क्या है एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम, इसके लक्षण और उपाय

Spardha Rani

16th April 2021

“एम्प्टी नेस्ट” का मतलब उस खालीपन और अकेलेपन से है, जिसे पेरेंट्स तब महसूस करते हैं जब उनके बच्चे अपना घर छोड़कर खुद स्वतंत्र तौर पर रहने के लिए निकल जाते हैं।

क्या है एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम, इसके लक्षण और उपाय

ललिता जी ने अपना पूरा जीवन अपने दोनों बच्चों को समर्पित कर दिया। दोनों की रुटीन के चारों ओर ही उनकी जिंदगी चलती थी। कब किसे क्या चाहिए, इसका पता उन्हें हमेशा रहता था। बेटे को रात के समय देर तक जागकर पढाई करना पसंद था तो वह रात में बीच- बीच में जागकर उसे खाने- पीने के बारे में पूछती रहतीं। बेटी को सुबह जल्दी जागकर पढ़ना पसंद था तो वह उससे चाय पूछतीं। कहने का मतलब यह था कि उन्हें अपनी जिंदगी से कुछ नहीं चाहिए था। उन्हें सिर्फ अपने बच्चों से मतलब था। पति सुधीर भी उन्हें कई बार कहते कि ललिता अपने लिए भी समय निकालो, सुबह टहलने जाया करो लेकिन ललिता को तो सिर्फ बच्चों की धुन सवार रहती। बच्चे भी अपनी मां को खूब प्यार और दुलार देते। मां के बिना न तो उनकी रात होती और न ही सुबह। लेकिन वह दिन भी जल्दी ही आ गया जब दोनों बच्चों को पढाई के सिलसिले में शहर से बाहर जाना पड़ा। चूंकि दोनों में सिर्फ डेढ़ साल का अंतर था तो जल्दी ही दोनों बाहर निकल गए। पहले तो बच्चों को भी दिक्कत हुई, लेकिन नए दोस्तों और नए माहौल में वे एडजस्ट हो गए।

सुधीर जी तो पहले से ही इस बदलाव के लिए तैयार थे, वे ऑफिस के काम में भी बिजी रहते थे। सबसे ज्यादा परेशानी ललिता जी को होने लगी। रात - रात भर उन्हें नींद नहीं आती थी और सुबह थोड़ी देर के लिए सो पातीं। अक्सर उन्हें लगता कि उनके बच्चे उन्हें आवाज दे रहे हैं। जब उनके आने की खबर सुनती तो उनकी नींद भी ठीक हो जाती। लेकिन उनके जाते ही फिर वही आधी- अधूरी नींद ने उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालना शुरू कर दिया था। सुधीर जी उन्हें घर से बाहर जाने खाते, कई बार खुद भी साथ जाते। ललिता जी उतनी देर अच्छे से रहतीं लेकिन घर आते ही फिर वही हाल!

हर पेरेंट को कहीं कहीं अंदर से पता होता है कि एक दिन ऐसा आएगा जब उनके बच्चे बड़े होंगे और अपने घर छोड़कर बाहर जाएंगे। लेकिन जब असल में समय आ जाता है तो उनके मन में कई तरह के भाव आने लगते हैं। एक तरह यह एक्साइटमेंट रहती है कि उनके बच्चे अब इंडिपेंडेंट हो जाएंगे तो वही दुख भी बहुत होता है कि अब वे साथ नहीं रहेंगे। यह खालीपन और गहरा दुख जिसे माता- पिता अनुभव करते हैं, इसे एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम कहा जाता है।

क्या है एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम

जैसा कि नाम "एम्प्टी नेस्ट" का मतलब उस खालीपन और अकेलेपन से है, जिसे पेरेंट्स तब महसूस करते हैं जब उनके बच्चे अपना घर छोड़कर खुद स्वतंत्र तौर पर रहने के लिए निकल जाते हैं। जब बच्चे घर छोड़कर जाते हैं, तो ऐसा अनुभव होना लाजमी है। पहले के रिसर्च बताते हैं कि कुछ पेरेंट्स को अकेलेपन का ऐसा अनुभव होता है जो उन्हें गंभीर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं की ओर धकेलता जाता है। कई बार इससे डिप्रेशन, आइडेंटिटी क्राइसिस, शादी में समस्या और कुछ हद तक अल्कोहल की समस्या भी हो जाती है।

एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम के लक्षण

सबसे पहले एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम के आम चिह्नों और लक्षणों को जानते हैं।

गुस्सा

फ्रस्ट्रेशन, गुस्सा, इरिटेशन, ये सब एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम के लक्षण हैं। लोगों को अचानक छोटी- छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है, ऐसी बातें जो पहले उन्हें परेशान नहीं करती थी। इससे आपसी रिश्ते में खटास आ जाती है।

उदासी

इमोशनल तरीके से दुखी महसूस करना और हर समय रोने का मन करना, जो किसी भी तरह से नॉर्मल नहीं है। लंबे समय तक दुखी रहने से डिप्रेशन हो जाता है। अगर एक महिला मेंसट्रूएशन से गुजर रही है और उसी समय उसके बच्चे बाहर निकल जाते हैं। ऐसे समय में इस सिंड्रोम की वजह से डिप्रेशन होने का जोखिम ज्यादा रहता है।

पहचान खोने का डर

ललिता जी की तरह जो पेरेंट दिन- रात अपने बच्चे के पीछे घुमा करते हैं, उन्हें बच्चों के जाने के बाद ऐसा महसूस हो सकता है कि उनकी पहचान खो गई है। उनके जीवन का उद्देश्य खत्म हो चुका है।

नींद न आना

नींद न आना और बुरे सपने देखना इस सिंड्रोम के कुछ शारीरिक लक्षण हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पेरेंट्स अपने बच्चों की चिंता करते रहते हैं। जरूरत से ज्यादा शॉपिंग और अल्कोहल का सेवन भी इसके अन्य लक्षण हैं।

एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम से निकलने के उपाय  

यदि आप उन लोगों में से एक हैं, जिन्हें दो या इससे अधिक लक्षणों का अनुभव हो रहा है तो इसका मतलब यह है कि आप एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम से गुजर रही हैं। इस स्थिति से निकलने के लिए आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है।

जुड़ाव बनाए रखें

ऐसे समय में जरूरी है कि आप अपने बच्चों से बातें करते रहें। उन्हें नियमित फोन कॉल्स करते रहें, वीडियो कॉल्स करें और सम्भव हो तो कुछ - कुछ दिनों में उनसे मिलने जाते रहें।

पॉजिटिव रहें

इस समय जरूरी है कि आप पॉजिटिव रहें और उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करें, जिन्हें करना आपको पसंद है। फिर चाहें कुकिंग हो, गार्डनिंग हो या फिर किताबें पढ़ना। अपने आस- पास देखिये ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिन्हें करना आपको अच्छा लगेगा। आप चाहें तो कोई क्लब ज्वाइन कर सकती हैं।

मदद लें

अपने दोस्तों या परिवार से लगातार बातें करते रहें। उन्हें बताएं कि आप कैसा महसूस कर रही हैं। यदि आपको फिर भी अच्छा महसूस नहीं हो रहा है तो आप प्रोफेशनल मदद भी ले सकती हैं।

कुछ स्टडीज इस सबके विपरीत जाकर यह कहते हैं एम्प्टी नेस्ट कपल्स के लिए कई तरह से लाभकारी हो सकता है। पति- पत्नी के पास एक- दूसरे के साथ कनेक्ट होने का ज्यादा समय मिलता है। वे दोनों साथ मिलकर अपने रिश्ते को बेहतर बना सकते हैं।

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