अपनी सादगी के लिए हमेशा याद किए जाएंगे मनोहर पर्रिकर

अनुज श्रीवास्तव

13th May 2021

17 मार्च रविवार का दिन देश के लिए एक बुरी खबर लेकर आया। उस दिन देश ने अपने सच्चे, ईमानदार, साहसी काम को ही अपना धर्म समझने वाले महान नेता को खो दिया। लगभग एक वर्ष से पैंक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे पर्रिकर जी अब हमारे बीच नहीं रहे।

अपनी सादगी के लिए हमेशा याद किए जाएंगे मनोहर पर्रिकर

17 मार्च रविवार का दिन देश के लिए एक बुरी खबर लेकर आया। उस दिन देश ने अपने सच्चे, ईमानदार, साहसी काम को ही अपना धर्म समझने वाले महान नेता को खो दिया। लगभग एक वर्ष से पैंक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे पर्रिकर जी अब हमारे बीच नहीं रहे। बीते साल फरवरी में मनोहर पर्रिकर को पैंक्रियाटिक कैंसर की पहचान हुई थी। 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस पर उन्होंने ट्वीट भी किया था कि 'मानव मस्तिष्क किसी भी बीमारी पर जीत पा सकता है। उस वक्त वे एम्स में इलाज करा रहे थे। कैंसर से चले लम्बें सघर्ष के बाद आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। राजनीति में ऐसे बहुत कम लोग हैं जिन्हें आर्दश नेता कहा जाता है या जिन्होंने राजनीति में आर्दश स्थापित किया है, मनोहर पर्रिकर उन्हीं में से एक थे। हवाई चप्पल, हाफ बाजू की शर्ट, राजनीति में उनका फैशन ट्रेंड था। कभी गोवा की सड़कों में स्कूटी पर घूमने निकल जाते तो कभी, सामान्य नागरिक की तरह लाईनों में लगे नजर आते। ऐसा सामान्य जीवन अक्सर हमारे देश के नेताओं का नहीं होता है। विपक्ष भी उनकी कार्यशैली व व्यवहार का मुरीद था।

जीवन परिचय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से देश के रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे मनोहर पर्रिकर की उनके तटीय गृह राज्य गोवा में छवि एक सीधे सादे, सामान्य व्यक्ति की थी। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले मनोहर पर्रिकर का जन्म 13 दिसम्बर 1955 को मापुसा में हुआ था। मनोहर पर्रिकर की स्कूली शिक्षा गोवा में ही मारगाओ से हुई। इसके बाद उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लिया। साल 1978 में उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पर्रिकर ने बहुत छोटी उम्र से आरएसएस से रिश्ता जोड़ लिया था, वह स्कूल के अंतिम दिनों में आरएसएस के 'मुख्य शिक्षक बन गए थे। उन्होंने आईआईटी-बंबई से इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद भी संघ के लिए काम जारी रखा। उनकी पत्नी का नाम मेधा पर्रिकर था। पर्रिकर और मेधा की शादी साल 1981 में हुई थी। पर्रिकर के गोवा के मुख्यमंत्री बनने के कुछ समय बाद उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी। पर्रिकर के कुल दो बच्चे हैं। जिनमें से पहले बच्चे का नाम उत्पल पर्रिकर है, जबकि दूसरे लड़के का नाम अभिजीत पर्रिकर है। वहीं पर्रिकर के दोनों बच्चों का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। उत्पल ने अमेरिका की मिशिगन स्टेर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में डिग्री ली है और अभिजात लोकल बिजनेसमैन हैं।

इंजीनियर से बने राजनेता

मनोहर पर्रिकर ने साल 1988 में राजनीति में कदम रखा था और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े । पर्रिकर ने चुनावी राजनीति में 1994 में प्रवेश किया, जब उन्होंने पणजी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। वह जून से नवंबर 1999 तक गोवा विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। 63 वर्षीय पर्रिकर ने चार बार गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में रक्षा मंत्री के तौर पर तीन वर्ष सेवाएं दीं। वह पहली बार 24 अक्टूबर 2000 में गोवा के मुख्यमंत्री बने लेकिन उनका कार्यकाल केवल 27 फरवरी 2002 तक ही चला। इसके बाद पांच जून, 2002 को उन्हें फिर से चुना गया और उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में सेवाएं दीं। चार भाजपा विधायकों के 29 जनवरी, 2005 को सदन से इस्तीफा देने के बाद उनकी सरकार अल्पमत में आ गई। इसके बाद कांग्रेस के प्रतापसिंह राणे,  पर्रिकर की जगह गोवा के मुख्यमंत्री बने। पर्रिकर के नेतृत्व वाली भाजपा को 2007 में दिगम्बर कामत के नेतृत्व वाली कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा। बहरहाल, वर्ष 2012 राज्य में पर्रिकर की लोकप्रियता की लहर लेकर आया और उन्होंने अपनी पार्टी को विधानसभा में 40 में से 21 सीटों पर जीत दिलाई। वह फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने। भाजपा की जीत की लय वर्ष 2014 में भी बनी रही जब पार्टी को आम चुनाव में दोनों लोकसभा सीटों पर विजय प्राप्त हुई। केंद्र में मोदी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण करने के बाद पर्रिकर को नवंबर 2014 में रक्षा मंत्री का पद दिया गया। वह 2017 तक केंद्रिय मंत्रिमंडल में रहे। गोवा विधानसभा चुनाव में पार्टी के बहुमत हासिल नहीं कर पाने पर वह मार्च 2017 में राज्य लौटे और गोवा फॉरवर्ड पार्टी एवं एमजीपी जैसे दलों को गठबंधन सहयोगी बनाने में कामयाब रहे। राज्य में एक बार फिर उनकी सरकार बनी।

सीधा - सामान्य जीवन

  •  गोवा के मुख्यमंत्री होने के बाद भी पर्रिकर ने अपने रहन-सहन में जरा भी बदलाव नहीं किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने अपने घर को नहीं छोड़ा और सरकार द्वारा दिए गए घर में नहीं गए। द्य पर्रिकर पहले ऐसे आईआईटी ग्रेजुएट हैं जो कि किसी राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। पर्रिकर से पहले हमारे देश का ऐसा कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं बना था, जिसके पास आईआईटी की डिग्री हो।
  •  पर्रिकर पणजी में स्थानीय बाजारों से खरीदारी के लिए स्कूटर का इस्तेमाल करते थे। द्य पर्रिकर को साइकिल चलाना भी बेहद पसंद था, वो खाली वक्त में साइकिल चलाया करते थे।
  •  हमेशा इकोनॉमी क्सास में ट्रेवल करते थे।

रक्षा मंत्री के रूप में उपलब्धियां

  •  लंबे वक्त से लटके राफेल फाइटर प्लेन के सौदे को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अगुवाई में हरी झंडी मिली थी सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच राफेल फाइटर प्लेन के सौदे पर हस्ताक्षर हुए। भारत दौरे पर आए फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां यीव ली ड्रियान और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
  • सैनिकों की 40 साल पुरानी 'वन रैंक वन पेंशन की मांग को अमल के रास्ते पर ले जाने में उनकी बड़ी भूमिका देखी गई। पूर्व सैनिकों के साथ-साथ विपक्ष ह्रक्रह्रक्क को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन पर्रिकर ने इस मुद्दे को वक्त के साथ सुलझा लिया। ह्रक्रह्रक्क को सुलझाना मनोहर पर्रिकर की एक बड़ी उपलब्धि है। इसे लागू करने में तमाम अड़चने आई लेकिन उन्होंने पूर्व सैनिकों से किए वादे को बेहद सरल तरीके से पूरा कर दिया।
  • भारतीय सेना मणिपुर में आतंकियों के खिलाफ पीछे साल के मई महीने म्यांमार सरहद पर खुफिया रिपोर्ट के बाद एक सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस ऑपरेशन पर मनोहर पर्रिकर की पैनी नजर थी और उन्हीं की निगरानी में इसे अंतिम रूप दिया गया।
  •  उरी में हुए आतंकी हमले में जवानों की शहादत का बदला भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकियों को ढेर करके लिया था। सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भारतीय सेना के जाबांजों ने पाकिस्तान कई आतंकी कैंप ध्वस्त किए थे। सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला पर्रिकर जी के रक्षा मंत्री रहते हुए लिया गया था ।

अंतिम सांस तक किया काम

जनवरी के महीने में खराब हालत में भी उन्होंने बजट पेश किया। बजट पेश के दौरान पर्रिकर कुर्सी पर बैठे थे और उनकी नाक में ट्यूब डली हुई थी, उन्होंने कहा कि, 'वह जोश से भरे हुए हैं। आज मैं एक बार फिर वादा करता हूं कि मैं पूरी ईमानदारी, निष्ठा एवं समर्पण के साथ और अपनी अंतिम सांस तक गोवा की सेवा करूंगा। मुझमें काफी जोश है और मैं पूरी तरह होश में हूं। फरवरी, 2018 के बाद से उनकी तबियत खराब रहने लगी। उन्हें तब अग्नाशय संबंधी बीमारी के उपचार के लिए मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया।वह मार्च के पहले सप्ताह में इलाज के लिए अमेरिका गए जहां वह जून तक अस्पताल में रहे। राज्य लौटने के बाद पर्रिकर ने फिर से काम करना आरंभ कर दिया और वह 12 दिवसीय विधानसभा सत्र में भी शामिल हुए। अगस्त के  दूसरे सप्ताह में वह फिर से उपचार के लिए अमेरिका गए और कुछ दिनों बाद लौटे। वह फिर से अमेरिका गए और इस बार वहां से लौटने पर उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। पिछले कुछ समय से वह अपने डाउना पौला के अपने निजी आवास तक ही सीमित थे, यहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

अंतिम विदाई

अपने प्रिय नेता को विदाई देने बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक व प्रेमी पहुंचे। पर्रिकर जी के निधन पर महिलाएं भाई गेला-भाई गेला (भाई चला गया) कहकर फूटफूटकर रोती दिखाई दीं। दर्शन के लिए कतार में खड़े लोग लगातार मनोहर भाई अमर रहें और वंदे मातरम् के नारे लगा रहे थे। भाजपा कार्यालय पर करीब दो घंटे पार्थिव शरीर रखने के बाद गोवा कला अकादमी परिसर ले जाया गया। कला अकादमी में पार्थिव शरीर आम जनता के दर्शनार्थ शाम तक रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी और गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने कला अकादमी जाकर ही पर्रीकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए

यह भी पढ़ें -यही सच है - गृहलक्ष्मी कहानियां

सामान्य व्यक्ति की थी। मध्यमवर्गीय
परिवार से आने वाले मनोहर पर्रिकर का
जन्म 13 दिसम्बर 1955 को मापुसा में
हुआ था। मनोहर पर्रिकर की स्कूली शिक्षा
गोवा में ही मारगाओ से हुई। इसके बाद
उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लिया।
साल 1978 में उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पर्रिकर ने
बहुत छोटी उम्र से आरएसएस से रिश्ता
जोड़ लिया था, वह स्कूल के अंतिम दिनों
में आरएसएस के 'मुख्य शिक्षकÓ बन गए
थे। उन्होंने आईआईटी-बंबई से
इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद भी
संघ के लिए काम जारी रखा। उनकी पत्नी
का नाम मेधा पर्रिकर था। पर्रिकर और
मेधा की शादी साल 1981 में हुई थी।
पर्रिकर के गोवा के मुख्यमंत्री बनने के
कुछ समय बाद उनकी पत्नी की मृत्यु हो
गई थी। पर्रिकर के कुल दो बच्चे हैं।
जिनमें से पहले बच्चे का नाम उत्पल
पर्रिकर है, जबकि दूसरे लड़के का नाम
अभिजीत पर्रिकर है। वहीं पर्रिकर के दोनों
बच्चों का राजनीति से कोई लेना देना नहीं
है। उत्पल ने अमेरिका की मिशिगन स्टेर
यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में डिग्री ली है
और अभिजात लोकल बिजनेसमैन हैं।
इंजीनियर से बने राजनेता
मनोहर पर्रिकर ने साल 1988 में राजनीति
में कदम रखा था और भारतीय जनता पार्टी
से जुड़े । पर्रिकर ने चुनावी राजनीति में
1994 में प्रवेश किया, जब उन्होंने पणजी
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के
टिकट पर चुनाव जीता। वह जून से नवंबर
1999 तक गोवा विधानसभा में विपक्ष के
नेता रहे। 63 वर्षीय पर्रिकर ने चार बार
गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया
और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में
रक्षा मंत्री के तौर पर तीन वर्ष सेवाएं दीं।
वह पहली बार 24 अक्टूबर 2000 में
गोवा के मुख्यमंत्री बने लेकिन उनका
कार्यकाल केवल 27 फरवरी 2002 तक ही
चला। इसके बाद पांच जून, 2002 को उन्हें
फिर से चुना गया और उन्होंने मुख्यमंत्री के
रूप में सेवाएं दीं। चार भाजपा विधायकों
के 29 जनवरी, 2005 को सदन से इस्तीफा
देने के बाद उनकी सरकार अल्पमत में आ
गई। इसके बाद कांग्रेस के प्रतापसिंह राणे,
पर्रिकर की जगह गोवा के मुख्यमंत्री बने।
पर्रिकर के नेतृत्व वाली भाजपा को 2007
में दिगम्बर कामत के नेतृत्व वाली कांग्रेस
के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
बहरहाल, वर्ष 2012 राज्य में पर्रिकर की
लोकप्रियता की लहर लेकर आया और
उन्होंने अपनी पार्टी को विधानसभा में 40
में से 21 सीटों पर जीत दिलाई। वह फिर
से राज्य के मुख्यमंत्री बने। भाजपा की जीत
की लय वर्ष 2014 में भी बनी रही जब
पार्टी को आम चुनाव में दोनों लोकसभा
सीटों पर विजय प्राप्त हुई। केंद्र में मोदी के
नेतृत्व में मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण करने के
बाद पर्रिकर को नवंबर 2014 में रक्षा मंत्री
का पद दिया गया। वह 2017 तक केंद्रिय
मंत्रिमंडल में रहे। गोवा विधानसभा चुनाव
में पार्टी के बहुमत हासिल नहीं कर पाने पर
वह मार्च 2017 में राज्य लौटे और गोवा
फॉरवर्ड पार्टी एवं एमजीपी जैसे दलों को
गठबंधन सहयोगी बनाने में कामयाब रहे।
राज्य में एक बार फिर उनकी सरकार बनी।
सीधा - सामान्य जीवन
द्य गोवा के मुख्यमंत्री होने के बाद भी
पर्रिकर ने अपने रहन-सहन में जरा भी
बदलाव नहीं किया। मुख्यमंत्री बनने के
बाद भी उन्होंने अपने घर को नहीं छोड़ा
और सरकार द्वारा दिए गए घर में नहीं गए।
द्य पर्रिकर पहले ऐसे आईआईटी ग्रेजुएट हैं
जो कि किसी राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं।
पर्रिकर से पहले हमारे देश का ऐसा कोई भी
व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं बना था, जिसके पास
आईआईटी की डिग्री हो।
द्य पर्रिकर पणजी में स्थानीय बाजारों से
खरीदारी के लिए स्कूटर का इस्तेमाल
करते थे।
द्य पर्रिकर को साइकिल चलाना भी बेहद
पसंद था, वो खाली वक्त में साइकिल
चलाया करते थे।
द्य हमेशा इकोनॉमी क्सास में ट्रेवल करते थे।
रक्षा मंत्री के रूप में
उपलब्धियां
द्य लंबे वक्त से लटके राफेल फाइटर प्लेन
के सौदे को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की
अगुवाई में हरी झंडी मिली थी सितंबर
2016 में भारत और फ्रांस के बीच राफेल
फाइटर प्लेन के सौदे पर हस्ताक्षर हुए।
भारत दौरे पर आए फ्रांस के
रक्षा मंत्री ज्यां यीव ली ड्रियान
और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर
ने इस समझौते पर हस्ताक्षर
किए थे।
द्य सैनिकों की 40 साल पुरानी
'वन रैंक वन पेंशनÓ की मांग
को अमल के रास्ते पर ले जाने में
उनकी बड़ी भूमिका देखी गई। पूर्व
सैनिकों के साथ-साथ विपक्ष ह्रक्रह्रक्क
को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की
कोशिश की, लेकिन पर्रिकर ने इस मुद्दे को
वक्त के साथ सुलझा लिया। ह्रक्रह्रक्क को
सुलझाना मनोहर पर्रिकर की एक बड़ी
उपलब्धि है। इसे लागू करने में
तमाम अड़चने आई लेकिन उन्होंने पूर्व
सैनिकों से किए वादे को बेहद सरल तरीके
से पूरा कर दिया।
द्य भारतीय सेना मणिपुर में आतंकियों के
खिलाफ पीछे साल के मई महीने म्यांमार
सरहद पर खुफिया रिपोर्ट के बाद एक
सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस
ऑपरेशन पर मनोहर पर्रिकर की पैनी नजर
थी और उन्हीं की निगरानी में इसे अंतिम
रूप दिया गया।
द्य उरी में हुए आतंकी हमले में जवानों की
शहादत का बदला भारत ने पाकिस्तान की
सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर
आतंकियों को ढेर करके लिया था।
सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भारतीय सेना
के जाबांजों ने पाकिस्तान कई आतंकी कैंप
ध्वस्त किए थे। सर्जिकल स्ट्राइक का
फैसला पर्रिकर जी के रक्षा मंत्री रहते हुए
लिया गया था ।
अंतिम सांस तक
किया काम
जनवरी के महीने में खराब हालत में भी
उन्होंने बजट पेश किया। बजट पेश के
दौरान पर्रिकर कुर्सी पर बैठे थे और उनकी
नाक में ट्यूब डली हुई थी, उन्होंने कहा
कि, 'वह जोश से भरे हुए हैं।Ó आज मैं
एक बार फिर वादा करता हूं कि मैं पूरी
ईमानदारी, निष्ठा एवं समर्पण के साथ और
अपनी अंतिम सांस तक गोवा की सेवा
करूंगा। मुझमें काफी जोश है और मैं पूरी
तरह होश में हूं।Ó फरवरी, 2018 के बाद
से उनकी तबियत खराब रहने लगी। उन्हें
तब अग्नाशय संबंधी बीमारी के उपचार
के लिए मुंबई के लीलावती अस्पताल में
भर्ती कराया गया।वह मार्च के पहले सप्ताह
में इलाज के लिए अमेरिका गए जहां वह
जून तक अस्पताल में रहे। राज्य लौटने के
बाद पर्रिकर ने फिर से काम करना आरंभ
कर दिया और वह 12 दिवसीय विधानसभा
सत्र में भी शामिल हुए। अगस्त के
 दूसरे सप्ताह में वह फिर से उपचार के
लिए अमेरिका गए और कुछ दिनों बाद
लौटे।
वह फिर से अमेरिका गए और इस बार
वहां से लौटने पर उन्हें दिल्ली के एम्स में
भर्ती कराया गया। पिछले कुछ समय से वह
अपने डाउना पौला के अपने निजी आवास
तक ही सीमित थे, यहीं पर उन्होंने अंतिम
सांस ली।
अंतिम विदाई
अपने प्रिय नेता को विदाई देने बड़ी संख्या
में उनके प्रशंसक व प्रेमी पहुंचे। पर्रिकर
जी के निधन पर महिलाएं भाई गेला-भाई
गेला (भाई चला गया) कहकर फूटफूटकर रोती दिखाई दीं। दर्शन के लिए
कतार में खड़े लोग लगातार मनोहर भाई
अमर रहें और वंदे मातरम् के नारे लगा रहे
थे। भाजपा कार्यालय पर करीब दो घंटे
पार्थिव शरीर रखने के बाद गोवा कला
अकादमी परिसर ले जाया गया। कला
अकादमी में पार्थिव शरीर आम जनता के
दर्शनार्थ शाम तक रखा गया। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण,
स्मृति ईरानी और गोवा की राज्यपाल
मृदुला सिन्हा ने कला अकादमी जाकर ही
पर्रीकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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