ये हैं भगवान श्रीकृष्ण के खास मंदिर, दर्शन से होता है उद्धार

Jyoti Sohi

2nd June 2021

पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण के अत्यंत भव्य और विशाल मंदिर मौजूद हैं, जिसकी सुदरंता और भव्यता लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक कृष्णजी के मंदिर स्थापित हैं। इन मंदिरों में साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। देश भर के कृष्ण मंदिरों में विशेष प्रकार की रौनक देखने को मिलती है। प्रत्येक मंदिर की अपनी कुछ न कुछ खास विशेषता है।

ये हैं भगवान श्रीकृष्ण के खास मंदिर, दर्शन से होता है उद्धार
पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण के अत्यंत भव्य और विशाल मंदिर मौजूद हैं, जिसकी सुदरंता और भव्यता लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक कृष्णजी के मंदिर स्थापित हैं। इन मंदिरों में साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। देश भर के कृष्ण मंदिरों में विशेष प्रकार की रौनक देखने को मिलती है। प्रत्येक मंदिर की अपनी कुछ न कुछ खास विशेषता है। इनमें से कुछ मंदिर बेहद खास हैं। आइए जानते हैं, उन मंदिरों के बारे में
मथुरा जन्मभूमि मंदिर 
ये वही स्थान है जहाँ श्री कृष्ण ने जन्म लिया था। मथुरा के मंदिर में इसका सर्वोच्च स्थान है। यहाँ के स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण राजा वीर सिंह बुंदेल ने करवाया था जो श्री कृष्ण के ही वंशज थे। यहाँ कंस का पत्थर से बना बड़ा कारावास है। यहाँ का सबसे आकर्षक मंदिर का वो छोटा कारावास है जहाँ कृष्ण का जन्म हुआ था। यह मंदिर अपनी पवित्रता से आपके रोम.रोम को साधना में लीन कर देगा। बहुत ही खुबसूरती से इसे बनाया गया है। यहाँ कृष्ण की सफ़ेद मार्बल से बनी मूर्ति है जो अपने अस्तित्व का परिचय देती है। यहाँ आने का सबसे उचित समय है जन्माष्टमी व होली का पर्व। ये त्योहार भव्यता से यहाँ मनाया जाता है।
गोकुल का चौरासी खंबा मंदिर 
भगवान कृष्ण का जन्म तो मथुरा में हुआ था। लेकिन उनका बचपन गोकुलए वृंदावनए नंदगावए बरसाना जैसे जगहों पर बीता था। मथुरा से गोकुल 15 किलोमीटर दूर है। कहा जाता है कि यहां पर कृष्ण जी ने 11 साल 1 माह और 22 दिन गुजारे थे। यहां पर चौरासी खम्भों का मंदिर नंद बाबा के मंदिर से जुड़ी एक कहानी बताई जाती है। जिसमें कहा गया है कि भगवान श्री कृष्ण अपने माता.पिता को चार.धाम की यात्रा का सुख गोकुल में ही देना चाहते थे इसलिए उन्होंने भगवान विश्वकर्मा से कहा था कि वो उनके घर में 84 खंबे लगा दें। इसपर विश्वकर्मा जी ने कहा था कि इन खंबों को कलियुग में कोई गिन नहीं पाएगा। इसीलिए ये मान्यता चली आ रही है कि अगर आप इस मंदिर के दर्शन करेंगे तो यहां पर आपको चार धाम की यात्रा का फल मिलेगा और साथ ही साथ आप इस मंदिर के खंबों को कभी गिन नहीं सकते। मान्यता है कि यहां या तो एक खंबा ज्यादा गिनती में आएगा या फिर एक खंबा कम। 
जगन्नाथ मंदिर 
हिन्दुओं की प्राचीन और पवित्र 7 नगरियों में पुरी उड़ीसा राज्य के समुद्री तट पर बसा है। जगन्नाथ मंदिर विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी के पूर्वी छोर पर बसी पवित्र नगरी पुरी उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से थोड़ी दूरी पर है। आज का उड़ीसा प्राचीनकाल में उत्कल प्रदेश के नाम से जाना जाता था। यहां देश की समृद्ध बंदरगाहें थीं जहां जावा, सुमात्रा, इंडोनेशिया, थाईलैंड और अन्य कई देशों का इन्हीं बंदरगाह के रास्ते व्यापार होता था। पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया हैण् जगन्नाथ मंदिर की महीमा देश में ही नहीं विश्व में भी प्रसिद्ध हैं। पुरी में बना जगन्नाथ मंदिर भारत में हिंदुओं के चार धामों में से एक है। यह धाम तकरबीन 800 सालों से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर स्थित झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। इसी तरह मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है। इस चक्र को किसी भी दिशा से खड़े होकर देखने पर ऐसा लगता है कि चक्र का मुंह आपकी तरफ है।
 
वृंदावन का मंदिर
मथुरा के पास वृंदावन है। यहां पर रमण रेती पर बांके बिहारी का प्रसिद्ध मंदिर है। यह प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहीं पर प्रेम मंदिर भी स्थित है। वहीं, प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर भी यहां स्थित है। यहां पर बृज क्षेत्र में गोवर्धन पर्वत भी स्थित है।
द्वारिका का मंदिर 
एक समय मथुरा को छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण गुजरात के समुद्री तट पर स्थित कुशस्थली नगरी चले गए थे। यहां पर उन्होंने द्वारिका नाम का एक बड़ा नगर बसाया। यहां पर इन्हें द्वारकाधीश कहा जाता है। द्वारकाधीश मंदिर के अलावा गुजरात के दाकोर में रणछोड़राय मंदिर स्थित है। गुजरात में श्रीकृष्ण के कई मंदिर स्थित है।  श्रीकृष्ण निर्वाण स्थलरू गुजरात में प्रभास नामक एक क्षेत्र स्थित है। यह सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पास स्थित है। यहां पर यदुवंशियों ने आपस में लड़ाई की थी और अपने कुल का अंत कर दिया था। वहीं एक स्थान ऐसा था जहां पर एक वृक्ष ने नीचे भगवान श्रीकृष्ण लेटे थे। उसी समय एक बहेलिए ने अनजाने में उनके पैरों पर तीर से वार किया। इसे बहाना बनाकर श्रीकृष्ण ने अपनी देह छोड़ दी।
प्रेम मंदिर, वृंदावन
वृंदावन का प्रेम मंदिर अत्यंत भव्य है। इसकी अलौकिक छटा भक्तों का मन मोह लेती है। इसमें भक्त वैसे ही खींचे चले आते हैंए जैसे कृष्ण अपनी लीलाओं से सबका मन मोह लिया करते थे। यहां की दीवारों पर हर तरफ राधा.कृष्ण की रासलीला वर्णित है। रात के वक्त ये  मंदिर रंग.बिरंगी रोशनी से चमकता रहता है, जिसका रंग हमेशा बदलता रहता है प्रेम मंदिर बांके बिहारी से करीब दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर बना है और अपनी भव्यता व नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में भगवान की लीलाओं का झांकियों के माध्यम से वर्णन किया गया है। ये झांकियां अपनी खूबसूरती से लोगों का मन मोह लेती हैं। कालिया नाग पर विजयए गोपियों के साथ भगवान कृष्ण की रास लीला, गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाए कान्हा और सभी ब्रजवासियों की मूर्तियां ऐसी प्रतीत होती हैंए जैसे थोड़ी ही देर में सजीव होकर कुछ बोल पड़ेंगी। प्रेम मंदिर 125 फीट ऊंचाए 122 फीट लंबा और 115 फीट चौड़ा है। पूरे मंदिर में 94 कलामंडित स्तंभ हैं। इसमें किंकिरी और मंजरी सखियों के विग्रह दर्शाए गए हैं। मंदिर के आगे खूबसूरत बगीचे लगाए गए हैं।
इस्कॉन मंदिर, वृंदावन 
वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में राधेकृष्ण की प्रतिमा एकदम मनोहारी हैण् जो भी इन्हें देखता हैए वे मुग्ध हो जाता हैण् ये मंदिर कृष्णा बलराम मंदिर के नाम भी जाना जात हैण् ये मंदिर साल 1975 में बनाया गया था।  वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में श्रद्धालु झूमते.गाते हुए प्रभु की आराधना करते हैं। यहां विदेशी श्रद्धालुओं की भी अच्छी.खासी तादाद होती है।

 

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