कोवैक्सीन और कोविशील्ड में क्या है अंतर? जानें इन दो वैक्सीन से जुड़ी हर जरूरी बात

Spardha Rani

4th May 2021

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों में से कौन सा वैक्सीन ज्यादा बढ़िया या अच्छा है। इस सवाल का जवाब आपको इस आर्टिकल में मिलेगा।

कोवैक्सीन और कोविशील्ड में क्या है अंतर? जानें इन दो वैक्सीन से जुड़ी हर जरूरी बात

जबसे 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए वैक्सीन की प्रक्रिया शुरू हुई है, तबसे सबके मन में यह बात और ज्यादा आने लगी है कि कौन सा वैक्सीन ज्यादा बढ़िया या अच्छा है। अभी हमारे देश में वह समय चल रहा है, जब म्यूटेंट वायरस और इन्फेक्शन की दूसरी लहर के साथ आम जनता परेशान और दुखी है। जाहिर सी बात है कि सबको इस समय सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीन चाहिए क्योंकि ज्यादातर मामले यह बताते हैं कि वैक्सीन का एक डोज ले चुके लोगों को भी अगर कोरोना हो रहा है, तो वे घर पर ही जरूरी देखभाल के साथ ठीक हो जा रहे हैं। यहां इस आर्टिकल में आज आपको कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों वैक्सीन से जुड़ी हर जानकारी जानने को मिलेगी।

हमारे यहां कौन से वैक्सीन हैं उपलब्ध?

इस समय हमारे देश में आम लोगों के लिए दो वैक्सीन उपलब्ध है- भारत बायोटेक का कोवैक्सीन और सीरम इंस्टिट्यूट - ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी - एस्ट्राजेनेका का कोविशील्ड वैक्सीन। अन्य वैक्सीन में स्पटनिक वी के बारे में भी कहा जा रहा है कि यह जल्दी ही उपलब्ध होगा।

क्या एक दूसरे से बेहतर है?

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों वे वैक्सीन हैं, जिन्हें भारत में ही तैयार किया गया है और ये दोनों ही अभी मिल रहे हैं। एक ओर जहां कोवैक्सीन पूरी तरह से भारत में ही बनाया, विकसित और निर्मित वैक्सीन है, वहीं दूसरी ओर कोविशील्ड का निर्माण पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने किया है। बावजूद इसके इन दोनों में कुछ अंतर और लाभ हैं, जो इन्हें एक- दूसरे से अलग करते हैं। कोविशील्ड ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी - एस्ट्राजेनेका जैब एक पॉपुलर चॉइस है, जिसका इस्तेमाल अधिकतर देशों में किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कोवैक्सीन को म्यूटेंट स्ट्रेन के खिलाफ़ सबसे प्रभावी वैक्सीन माना जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या एक दूसरे से बेहतर है? अब जबकि दोनों मिल रहे हैं तो इन दोनों वैक्सीन केप्रयोग को लेकर देश में एक बहस सी छिड़ गई है।

कैसे होता है इनका निर्माण?

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों एक समान वैक्सीन हैं, जिनका निर्माण निष्क्रिय / मॉडिफाइड वायरस का इस्तेमाल करके किया जाता है। कोविशील्ड को सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित और मार्केट किया जा रहा है। यह एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है, जो लाइव वायरस के रिस्पॉन्स में स्पाइक प्रोटीन डिलीवर करने और सहिष्णु इम्यून रिस्पॉन्स को माउंट करने के लिए चिम्पैंजी में पाए जाने वाले एडेनोवायरस ChAD0x1 का प्रयोग करती है। दूसरी ओर, कोवैक्सीन को पारंपरिक तरीके से बनाया गया है, जिसमें एक निष्क्रिय वायरल स्ट्रेन का प्रयोग किया गया है। इसके निर्माण में एक मृत वायरस का इस्तेमाल किया गया है, जो इम्यून रिस्पॉन्स को ड्राफ़्ट करता है।

वैक्सीन के कितने डोज की जरूरत है?

ये दोनों वैक्सीन के दो डोज की जरूरत है, जिन्हें कुछ सप्ताह के अंतराल में लगाया जाना चाहिए। इन्हें बाजू के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है। कोवैक्सीन के दूसरे डोज को पहले डोज के एक से डेढ़ महीने के बाद दिया जाना चाहिए तो कोविशील्ड के दूसरे डोज को पहले डोज के डेढ़ से दो महीने के बाद। यह सलाह तब दी गई जब विशेषज्ञों ने यह पाया कि दूसरे डोज में देरी से इम्यून रिस्पॉन्स मजबूत होता है। इन दोनों वैक्सीन को परंपरागत तरीके से 2-8 डिग्री तापमान में स्टोर करके रखा जाता है।

कितने प्रभावी हैं ये?

यह सवाल अक्सर सबके जेहन में आ रहा है कि कौन सा वैक्सीन लगवाएं, कौन सा ज्यादा बढ़िया है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के स्टैंडर्ड के अनुसार दोनों वैक्सीन प्रभावी हैं। हालांकि, समय के साथ ज्यादा क्लिनिकल डेटा उपलब्ध होने से कुछ बातें संज्ञान में आई हैं।

कोविशील्ड के पहले डोज का एफिकेसी रेट 70% है, लेकिन दोनों डोज के बाद इसका एफिकेसी रेट 90% हो जाता है। यह लक्षण वाले इन्फेक्शन के जोखिम को कम करता है और रिकवरी को स्पीड अप करता है।

कोवैक्सीन बाजार में देरी से आया है लेकिन इसका एफिकेसी रेट 78% माना गया है। इसके साथ ही यह क्लिनिकल सबूत भी मिले हैं कि कोवैक्सीन गंभीरता और मृत्यु दर को 100% तक कम कर सकता है।

कितने प्रभावी है ये नए म्यूटेंट के खिलाफ़?

नए म्यूटेंट स्ट्रेन के आने से वायरस पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हो गया है। यूके केंट स्ट्रेन, ब्राजीलियन, साउथ अफ्रीका स्ट्रेन और नए डबल और ट्रिपल म्यूटेंट स्ट्रेन ने यहां सबको परेशान कर दिया है। सच कहा जाए तो ये वैक्सीन पूरी तरह से वायरस को हटा नहीं सकते हैं लेकिन यह देखा गया है कि कोवैक्सीन इन्फेक्शन को कम करने में ज्यादा प्रभावी है। यही नहीं, नए इन्फेक्शन वाले स्ट्रेन से लड़ने में यह ज्यादा सक्षम भी है, जिसमें यूके स्ट्रेन भी शामिल है। हालंकि, विशेषज्ञों का यह कहना है कि नए म्यूटेंट स्ट्रेन और वेरियंट को फैलने से रोकने में जो भी उपलब्ध वैक्सीन है, उसे लेना चाहिए। इसलिए, आपको जब भी, जो भी वैक्सीन तक पहुंच मिले, उसे लेने में भी सबकी भलाई है।

क्या हैं साइड इफेक्ट्स?

अन्य वैक्सीन की तरह कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों रिएक्टोजेन साइड इफेक्ट्स कैरी करते हैं। लेकिन इनके अधिकतर साइड इफेक्ट्स हल्के हैं, जिनमें शामिल है इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, बुखार, ठंड लग्न, नॉजिया, सिर दर्द, पेट में दर्द, चक्कर आना, कंपकंपी।  

कोविशील्ड के इस्तेमाल के बाद कुछ लोगों को ब्लड क्लॉट होने के बाद कुछ देशों ने इस पर कुछ समय के लिए रोक भी लगा दी। बहुत कम मामलों में न्यूरोलॉजिकल कॉम्प्लीकेशन भी पाए गए।

कोवैक्सीन में अब तक किसी तरह के कॉम्प्लीकेशन को रिकॉर्ड नहीं किया गया है। हालांकि, शुरुआत में जो दिशा निर्देश जारी किए गए थे, उनके अनुसार प्रेगनेंट महिलओं के लिए यह कम सुरक्षित है। साथ ही कुछ खास कोमॉर्बिडिटी वाले लोग या ब्लड थिनर का इस्तेमाल कर रहे लोगों के प्रयोग के लिए भी इसकी मनाही है।

किन्हें इन वैक्सीन को लेने की मनाही है?

जिन लोगों को मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज या प्लाज्मा थेरेपी दी गई है, वे लोग फ़िलहाल वैक्सीनेशन के लिए सही नहीं हैं। कोवैक्सीन और कोविशील्ड को मॉनिटर किया जाना चाहिए और उसके बाद ही कम प्लेटलेट्स या स्टेरॉड ट्रीटमेंट पर रह रहे लोगों को दिया जाना चाहिए। कोविड वैक्सीन खाद्य या दवाओं से संबंधित किसी भी तरह की एलर्जी से पीड़ित लोगों के उपयोग के लिए सही नहीं है। पहले डोज के बाद यदि कोई कॉम्प्लीकेशन आती है तो भी अगला डोज लेने के लिए रुक जाना चाहिए।

निष्कर्ष

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों वैक्सीन लक्षण वाले इन्फेक्शन, गंभीरता और मृत्यु दर के खतरे को कम करते हैं, जो इस समय की सबसे बड़ी समस्या है। इसलिए कोविड समबधि दिशा निर्देशों का पालन करने के साथ ही जब भी जितनी जल्दी संभव हो, आपको वैक्सीन ले लेनी चाहिए।

 

ये भी पढ़ें - 

कोरोना वायरस वैक्सीन : महिलाओं पर होने वाले कुछ साइड इफेक्ट्स 

महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है लॉन्ग कोविड, जानें इसके लक्षण  

 

स्वास्थ्य संबंधी यह लेख आपको कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें- editor@grehlakshmi.com

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

क्या है डेल्...

क्या है डेल्टा वेरिएंट और यह क्यों है एक...

को वैक्सीन औ...

को वैक्सीन और स्पुतनिक वी-जानें इन वैक्सीन...

कोविड से जुड...

कोविड से जुड़े कुछ सच और झूठ

कोरोना वायरस...

कोरोना वायरस वैक्सीन : महिलाओं पर होने वाले...

पोल

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत किस देश से हुई थी ?

वोट करने क लिए धन्यवाद

इंग्लैण्ड

जर्मनी

गृहलक्ष्मी गपशप

वापसी - गृहल...

वापसी - गृहलक्ष्मी...

 बीस साल पहले जब वह पहली बार स्कूल आया था ,तब से लेकर...

7 ऐसे योग आस...

7 ऐसे योग आसन जो...

स्ट्रेस, देर से सोना, देर से जागना, जंक फूड खाना, पौष्टिक...

संपादक की पसंद

हस्त रेखा की...

हस्त रेखा की उत्पत्ति...

जिन मनुष्यों ने हस्त विज्ञान की खोज की उसे समझा और...

अक्सर पैसे ब...

अक्सर पैसे बढ़ाने...

बाई काम पर आती रहे, काम अच्छा करे और पैसे बढ़ाने की...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription