उनकी सनस्क्रीन लगाकर आप 40 से लेकर 80 मिनट तक स्विमिंग कर सकती हैं या फिर यह पसीने के प्रभाव को रोक सकता है, इसमें सच्चाई नहीं है।

कितनी देर तक प्रभावी

अगर आपको धूप में ज्यादा देर तक रहना हो तो फिर यह जरूरी है कि आप हर दो घंटे में दुबारा सनस्क्रीन लोशन लगाएं क्योंकि दो घंटे के बाद इसका प्रभाव खत्म हो जाता है। सनस्क्रीन को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले अपनी त्वचा को अच्छी तरह से साफ जरूर कर लें।

छोटे बच्चों को न लगाएं

बच्चों और बड़ों की त्वचा में अंतर होता है, इसलिए यह कतई जरूरी नहीं है कि अगर आप अपनी त्वचा के बचाव के लिए सनस्क्रीन लगा रही हैं तो छोटी उम्र के बच्चों को भी धूप में जाने से पहले सनस्क्रीन लोशन लगाएं। उनकी त्वचा प्राकृतिक तौर पर धूप से बचाव करने वाली होती है। इसके अलावा बच्चों की स्किन बहुत ज्यादा सेन्सिटिव होती है, जिसकी वजह से उनकी त्वचा पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। बच्चों को धूप में ले जाते समय उन्हें पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं और सिर पर कैप लगाएं।

एसपीएफ नंबर का गोलमाल

कितने एसपीएफ का सनस्क्रीन लोशन आपके लिए उपयुक्त होगा, यह समझना वाकई मुश्किल है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी देर तक धूप में खड़े रह सकते हैं और कब तक आपको सनबर्न और टैनिंग की शिकायत नहीं होगी और यह आपकी त्वचा के प्रकार पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए अगर आप दस मिनट तक धूप में खड़ी रहती हैं, उसके बाद आपको त्वचा पर तेज धूप का एहसास होता है तो इसका मतलब यह है कि आप 15 एसपीएफ लगाकर कम से कम डेढ़ घंटे तक अपनी त्वचा को सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तव में सनस्क्रीन पर जो लेबलिंग की जाती है और जो नंबर दर्शाए जाते हैं वह असलियत में पूरी तरह से खरे नहीं उतर पाते हैं, इसलिए सनस्क्रीन के इस्तेमाल से पहले उस पर दिये गये विवरण को समझ लेना चाहिए ताकि आप जान सकें कि ज्यादा फायदे के लिए आप कितनी मात्रा में और किस तरह से सनस्क्रीन लगाएं।

एकसार लगाएं

सनस्क्रीन लोशन लगाते समय इस बात का खासतौर पर ध्यान रखें कि इसे आप अपने शरीर के खुले हिस्से पर एकसार लगाएं, जिससे आपकी त्वचा को धूप से पूरी सुरक्षा मिल सके। कहीं कम और कहीं ज्यादा सनस्क्रीन लगाने से कहीं-कहीं सनबर्न और टैनिंग की समस्या हो सकती है। इसकी वजह से आपकी त्वचा धब्बों वाली भी बन सकती है।

 (तीरथराम शाह हॉस्पिटल में वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुनीता रानी से बातचीत पर आधारित) 

यह भी पढ़ें -ये है इंडिया की खूबसूरत बॉडी बिल्डर गर्ल्स, देखिए फोटोज

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