शनिदेव के ये 5 मंदिर मिटाते हैं साढ़ेसाती का दोष

शिखा पटेल

3rd May 2021

पूरे भारत में शनिदेव के 5 ऐसे मंदिर हैं, जो अपनी मान्यता और महिमा के लिए प्रसिद्ध हैं। शास्त्रों में ऐसा वर्णन मिलता है कि यहां दर्शन मात्र से ही शनि की साढ़ेसाती का प्रकोप खत्म हो जाता है।

शनिदेव के ये 5 मंदिर मिटाते हैं साढ़ेसाती का दोष

न्याय के देवता कहे जाने वाले भगवान शनिदेव जब किसी से नाराज होते हैं तो उसके लिए आफत ही आ जाती है, लेकिन जब किसी से वे प्रसन्न हो जाते हैं तो उसके हर काम आसान कर देते हैं। शनि की ढईया या साढ़ेसाती से बचने के लिए लोग तरह-तरह के ज्योतिषीय उपाय करते हैं, वहीं भारत में शनिदेव के ऐसे भी 5 मंदिर हैं, जिनके सच्चे मन से दर्शन मात्र से ही शनि पीड़ा दूर हो जाती है। देखते हैं लिस्ट उन 5 मंदिरों की-

1- शनि मंदिर, उज्जैन

मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन, 'मंदिरों की नगरीÓ के नाम से भी प्रसिद्ध है। 2 हजार साल पुराने इस मंदिर में मुख्य शनि प्रतिमा के साथ ही एक अन्य शनि प्रतिमा भी स्थापित है, 'जिसे ढय्या शनि' कहते हैं। शनि की ढय्या को दूर करने के लिए भक्त इस मूर्ति पर तेल चढ़ाते हैं और साढ़ेसाती या अन्य समस्याओं के लिए शनि की मुख्य प्रतिमा की पूजा की जाती है।

2- शनि शिंगणापुर, महाराष्ट्र

भारत में सबसे बड़े शनि मंदिरों में से एक है शनि शिंगणापुर। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां पर शनिदेव की प्रतिमा खुले आसमान के नीचे है। ऐसी मान्यता है कि यहां के सभी घरों की रक्षा खुद शनिदेव करते हैं। लोग अपनी पीड़ा को कम करने के लिए इनके दर्शन को दूर-दूर से आते हैं।

3- शनि मंदिर, इंदौर

मध्य प्रदेश के इंदौर में शनिदेव का एक अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है। इस शनि मंदिर की विशेषता यह है कि यहां शनिदेव का 16 शृंगार किया जाता है। इसके अलावा यह मंदिर चमत्कारी किस्सों के लिए प्रसिद्ध है। यहां शनिदेव का सुंदर रूप देखने को मिलता है।

4- शनिश्चरा मंदिर, ग्वालियर

शनिदेव का यह मंदिर मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह शनि पिंड भगवान हनुमान ने लंका से यहां फेंका था, जो जब यहां पर आकर गिरा, तब से शनिदेव के मंदिर में स्थापित है। यहां शनिदेव को तेल चढ़ाने के साथ गले मिलने की भी अद्भुत परंपरा है। यह आस्था और भक्ति में भक्त और भगवान के बीच की दूरी को मिटा देती है।

5- शनि मंदिर, तिरुनल्लर

यह मंदिर तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि जिन लोगों पर शनि का अशुभ प्रभाव हो, वे यदि यहां आकर दर्शन करें तो शनिदेव उन पर प्रसन्न हो जाते हैं और उन्हें राहत मिलती है। 

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