देखादेखी खर्चा करने की आदत है बुरी, ऐसे सुधारें खुद को

चयनिका निगम

18th May 2021

देखादेखी खर्च करने की आदत आर्थिक स्थिति के लिए अच्छा नहीं है. जरूरी है कि खुद की इस आदत को समय रहते बदल लिया जाए.

देखादेखी खर्चा करने की आदत है बुरी, ऐसे सुधारें खुद को

‘जितनी चादर हो उतना ही पैर फैलाना चाहिए' ये बात आपने न जाने कितनी बार सुनी होगी. लेकिन कई दफा ऐसा होता है कि जब किसी अपने से ज्यादा पैसे वाले इंसान को देखते हैं तो खुद ही इस चादर को हम भूल जाते हैं. हम वो करने लगते हैं जो दूसरे करते हैं. उसने ऐसा सोफा लिया, ऐसा घर लिया, काश हम भी ये कर पाते लेकिन फिर इस काश को हकीकत में बदलने के लिए हम सबकुछ करते हैं. ताकि उनके जैसा हमारे पास भी सबकुछ हो. जब नहीं कर पाते तो पर्दे, टीवी और कपडे जैसी चिएजं खरीद कर खुद को संतुष्ट करते हैं. 

मगर यकीन मानिए दूसरों की तरह सबकुछ पाने की चाहत बहुत गलत है, इससे किसी का फायदा नहीं होता है नुकसान जरूर हो जाता है. देखादेखी खर्चा करने की आदत आपको पतन की ओर ले जाने की शुरुआत भी हो सकती है. इसलिए इस आदत से छुटकारा पाने की कोशिश शुरू कर दीजिए, कैसे करेंगी, हम बताए देते हैं-

देखादेखी खर्च करना है खास इफेक्ट-

जी हां, जानकारों की भाषा में देखादेखी खर्च करने की आदत को बैंडवेगन इफेक्ट कहा जाता है. इस इफेक्ट में आप बिना कोई दूसरी बात सोचे बिलकुल दूसरों की तरह खरीदारी और खर्च कर लेना चाहते हैं. 

फायदे के साथ नुकसान-

जो खूब खर्चा कर रहे हैं उन्होंने खूब मेहनत भी की है. मतलब मेहनत करके उन्होंने कमाया है. फायदे के लिए उन्होंने नुकसान भी हैंडल किया है.इसलिए किसी को देख कर सिर्फ उसके अच्छे को ही असलियत मान लेना और उसके जैसा करने की कोशिश करना सही नहीं है. 

आत्मसम्मान से नाता-

ज्यादातर बार जब आप दूसरों की देखादेखी खर्च करती हैं तो इसके पीछे बेवजह आपका आत्मसम्मान आ जाता है. आपको लगता है कि अगर आप दूसरे की तरह खर्चा नहीं कर पाएंगे तो ये आपके आत्मविश्वास के लिए ठीक नहीं होगा. फिर भले ही आपको उन चीजों की जरूरत हो या नहीं आप अपने आत्मसम्मान की खातिर वो चीजें खरीद जरूर लेती हैं. 

जरूरत और शौक में फर्क-

इस आदत से बचने का एक तरीका ये है कि आप अपने शौक और जरूरत में अंतर करना सीख लें. खुद से वादा कर लें कि जब तक जरूरत नहीं होगी आप वो सामान खरीदेंगी ही नहीं. 

संतुष्टि है जरूरी-

जीवन में हर बार संतुष्टि बेहद जरूरी है. यही बच्चों को भी स्कूल में सिखाया जाता है. संतुष्टि से यहां तात्पर्य अपने पास जो भी है उससे संतुष्ट होने से है. याद रखिए जो आपका है वो आपके पास जरूर आएगा. इसलिए दूसरों की ओर देख कर ‘काश मेरे पास भी होता' सोचना तुरंत बंद कर दीजिए. 

आपको हमारे मनी टिप्स कैसे लगे? अपनी प्रतिक्रियाएं हमें जरूर भेजें। ब्यूटी-मेकअप से जुड़े टिप्स भी आप हमें ई-मेल कर सकते हैं-editor@grehlakshmi.com

 

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