क्या आपका जीवनसाथी भी कम बोलता है? जरूरी है कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना

Spardha Rani

28th April 2021

आपका जीवनसाथी आपको सुने, इसके लिए कोई जादू नहीं होने वाला, बस आपके लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।

क्या आपका जीवनसाथी भी कम बोलता है? जरूरी है कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना

मीरा इन दिनों थोड़ी परेशान और चिड़चिड़ी रहती है। जब उसकी प्यारी सहेली ने उससे इसका कारण पूछा तो मीरा ने बताया कि उसके पति सौरभ उसकी बात ही नहीं सुनते। सौरभ हर समय काम या मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। सौरभ की यह अनदेखी मीरा को अंदर से ही कचोट रही है। यह कहानी सिर्फ मीरा और सौरभ की नहीं है। आज की तेज भागती दिनचर्या में लोगों के पास समय भी रहता है तो वे मोबाइल में अपनी खुशियां ढूंढते हैं। घर में क्या हो रहा है, यह जानने की बजाय उन्हें पूरी दुनिया की चिंता ज्यादा रहती है। पति- पत्नी को आपस में बात करने का समय नहीं मिलता, एक को मिलता है तो दूसरे को नहीं मिलता। धीरे- धीरे वह मेरी नहीं सुनता/ सुनती से लेकर चीजें और खराब होती जाती हैं। जब आपको यह महसूस होता है कि एक रिश्ते में आपको सुना और समझा जा रहा है तो यह सुकून का अहसास उस रिश्ते में शामिल दोनों व्यक्ति के लिए जादू कर जाता है। आपका जीवनसाथी आपको सुने, इसके लिए कोई जादू नहीं होने वाला, बस आपके लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।

सही समय

कई दफा आपको लगता है कि जैसे ही आपके मन में कोई विचार या अहसास जागे, कोई आपको सुन ले। लेकिन संभव हो सकता है कि उस समय आपका साथी कुछ और कर रहा हो, मसलन खेल रहा हो, खाना बना रहा हो, सोने की कोशिश कर रहा हो या कोई और काम कर रहा हो। अपने अनुभव से यह आपको जानना है कि कौन सा समय बताने के लिए सही नहीं है। संभव है कि रात को बिस्तर पर जाने से पहले उसके पास समय हो आपको सुनने का। आप जब भी बात शुरू करें और वह न सुने तो पूछें कि क्या इस समय बात कर सकते हैं।

बातों की एडिटिंग और फीडबैक  

कई बार ऐसा होता है कि आप बात करना शुरू करती हैं तो रौ में बहकर बोलती जाती हैं। संभव है कि आपको अपनी बातों को एडिट करके सुनाने की जरूरत है। अपनी बात बोलने के बीच में सामने वाले से फीडबैक मांगें। यदि आप उनकी मदद चाहती हैं तो पूछें कि मुझे लग रहा है कि मैं इसे ठीक तरीके से नहीं समझ पा रही हूं। या पूछें कि मैं ऐसा क्या करूं कि यह सब ठीक हो जाए। इस तरह से आप सामने वाले को भी अपनी राय रखने का मौका देती हैं। कई बार विषय बताकर पहले से पूछ लें कि क्या हम इस विषय पर दस मिनट बात कर सकते हैं। इस तरह से आप दोनों उसी विषय पर केंद्रित बातें करेंगे।

आपत्तिजनक नहीं

कई बार कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि सुनने के लिए खराब बोलना जरूरी है। हो सकता है कि यह कभी- कभार के लिए सही हो लेकिन जब आप बार- बार इस तरह से करती हैं तो अपनी विश्वसनीयता खो बैठती हैं। धीमा बोलें और बीच- बीच में चुप भी हो जाएं। जब आप धीमी आवाज में बात करती हैं तो आपको अधिक सुना जाता है।

हमला न करें

यदि आप हमला और आलोचना करते हुए बात करेंगी तो सुनने वाला कभी भी बेहतरीन श्रोता नहीं बनेगा। अपने जीवनसाथी को बेवकूफ और मूर्ख या तुम हमेशा ऐसा ही कहते हो जैसा कहना झगड़े को बढ़ाता है। हमेशा सलाह देते हुए बात करने कोशिश करें, जैसे- सफाई करने में मेरी मदद कर देते तो मुझे थोड़ा आराम मिल जाता। कभी सराहना भी कर दिया करें, जैसे- राशन खरीदारी में मेरी मदद करके तुमने मुझे राहत दे दी।

स्पष्ट बताएं

कई बार हम सिर्फ अपने अहसास बयान करना चाहते हैं और चाहते हैं कि हमारा जीवनसाथी ध्यान से हमें सुनें। यह ठीक है लेकिन आपके जीवनसाथी को यह जानने की जरूरत है कि आप कहां तक जा रही हैं। हो सकता है कि आप थोड़ी देर बातें शेयर करना चाहती हों या थोड़ी देर बात किसी समस्या का समाधान चाहती हों। शोध और अध्ययन बताते हैं कि अधिकतर लोग चाहते हैं कि कोई उन्हें सुने। ये लोग सिर्फ अपने अहसास को लेकर सहयोग की उम्मीद रखते हैं। आपको अहसास जाहिर करने के लिए न केवल समय देना है बल्कि स्पेस भी उतना ही जरूरी है।  

सुनने का मतलब राजी होना नहीं

कई बार हमें यह लगता है कि सुनने वाला हमारी बात पर राजी भी हो जाए क्योंकि हम बहुत दुखी हैं। लेकिन यह रवैया गलत है। सुनने का मतलब सिर्फ सुनने से है, समझने से है लेकिन यह जरूरी नहीं कि सामने वाला राजी भी हो जाए। वह राजी नहीं है कि, इसका मतलब यह भी नहीं कि उसे आपके अहसासों की कद्र नहीं। आपकी यह सोच सही नहीं है और इसे लेकर दुखी होने और बाद में जीवनसाथी पर हमला करने से रिश्ते की खटास बढ़ती जाती है।

सलाह का सम्मान

यदि आप अपने साथी के पास सहयोग और सलाह के लिए जा रही हैं तो आपको फीडबैक मिलेगा ही, वह भी सलाह के तौर पर। हो सकता है कि आपको उनकी सलाह अच्छी न लगे और आप आलोचनात्मक रवैया अपना लें। आपका जीवनसाथी वही कर रहा है जो उसे करना चाहिए। लेकिन उस तरह से नहीं, जैसा आप चाहती हैं। यह भी हो सकता है कि असल में उसकी सलाह सही नहीं हो लेकिन यदि आप चाहती हैं कि वह आपको सुने तो आपको उसका और उसकी सलाह का सम्मान भी करना चाहिए।

शुक्रिया अदा करें

अब आपकी बारी सुनने की है तो उस व्यक्ति का समर्थन कीजिए, जो आपका समर्थन कर रहा है। उसने जो बात बोली, उसे आप उसके नजरिए से देखने की कोशिश करें। वह आपकी सुन रहा है, वह भी उस विषय पर जो आपको परेशान कर रहा है। उनके लिए भी यह मौज- मस्ती नहीं है। लेकिन वह आपके साथ हैं। उनके सलाह की अवमानना करने की बजाय उन्हें सुनने और साथ में समय बिताने के लिए शुक्रिया अदा कीजिए।

आपका सुनना भी जरूरी है। आप सिर्फ यह नहीं कह सकती हैं कि वह मेरी नहीं सुनते। संभव है कि आपके साथी को कोई चीज परेशान कर रही है। वह आपसे अपनी बात शेयर करना चाह रहा है। एक व्यक्ति को खुलकर बोलने में काफी कोशिश करनी पड़ती है। आपको भी अपनी राय रखने का मौका मिलेगा, इसलिए अपनी बारी आने का इंतजार करें। जब आपका जीवनसाथी अपनी बात खत्म कर ले और आपको कुछ समझ में न आया हो तो सवाल जरूर पूछें। चीजों को कल्पना में न सोचें और न ही हमला करने की योजना बनाएं। हमला या आलोचना करने से बातचीत बिगड़ जाती है।

 

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