सफलता और मानवता की मिसाल

गृहलक्ष्मी टीम

15th April 2021

महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। हर क्षेत्र में खुद को साबित कर दिखाने वाली महिलाएं लगातार उन्नति करते हुए सफलता की बुलंदियों को छू रही हैं। मिलिए हमारे देश में कुछ ऐसी ही महिलाओं से, जो अपने प्रभावशाली कार्यों की वजह से दूसरी महिलाओं के बीच न सिर्फ एक उदाहरण हैं, बल्कि हमें ये सोचने पर मजबूर करती हैं कि वाकई में अगर कुछ ठान लिया जाए तो फिर कोई भी काम मुश्किल नहीं है।

सफलता और मानवता की मिसाल

मानसिक रोगियों को सिखाई जीने की कला

'सोचने से कहां मिलते हैं, तमन्नाओं के शहर चलना भी ज़रूरी है, मंजिल को पाने के लिए।' कुछ ऐसी ही मंजि़लों की तलाश में हम दिनभर यहां से वहां भटकते हैं। न जाने कितने ही ख्याल, न जाने कितने ही सवाल हमारे ज़हन में हर पल उठते हैं। क्या चाहिए मुझे, कैसे करूं, क्या ज़रूरी है और न जाने क्या-क्या। मगर कई बार हम में से न जाने ऐसे कितने ही लोग हैं, जो इन सभी सवालों का जाल अपने इर्द गिर्द कुछ इस कदर बुन लेते हैं कि खुद ही उसमें फंसकर रह जाते हैं। नतीजन किसी न किसी मानसिक बीमारी का शिकार हो जाते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं मानसिक तनाव की और मन के रोगों की, जो हमारी सोच से उत्पन्न होकर, हमारे शरीर को भी काफी हद तक प्रभावित करती है। ऐसे में ज़रूरत है उन लोगों की, जो हमें इस तरह की समस्या से मुक्त करा सके। कुछ ऐसे ही लोगों में शुमार है कंचन राय। आम सी जिंदगी गुज़ार रही कंचन को जीवन में कुछ अलग करना था। दरअसल, वो जीवन में कुछ खालीपन महसूस कर रही थीं। फिर खुद-ब-खुद उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया कि उन्होंने दिनों दिन बढ़ रहे तनाव की इस स्थिति से लोगों को मुक्त करने के लिए बतौर 'मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग कोच' काम करना शुरू कर दिया। कंचन राय ने 'लेट अस टाक' फाऊंनडेशन की शुरुआत की और जीवन से निराश हो चुके लोगों को जीवन जीने की कला सिखाई और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया। कंचन का मानना है कि लोग मेंटल हेेल्थ के बारे में नहीं सोचते हैं, लेकिन जीवन को एक दिशा प्रदान करने के लिए मेंटल वेलबीइंग बेहद ज़रूरी है। कंचन राय की पहल, लेट अस टाक फाउंडेशन में 20 लोगों की एक टीम है। इस टीम में काउंसलर, साईकैटरिस्ट, डाक्टर और कोच हैं। कंचन अपने खाली समय में वर्कआउट करना पसंद करती हैं। कंचन को अपने काम में अपने परिवारजनों का पूरा सहयोग हासिल हुआ है।


केमिकल फ्री प्रोडक्ट्स बनाकर जीता सबका दिल'

कौन कहता है आसमान में सुराख हो नहीं सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।' जज्बातों से ख्यालों तक का सफर आसान होता है, मगर ख्यालों को हकीकत की शक्ल देना शायद उतना आसान नहीं हो पाता, मगर कुछ कर गुज़रने के जज्बे, जदीद हौंसले और आगे बढ़ने की चाहत में सारिका मंगेश आज उस मकाम पर हैं, जहां पहुंच पाना आसान नहीं था। घरवाले देख रहे थे कि कम उम्र में ही इस मासूम में तूफानों से भिड़ जाने का ज़बरदस्त हौंसला मौजूद है। कई मामलों में नामुमकिन को मुमकिन साबित करने का जज़्बा है। दरअसल उम्र नन्ही थी मगर इरादे बेहद ऊंचे और उन्हीं ऊंचे इरादों की बदौलत सारिका आज ट्रू फरोग कंपनी की को-फाउंडर हैं। साथ ही कंपनी में बतौर चीफ रिसर्च और डेवलपमेंट आफिसर के तौर पर काम कर रही हैं। कॉस्मेटिक टेक्नोलोजी में मास्टर डिग्री हासिल करने वाली सारिका मंगेश ने तकरीबन पंद्रह साल तक अलग-अलग कंपनियों में बतौर प्रिंसिपल साइंटिस्ट काम किया और खूब तजुर्बा हासिल किया। सफल कोस्मेटोलाजिस्ट के तौर पर खुद को साबित करने वाली सारिका ने जिंदगी से कभी हार नहीं मानी और आगे ही आगे बढ़ती चली गईं। सारिका का मानना है कि जब चेहरे और बालों की बात आती है तो हमें नेचुरल इंग्रीडिएंटस से तैयार चीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। सारिका का कहना है कि प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है और हमें केमिकल मुक्त प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करना चाहिए। लगातार रिसर्च और कुछ नया करने की चाहत में सारिका ने चेहरे और बालों की देखरेख के लिहाज से नेचुरल चीजों की मदद से कई बेहतरीन प्रोडक्ट्स तैयार किए हैं, जिन्हें खूब पसंद किया जा रहा है। सारिका अपने प्रोफेशन के साथ-साथ अपने परिवार को भी पूरा वक्त देती हैं।

महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं मानसी

'तू थककर न बैठ तेरी उड़ान अभी बाकी है, ज़मीन खत्म हुई तो क्या अभी आसमान बाकी है।'

हमारे देश की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। घर की प्रगति हो या फिर देश की उन्नति, महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हुई नज़र आती हैं। यही नहीं न जाने कितनी बार वो पुरुषों से आगे रहती हैं। ऐसी ही महिलाओं में से एक हैं मानसी चंद्रा। जीवन में आए कई उतार-चढ़ाव के बावजूद वो हारी नहीं, टूटी नहीं बल्कि और मज़बूती के साथ आगे बढ़ीं। वो जीवन में कुछ इस तरह से आगे बढ़ती चली गईं की फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सन 2011 में अपने पति की अकस्मात मृत्यु के बाद वो बिखरी नहीं बल्कि और मज़बूती के साथ खड़ी हुई और उन्होंने सन 2012 में एक जिम की शुरुआत की। मगर इस कार्य से वो संतुष्ट नहीं थी। अब दोनों बच्चों की बेहतरीन परवरिश मानसी की जिम्मेदारी थी। इसी सोच के चलते उन्होनें पूरी हिम्मत और जज्बे के साथ सन 2013 में जूतों की एक फैक्टरी को किराए पर लिया और मुट्ठी भर लोगों के साथ काम करना शुरू कर दिया। सालों अपने पिता के साथ जूता फैक्टरी में काम कर चुकीं मानसी के पास इस काम का तुजुर्बा था, जो उन्हें इस दौरान काम आया। उनकी इस फैक्टरी में पुरुषों के साथ महिलाएं भी काम कर रही हैं। मानसी ने जीवन में अपने अटूट प्रयासों की बदौलत न सिर्फ अपने मुस्तिकबिल को संवारा बल्कि बहुत सी ज़रूरतमंद महिलाओं को आगे बढ़ाया और उन्हें फैक्टरी में काम करने का प्रशिक्षण भी दिया। मानसी की जूता फैक्टरी में इस वक्त एक हजार लोग काम कर रहे है, जिनमें से पांच से छ: प्रतिशत महिलाएं है। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए मानसी ने अथक प्रयास किए, जो महिलाओं के लिए काफी कारगर साबित भी हुए। इसके अलावा उन पर होने वाले जुल्मों से उन्हें मुक्त करवाया और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने की हिम्मत दी। महिलाओं को विश्वास दिलाया कि जीवन में कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। इतना ही नहीं बहुत सी महिलाओं को खुद मुख्तार बनाया और उन्हें चार दीवारी से बाहर निकलकर जीना सिखाया और उन्हें रोज़गार भी दिलाया। सालों पहले मानसी ने जिस जूता कारोबार की शुरुआत की थी। आज वो इस कारोबार की बदौलत केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब शोहरत बटोर चुकी हैं। टीएआरए इनोवेशंस में तैयार होने वाला सामान विदेशों में भी बड़े स्तर पर एक्सपोर्ट किया जाता है। इसके अलावा मानसी ने पिंक बैल्ट मिशन के साथ महिलाओं की सेफ्टी और सेल्फ डिफेंस के लिए बहुत से कार्यों को अंजाम दिया। पिंक बेल्ट मिशन की संस्थापक अपर्णा राजावत के साथ मिलकर मानसी चंद्रा ने एक डिवाइस तैयार किया है, जो एक तरह का बैंड है। ये पिंक रिस्ट बैंड एक ऐसा अलार्म है, जो मुसीबत के वक्त आप इस्तेमाल कर सकती हैं। इस पर लगे बटन को दबाते ही इस्टेंटली आपकी लोकेशन की जानकारी नज़दीकी पुलिस स्टेशन तक पहुंच पाएगी। ये बैंड बतौर बाडीगार्ड आपकी मदद कर पाएगा। इतना ही नहीं मानसी चंद्रा को कई इनामात से भी नवाज़ा जा चुका है। उन्हें बेस्ट वुमेन इंटरपरेन्योर के अलावा फिक्की की तरफ से बेस्ट नारी शक्ति अवार्ड फार बिजनेस वुमेन से सम्मानित किया जा चुका है।

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