जब मॉनसून में सताए मच्छर

श्वेता राकेश

4th June 2021

बारिश जहां गर्मी से राहत दिलाती है वहीं दूसरी ओर अपने साथ ही कई बीमारियां भी लेकर आती है, जिसमें मच्छरों के प्रकोप से होने वाले रोग सबसे ज्यादा होते हैं। ऐसे में कैसे बचें मच्छरों के प्रकोप से जानते हैं लेख से।

जब मॉनसून में सताए मच्छर

मॉनसून आते ही हमें डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जैसी बीमारियों का डर सताने लगता है। इन बीमारियों से हर साल कई जानें चली जाती हैं और इन सब बीमारियों की जड़ है- मच्छर। वक्त रहते इन जानलेवा बीमारियों की पहचान कर और सही उपचार कर इनसे बचा जा सकता है। डेंगू बुखार बारिश के मौसम से शुरू होकर अक्टूबर तक अपना असर दिखाता है क्योंकि ये मौसम मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल होता है। जगह-जगह जल जमाव के कारण मच्छर पनपते हैं। डेंगू का बुखार मादा एडीज इजिह्रश्वटी नामक मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर दिन में काटते हैं, विशेषकर सुबह। डेंगू बुखार के लक्षण तीन-चार दिनों में दिखने लगते हैं। जब कोई डेंगू मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो वह उसका खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी उस व्यक्ति के शरीर में चला जाता है। इस मच्छर के काटने पर विषाणु तेजी से मरीज के शरीर में अपना असर दिखाता है, जिसकी शुरुआत तेज बुखार और सर दर्द आदि से होती है।

डेंगू बुखार के प्रकार

साधारण डेंगू बुखार- ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख न लगना जी मतलाना, गले में हल्का दर्द होना और शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे, गर्दन और छाती पर लाल या गुलाबी चकत्ते होना साधारण डेंगू बुखार के लक्षण हैं। यह बुखार लगभग एक हफ्ते तक रहता है। ज् यादातर मरीज इसी बुखार के शिकार होते हैं और ठीक भी हो जाते हैं। इसमें मृत्यु की आशंका नहीं होती।

डेंगू हैमरेजिक बुखार- नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उल्टी में खून आना तथा त्वचा पर गहरे काले या नीले रंग के चकत्ते होना इस बुखार के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में अपना खून जांच करवाएं।

डेंगू शॉक सिंड्रोम- जब मरीज बहुत बेचैन होने लगे, तेज बुखार के बावजूद शरीर ठंडा हो, मरीज बेहोश होने लगे, मरीज की नाड़ी कभी तेज, कभी धीमी चले और ब्लडप्रेशर बहुत कम हो जाए तो ये डेंगू शॉक सिंड्रोम के लक्षण हो सकते हैं। डेंगू हैमरेजिक बुखार तथा डेंगू शॉक सिंड्रोम का समय पर उपचार नहीं होने से जान भी जा सकती है। डेंगू का वायरस आमतौर पर प्लैटलैट्स कम कर देता है, जिससे शरीर में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। अगर प्लैटलैट्स एक लाख से कम हो जाए या बहुत तेजी से गिरने लगे तो मरीज को प्लैटलैट्स चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। प्लैटलैट्स हमारे शरीर में ब्लीडिंग (रक्तस्राव) रोकने का काम करते हैं। सामान्यत: एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में डेढ़ से दो लाख प्लैटलैट्स चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती। केवल डेंगू हैमरेजिक और डेंगू शॉक सिंड्रोम में ही इसकी आवश्यकता होती है। कई बार डेंगू के मरीजों के पेट और फेफड़े में पानी भी एकत्र होने लगता है। यह चिंता का विषय हो जाता है।

उपचार- अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसकी देखभाल और इलाज घर पर भी हो सकता है। डॉक्टर से परामर्श लेकर ही कोई दवा दें। डेंगू के विभिन्न लक्षण देखकर और प्लैटलैट्स की जांच होने के बाद ही इसकी दवा दी जाती है। डेंगू के मरीजों को सामान्य भोजन दे सकते हैं। उन्हें भरपूर पानी और तरल पेय पदार्थ जैसे नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ आदि पीना चाहिए जिससे शरीर में पानी की कमी न हो और रक्त गाढ़ा न हो। डेंगू के मरीजों के लिए आराम भी बेहद जरूरी है। आयुर्वेद की मानें तो डेंगू से बचने के लिए एक चम्मच गिलोय का रस, दो काली मिर्च, तुलसी के पांच पत्ते और अदरक को मिलाकर पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और पाच दिनों तक इसका सेवन करें। इसके अतिरिक्त डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल, क्रोसीन दे सकते हैं। सावधानी बरतना, विशेषकर मच्छरों से बचना ही डेंगू से बचने का कारगर तरीका है। अपने भोजन में हल्दी, अजवायन, अदरक, हींग को शामिल करें। और इस मौसम में पत्तेदार सब्जियों के सेवन से दूर रहें। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। पानी उबालकर पीएं। अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। आठ-दस तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ मिलाकर लें। विटामिन सी से भरपूर चीजों जैसे- नींबू, आंवले, संतरे, मौसमी खाएं। इनसे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

मच्छरों से बचाव

  • अपने घर के आस-पास पानी जमा न होने दें। नालियों की सफाई करें।
  • कूलर और फूलदानों का पानी हफ्ते में एक बार जरूर बदलें।
  • डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को बद रखें।
  • मच्छरदानी लगाकर सोएं।
  • मच्छरनाशक दवा का छिड़काव करें।
  • बच्चों को पूरे कपड़े पहनाकर रखें।
  • बच्चों का इम्युन सिस्टम अपेक्षाकृत कमजोर होता है, अत: उनके प्रति सचेत रहें।
  • बच्चों को गंदगी और पानी में खेलने से रोकें। डेंगू हो जाए तो उन्हें अस्पताल में जरूर लें जाएं क्योंकि बच्चों में ह्रश्वलेटलेट्स जल्दी कम हो जाते हैं और उनमें डीहाइड्रेशन भी जल्दी होता है।
  • मच्छरों से बचने के लिए शरीर का ज् यादा-से-ज्यादा हिस्सा कपड़ों से ढका हो, विशेषकर बच्चों का।
  • घड़ों, बाल्टियों का पानी बदलते रहें।
  • डिस्प्रीन और एस्प्रीन, इकोस्प्रीन की गोली ना दें। इनसे ह्रश्वलेटलेट्स कम हो सकते हैं और रक्तस्राव हो सकता है।

मलेरिया

जहां डेंगू के मच्छर दिन में काटते हैं और साफ पानी में पनपते हैं, वहीं मलेरिया के मच्छर अधिकतर रात में ही काटते हैं और गंदे पानी में पनपते हैं। मलेरिया 'ह्रश्वलाज् मोडियम' नाम पैरासाइट से होने वाली बीमारी है, जो मादा 'एनोफिलीज' मच्छर के काटने से होता है।

लक्षण

  • आमतौर पर मलेरिया होने पर बुखार एक दिन छोड़कर आता है और इसमें ठंड के साथ तेज बुखार या गर्मी के साथ तेज बुखार होता है।
  • कमजोरी महसूस होती है और पसीने के साथ बुखार कम होता है।

बचाव

  • मलेरिया की आशंका होने पर ब्लड टेस्ट करवाएं और डॉक्टरों की सलाह पर ही दवा लें। दवा की खुराक पूरी करें नहीं तो मलेरिया दोबारा होने की आशंका बनी रहती है।
  • मलेरिया के मच्छरों से बचने के लिए अपने घर या कार्यस्थल के आसपास गंदा पानी जमने से रोकें।
  • मच्छरनाशक दवा का छिड़काव करें।
  • अगर पानी जमा होने से नहीं रोक सकते तो उसमें पेट्रोल या किरोसिन तेल डाल दें।
  • लहसुन का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। इसकी गंध से मच्छर दूर भागते हैं।
  • नीम का तेल भी मच्छर भगाने में कारगर है। सोने से पहले जरा सा नीम का तेल शरीर पर लगाएं। इससे मच्छर नहीं काटेंगे।
  • पानी उबालकर पीएं।
  • पूरी आस्तीन के कपड़े पहने।
  • मच्छरों से बचाव का सबसे अच्छा उपाय है रात में मच्छरदानी के अंदर सोना।

ऐसा हो खान-पान

मलेरिया से बचने के लिए दालचीनी में चुटकीभर कालीमिर्च पॉउडर और एक चम्मच शहद को एक गिलास पानी में उबालें और इसे ठंडा होने के बाद पीएं। यह मलेरिया से लड़ने में सहायक है। इसके अतिरिक्त एक टुकड़ा अदरक को बारीक काटकर एक कप पानी में उबाल कर, इसे काढ़ा बनाकर ठंडा कर पिएं ।

  • सुबह खाली पेट तुलसी के चार-पांच पत्ते चबाएं। इससे मलेरिया का बुखार उतर जाएगा।
  • नींबू पानी या नींबू की शिकंजी का सेवन करने से भी मलेरिया का बुखार उतर जाता है।
  • काली मिर्च के पांच दानों को 50 ग्राम नीम की पत्तियों के साथ पीस लें और इसे कप में छानकर रख लें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी को पिलाएं। मलेरिया जड़ से खत्म हो जाएगा।
  • बार-बार मलेरिया का बुखार हो तो नियमित रूप से छाछ का सेवन करें।
  • मलेरिया के बुखार में सेब खाने से बुखार जल्दी उतरता है।
  • सौंठ और धनिया पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाएं और दिन में तीन बार इसका सेवन करें। यह बुखार में फायदा करता है।

चिकनगुनिया

पिछले कुछ वर्षों से डेंगू और मलेरिया के साथ-साथ चिकनगुनिया का भी प्रकोप बढ़ा है, खासकर बारिश के मौसम में। चिकनगुनिया भी डेंगू और मलेरिया की तरह मच्छर के काटने से होने वाली वायरल बीमारी है। चिकनगुनिया अल्फा वायरस की वजह से होता है। इसके लक्षण तीन से छ: माह तक रह सकते हैं। डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षण काफी मिलते-जुलते हैं। बुखार और कमजोरी होना इनके आम लक्षण हैं। यह भी एडीज मच्छर के काटने से होता है। आमतौर यह जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन रोगी तेज बुखार, अत्यधिक शारीरिक दर्द तथा कमजोरी से पीड़ित होता है। चिकनगुनिया से आपका स्वास्थ्य लंबे समय तक प्रभावित रहता है। चिकनगुनिया का मच्छर दिन के समय काटता है।

लक्षण

  • तेज बुखार आना हाथ, पैर, कलाई में हल्के सूजन के साथ ही गंभीर दर्द होना, पीठ दर्द होना।
  • सिर दर्द।
  • थकान होना।
  • त्वचा पर लाल चकत्ते होना।
  • आंखों में दर्द होना, आंख आना।
  • गले में खराश होना।

उपचार

  • चिकनगुनिया होने पर डिहाइड्रेशन से बचें। तरल पेय पदार्थ जैसे पानी, जूस नारियल पानी आदि का सेवन करें।
  • पौष्टिक भोजन करें। पर्याप्त आराम करें।

कुछ घरेलू उपाय अपनाकर चिकनगुनिया से राहत पा सकते हैं:-

  • अदरक की चाय या ग्रीन टी पिएं।
  • बर्फ से सेंकने पर सूजन और दर्द में आराम मिल सकता है।
  • गिलोय का जूस बुखार से लड़ने में सहायक है। विशेषकर डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन-फ्लू में।
  • तुलसी के पत्ते पानी में उबालकर पीएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • चिकनगुनिया बुखार में जोड़ों का दर्द लम्बे समय तक बना रहता है। इस दर्द से राहत पाने के लिए गिलोय का काढ़ा बनाकर उसमें 10-20 मिलीलीटर अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। यदि गिलोय नहीं उपलब्ध हो तो नीम के कुछ पत्ते सुबह खाएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।
  • नवजात शिशुओं और बुजुर्गों के लिए चिकनगुनिया घातक हो सकती है। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, मधुमेह या हृदय रोग है उनके लिए भी यह बीमारी खतरनाक हो सकती है।
  • डेंगू और मलेरिया की तरह चिकनगुनिया में भी मच्छरों से बचाव ही बेहतर विकल्प है। घर और बाहर साफ-सफाई रखें और कूलर गमले आदि का पानी बदलते रहें। पानी जमा न होने दें। अगर मॉनसून में मच्छरों के प्रकोप और उनसे होने वाली बीमारियों से बचना है तो साफ-सफाई ही एकमात्र उपाय है। स्वच्छ रहें, स्वस्थ रहें।

यह भी पढ़ें -फोलिक एसिड को इन 5 तरह से डाइट में करें शामिल

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