मनी कंट्रोल: सिंगल मदर हैं तो ऐसे रखें फाइनेंस का ध्यान

चयनिका निगम

5th May 2021

सिंगल मदर होते हुए आर्थिकतौर पर खुद को मजबूत करना आसन नहीं है तो कठिन भी बिलकुल नहीं है। इसके लिए आपको कुछ छोटे कदम उठाने होंगे।

मनी कंट्रोल: सिंगल मदर हैं तो ऐसे रखें फाइनेंस का ध्यान

आजकल सिंगल मदर होना कोई नई बात बिलकुल नहीं है। लेकिन जिम्मेदारियां स्थिति देख कर थोड़ी न आती हैं। बल्कि ये तो आएंगी ही और बात आर्थिक जिम्मेदारियों की हो तो मामला ज्यादा कठिन और परेशान करने वाला होता है। लेकिन आर्थिक स्थिति को लेकर उठाए गए कुछ खास कदम आपको कमजोर नहीं होने देंगे। अकेले होते हुए भी आप खुद को अकेला महसूस बिलकुल नहीं करेंगी। इस वक्त आपको सिंगल मदर होना इसलिए बिलकुल नहीं खलेगा कि आपके पास पैसे नहीं हैं। इसलिए इस स्थिति में भी खुद को स्ट्रॉंग बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आप खुद को फाइनेंशियली मजबूत बनाएं। इसके लिए अपने पैरों पर खड़े होना तो जरूरी है ही पैसे बचाना भी बुरे वक्त में आपका साथी बन सकता है। 

जीवन बीमा करेगा मदद-

आपकी सबसे पहली जिम्मेदारी आपका बच्चा है, जिसका भविष्य सुरक्षित करने के लिए आपको सबसे पहले जीवन बीमा करा लेना चाहिए। आपको ऐसे प्लान का चुनाव करना होगा जिसका सम अस्योर्ड आपकी पूरे साल की कमाई का 15 से 20 गुना हो। इस तरह के प्लान आपको आर्थिक सुरक्षा पक्के से देते हैं। इसके साथ एक उम्र के बाद आपको पैसों की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इनके साथ सिर्फ पॉलिसी होल्डर ही नहीं बल्कि नॉमिनी को भी फाइनेंशियल फायदे हो जाते हैं। साथ डेथ बेनेफिट्स मिलते हैं वो अलग।

पॉलिसी लेते समय-

पॉलिसी लेते समय आपको अपनी ह्यूमन लाइफ वैल्यू का कैलकुलेशन भी करना होगा। दरअसल आपको ये अंदाजा लगाना होगा कि आपकी इकोनॉमिक वैल्यू कितनी है साथ में ये भी देखिए कि आपकी सर्विस कितनी रह गई गई। इस तरह से लाइफ कवर का अंदाजा ल्गाना आसान होगा और अंदाजा भी सही होगा। 

हेल्थ इमर्जेंसी  का क्या करेंगी-

कोरोना का इतना भयानक दौर देख लेने के बाद किसी को भी हेल्थ इमर्जेंसी के मायने समझ आ चुके होंगे। सिंगल मदर के लिए भी इसकी अहमियत समझना जरूरी है। इस वक्त आपको हेल्थ इमर्जेंसी को हैंडल करने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना होगा। ऐसे प्लान में आपको अस्पताल में भर्ती होने पर खर्चा हुई रकम दी जाती है। इस वक्त कोशिश कीजिए कि कम से कम से 3 से 5 लाख का हॉस्पिटल कवर मिल ही जाए। इसके साथ गंभीर बीमारी की स्थिति के लिए कवर 10 लाख रुपए तक का कवर लिया जा सकता है। 

छोटे-छोटे सपने-

हर बच्चे की तरह आपके बच्चे के भी छोटे-छोटे सपने होंगे जैसे कभी महंगा टीवी लेना या फिर मनपसंद जगह घूमने जाना। ऐसे में आपको फिर आर्थिक मजबूती की जरूरत पड़ेगी। लेकिन इस वक्त आपके पास सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) या म्यूचुअल फंड जरूर होना चाहिए। इस तरह से फ्यूचर कैश फ्लो की कोई दिक्कत नहीं होती है। बच्चा अचानक से कुछ मांग ले तो आपके लिए भी म्यूचुअल फंड से पैसे निकाल कर उनकी इच्छा पूरी करना आपके लिए आसान होगा। इसके अलावा ये पैसे बच्चे की एजुकेशन या आपके रिटायरमेंट के बाद भी आप दोनों के काम आ सकते हैं। किसी तरह के लोन की स्थिति में भी म्यूचुअल फंड आपके काम जरूर आ जाएंगे। 

रिटायरमेंट प्लान भी है जरूरी-

रिटायरमेंट प्लान मतलब पैसे उस समय के लिए जोड़ना जब आप खुद नहीं कमा रही होंगी। और उस वक्त आप किसी पर आर्थिक रूप से निर्भर भी नहीं होना चाहती होंगी। इस वक्त के लिए भी आजकल कई कंपनी तरह-तरह के प्लान ला रही हैं। इसमें आप अपनी रिटायरमेंट उम्र के हिसाब से प्लान का चुनाव कीजिए। आप इस काम में एक्सपर्ट की सलाह लेंगी तो सही निर्णय लेना आसान होगा। आप अपना भविष्य भी इस तरह सुरक्षित कर पाएंगी। आपको नौकरी के बाद भी अपनी और बच्चे की चिंता से दूर रहना है तो रिटायरमेंट प्लान आज ही ले लीजिए। सिंगल मदर होते हुए भी आर्थिक तौर पर मजबूत हो जाइए। 

इमर्जेंसी फंड के बिना नहीं चलेगा काम-

ये वो पैसे हैं जो इमर्जेंसी के समय आपके काम आएंगे। ये आपको किसी पॉलिसी में नहीं लगाने हैं बल्कि किसी सेविंग एकाउंट में ही इन्हें सुरक्षित रखना है। सबसे पहले तो इसमें अपनी 3 से 4 महीने की कमाई की रकम एक बार में जमा कर दें। अब हर महीने एक निश्चित एमाउंट इसमें डालते रहें। ये धीरे-धीरे आपके लिए एक बड़ी रकम बन जाएगी। और फिर आपके पास इमर्जेंसी के समय के लिए बड़ी रकम तैयार हो जाएगी। 

लोन से दूरी-

आर्थिक प्लानिंग करते हुए खुद को लोन से पूरी तरह दूर रखिए। मजबूती का ये सबसे जरूरी नियम है। लेकिन ये बात भी सही है कि ना चाहते हुए भी ये स्थिति आ सकती है कि आपको लोन लेना ही पड़े तो समझ लीजिए ये आपकी पहली ज़िम्मेदारी है। खुद पर कर्जा खत्म करना भविष्य के लिए पैसे जोड़ने से भी ज्यादा जरूरी है। इसको प्लान करने के लिए भी आपकी हर महीने निश्चित रकम अपनी कमाई से अलग करनी होगी ताकि वो खर्चा हो ही न पाए। इस तरह से आपके लिए लोन पूरा करना आसान होगा। अगर आप ईएमआई दे रही हैं तो हर महीने जोड़े गए पैसों से एक बड़ी रकम इकट्ठा करके लोन की रकम और अवधि दोनों को ही कम किया जा सकता है। 

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