बच्चे करे टैंट्रम यूं करें हैंडल

चयनिका निगम

15th May 2021

बच्चा टैंट्रम दिखाए तो उसको हेंडल करना कई बार मुश्किल हो जाता है. लेकिन थोड़ी सूझबूझ से इस वक्त बच्चे को हैंडल किया जा सकता है.

बच्चे करे टैंट्रम यूं करें हैंडल

बच्चों के टैंट्रम (tantrum)...वो इमोशन जिनको जाहिर करने का तरीका जरा अलग होता है. उस एक वक्त में बच्चे के मन में चलने वाले विचारों को समझना भी मुश्किल होता है. यही वजह है कि परेशान होकर हम इसे ‘नखरे' (tantrum) का नाम दे देते हैं. मगर समय रहते इन नखरों पर लगाम लगाने की जरूरत होती है क्योंकि ऐसा न करने पर बच्चे की पर्सनालिटी पर खराब असर पड़ सकता है. वो अपनी बात इसी तरह नखरे दिखा कर पूरी करवाने की आदत डाल लेते हैं. पर हर इंसान उसके नखरे तो नहीं सहेगा न. तब जिंदगी उनके लिए कठिन हो जाएगी. इसलिए जरूरी है कि बच्चे की टैंट्रम दिखाने की आदत को बदल लिया जाए. ये भी याद रखिए कि ये आपकी परवरिश में कमी का नतीजा भी हो सकता है. इसलिए परवरिश में कोई कमी ना छोड़ते हुए बच्चे के टैंट्रम को हैंडल करना सीख लें. 

 

जब नखरे दिखाए बच्चा, क्या करें आप-

जब बच्चा टैंट्रम दिखा रहा होता है ठीक उस वक्त बच्चे के लिए पेरेंट्स का व्यवहार बहुत जरूरी हो जाता है. जरूरी हो जाता है कि उस वक्त आप बच्चे से क्या कह रहे हैं और आपका व्यवहार कैसा है. आप बच्चे पर गुस्सा तो नहीं हो रहे हैं क्योंकि बच्चे के नखरे दिखाने के समय आपका गुस्सा आग में घी का काम करेगा. बच्चा सुधरेगा नहीं. बल्कि सिर्फ उस वक्त के लिए डर कर चुप हो जाएगा. पर वो फिर से यही हरकत करेगा.  

बच्चे और खुद को शांत रखें-

विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चे के नखरे दिखाने के समय आपका गुस्सा बिलकुल गलत है. उसकी तरह आप भी बचपना नहीं कर सकते हैं. वरना बच्चे और आप में क्या अंतर रह जाएगा. आपका गुस्सा स्थिति को और खराब ही करेगा. याद रखिए बच्चे को शांत होना सिखाने का सही समय यही है. बच्चे शांत रहना सिखाने के लिए जरूरी है कि खुद को शांत रखा जाए. बच्चा जो भी कर रहा है उसका सामना शांत मन से कीजिए. 

ध्यान भटकाना आएगा काम-

बच्चे के नखरे का हल क्या है? जवाब है ये बात नखरे किस बात पर दिखाए जा रहे हैं, इस पर निर्भर करेगा. इनको उसी हिसाब से हैंडल भी करना पड़ेगा. जैसे उसको खाने से दिक्कत है तो आपको उसको कुछ उसके मन का खिलाकर उसे सुलाना होगा. वैसे बच्चा जब नखरे दिखाए तो उसका ध्यान हटाना सबसे अच्छा रहता है. कुछ ऐसा कीजिए कि उसका ध्यान उस मुद्दे से तो हट ही जाए. जैसे वो बाहर खेलने की जिद कर रहा है तो उसे बोर्ड गेम का विकल्प दिया जा सकता है. या फिर वो पढ़ना नहीं चाहता है तो अप बि कोई बुक लेकर साथ बैठ जाएं और कहें ‘देखो मैं भी पढ़ रही हूं'. बच्चे को जरूर पढ़ने का मन करने लगेगा. 

इग्नोर करना भी है जरूरी-

नखरों को इग्नोर करना भी जरूरी है. इग्नोर करने से बच्चे को समझ आता है कि कोई उन पर ध्यान दे ही नहीं रहा है तो फिर ऐसा क्यों ही करें. ऐसा उनके कई नखरों पर आपको करना होगा जैसे जब वो सिर्फ आपका ध्यान खींचने के लिए ऐसा कर रहे हों. या किसी चीज की चाहत में ऐसा कर रहे हैं तो बच्चे को जरूर ही इग्नोर कर दें और खुद को शांत रखें. गुस्सा न करें और बच्चे को उसके मन की चीज न दिलाने का बहुत एक्सप्लनेशन भी बिलकुल न दें. जितना आप समझाएंगे उतना ही वो जिद करते जाएंगे. इसके बजाए उनका ध्यान किसी और बात पर लगवांएगे तो बात आसानी से बन जाएगी. 

गले लगा लें-

कई दफा ऐसा होता है जब बच्चे बहुत ज्यादा जिद कर लेते हैं. वो इतनी ज्यादा जिद हो जाती है कि वो आपे से बाहर हो जाते हैं. उनकी सांसें तेज चलने लगती हैं या चेहरा लाल होने लगता है. ऐसे समय में बच्चे को डांटने की बजाए प्यार करने से ही काम चलेगा. प्यार करने के लिए कुछ नहीं करना है बस उन्हें गले लगा लेना है. उनको खूब प्यार देना है लेकिन नखरे दिखाने वाले मुद्दे पर कोई बात नहीं करनी है. इस तरह से बच्चा नाराजगी वाला मुद्दा तो भूल ही जाएगा लेकिन वो ये भी जान लेगा कि आप उसे बहुत प्यार करते हैं.  

खुद को नुकसान पहुंचाना-

कई बार बच्चे इतना टैंट्रम दिखाते हैं कि खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने लगते हैं इस वक्त भी आपको बच्चे का साथ नहीं छोड़ना है. उसको गले लगा कर रखिए और आंखों से ओझल ना होने दीजिए. ताकि वो अपना नुकसान न कर लें.

आपके कहने पर भी नहीं-

कई बार बच्चा नखरे इसलिए दिखा रहा होता है कि वो आपके के कहे अनुसार कोई काम नहीं करना चाहता है जैसे आपके कहने पर वो नहाने नहीं जा रहा है या फिर मोबाइल पर गेम खेलने मना करना उसे पसंद नहीं आया है. ऐसे में वो टैंट्रम दिखा रहा है तो आपका चुप हो जाना ही सही रहेगा. बच्चे से अगले कम से कम 2 घंटे बात ना करें. देखिएगा उसे गलती का एहसास हो जाएगा. 

ये तरीका काम करेगा-

कई बार बच्चे कोई टैंट्रम दिखाते हैं और उनका काम हो जाता है तो वो समझ जाते हैं कि ये तरीका काम करेगा. बस वो हर बार यही तरीका अजमाने लगते हैं. ऐसा ज्यादातर बार स्कूल जाने वाले बच्चे करते हैं. आपको बच्चे की इस सोच पर ध्यान देना होगा. कहीं वो एक ही हरकत करके अपनी जिद मनवाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है. एक बार आप इसे समझ जाएंगी तो आपके लिए बच्चे के आए दिन होने वाले नखरों से छुटकारा मिल जाएगा. 

मनाने की कोशिश करें मगर-

कई दफा ऐसा होता है कि बच्चा जब टैंट्रम दिखाता है तो हम उसे मनाने के लिए किसी न किसी चीज का लालच देने लगते हैं. हम कभी टॉफी तो कभी चिप्स तो ऑफर कर ही देते हैं. लेकिन ये गलत है बच्चे को लगता है कि उसे अपने नखरों के लिए भी एवार्ड दिया जा रहा है. वो सोच लेता है कि टैंट्रम का भी फायदा होता है. तो वो ऐसा करेगा ही वो भी बार-बार. 

जब बच्चा सुधर करे तो-

टैंट्रम दिखाने वाला बच्चा आपके समझाने के बाद हो सकता है खुद में सुधार कर ले. अब जब सुधर हुआ है तो बच्चे को इसका पुरस्कार जरूर दीजिए. बच्चे को एप्रीशिएट कीजिए और बताइए कि वो आगे भी ऐसे ही अपने अंदर सुधर कर सकता है. देखिएगा वो ऐसा करेगा भी. 

बच्चा खुद करेगा चुनाव-

बच्चे को नखरों से दूर करने का एक तरीका ये है कि उसे उसकी ही कुछ चीजों की जिम्मेदारी दे दी जाए. जैसे उससे पूछिए ब्रश अभी करोगे या कुछ देर बाद. खाना अभी खाओगे या थोड़ी देर बाद. बच्चे के लिए ये काफी सुकून भरा होगा. उसे लगेगा कि उसके पास भी जिम्मेदारी है. उसे जिम्मेदार माना जा रहा है तो वो खुद ही कुछ करने से पहले कई बार सोचेगा. कपड़े खरीदते समय भी यही किया जा सकता है. 

जब हों घर से बाहर-

बच्चा जब घर के बाहर नखरे दिखाता है तो उसे हैंडल करना आपके लिए थोडा कठिन हो जाता है. क्योंकि आप घर से बाहर वैसे ही व्यव्हार नहीं कर सकते तो घर के अंदर करते हैं. इस वक्त भी उनका ध्यान हटाने की कोशिश कीजिए. बाहर तो बच्चे का ध्यान हटाने के बहुत ऑप्शन होते हैं. उसे उस जगह से अलग कहीं ले जाइए या फिर कुछ नया खाने को दीजिए. कुछ भी करके उसका उस जगह से ध्यान हटाना होगा. 

नए शौक, नया हुनर-

जब बच्चे के टैंट्रम हद से ज्यादा बढ़ जाएं तो उन्हें बदलना भी सही रहता है. इसके लिए आप बच्चे को नए शौक से रूबरू कराइए. उसे नए शौक में रूचि लेने में मदद कीजिए. देखिएगा बच्चा खुद ही टैंट्रम से खुद को दूर करके सारा दिमाग अपनी ख़ुशी पर लगाने लगेगा. लेकिन हां शुरू में ये शौक बहुत चुनौती भरा नहीं होना चाहिए.बाद में इसमें चुनौती जोड़ते जाइए. 

समझें बच्चे की दिक्कत भी-

ऐसा नहीं है कि बच्चा नखरे दिखा रहा है तो इसके पीछे उसकी गलती ही है. इसके पीछे उसकी दिक्कत भी हो सकती है. जैसे वो अगर अभी खाना नहीं खाना चाहता है तो हो सकता है कि उसका पेट भरा हो या फिर उसके पेट में दर्द हो. इस वक्त आपको ही इसका निर्णय लेना होगा कि बच्चा झूठ तो नहीं बोल रहा है. या अगर उसे कोई दिक्कत है तो वो क्या. 

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