इन व्यावहारिक तरीकों को आजमा कर छुड़वा सकती हैं अपने लाडले का अंगूठा चूसना

Spardha Rani

5th June 2021

इन व्यावहारिक तरीकों को आजमा कर छुड़वा सकती हैं अपने लाडले का अंगूठा चूसना

श्वेता को इन दिनों अपने बेटे गुन्नू पर बहुत गुस्सा आता है। ऐसा नहीं है कि गुन्नू बहुत रोता है या फिर उसे तंग करता है। दरअसल गुन्नू को आदत है अंगूठा मुंह में लेने की, वह जब भी आराम करता है या फिर अकेले रहता है, अंगूठा मुंह में ले लेता है। श्वेता लाख कोशिश करती है कि उसका बड़ा होता बेटा ऐसा न करे लेकिन गुन्नू मानता ही नहीं। कई बार परेशान होकर श्वेता उसे जोर से डांट भी देती है और कभी-कभार तो पिटाई भी कर देती है। सिर्फ श्वेता ही नहीं, श्वेता जैसी कई मांएं अपने बच्चे द्वारा अंगूठा मुंह में लेने पर ऐसा ही रवैया अपनाती होंगी, जो किसी भी नजरिए से सही नहीं है।

क्या करे मां

 

मांओं को यह समझने की जरूरत है कि बच्चे द्वारा अंगूठे का चूसना आम बात है। दरअसल बच्चा ऐसा करके खुद को शांत करता है। बच्चा अपनी यह आदत तीन-चार वर्ष की आयु में छोड़ देता है, कुछ की यह आदत चार-पांच साल तक बनी रहती है। लेकिन यदि यही आदत इसके बाद लंबे समय तक बनी रहे तो गंभीर दांतों की बीमारी या स्पीच प्रॉब्लम (बोलने में दिक्कत) का रूप ले सकती है। यदि आपका बच्चा चार-पांच साल तक यह आदत नहीं छोड़ रहा है तो इसके लिए जरूरी है कि आप उसे लाड़-प्यार से समझाएं।

क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक

 

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि यदि आपका लाडला पांच वर्ष की उम्र के बाद भी अंगूठा चूसना नहीं छोड़ रहा है तो इसका अर्थ यह है कि उसे कोई भावनात्मक समस्या है या कोई अन्य परेशानी, जिसे उसकी मां नहीं समझ पा रही है। लंबे समय तक अंगूठा चूसने से बच्चे के दांत आड़े-तिरछे हो सकते हैं। जब बच्चा बड़ा होगा तो उसे अपनी इस आदत से परेशानी तो होगी ही, साथ ही अपने दांतों की बनावट को लेकर भी वह दुखी रहेगा। साथ ही बच्चे को बोलने संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। संभव है कि वह किसी शब्द का उच्चारण ठीक से न कर पाए। इन सब बातों को ध्यान में रखकर अच्छा तो यह होगा कि मांएं अपने बच्चे को प्यार से समझाएं ताकि अंगूठा चूसने की उसकी आदत छूट सके।

प्यार से समझाएं

 

 

किसी भी बात को समझाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप उसकी अच्छी बातें बच्चे को बताएं। उसे बताएं कि यदि यह आदत वह छोड़ देता है तो उसकी मुस्कुराहट खूबसूरत हो जाएगी, उसके दांत खूबसूरत दिखेंगे। वरना बड़े होने के बाद उसे अपने आड्रे-तिरछे दांत अच्छे नहीं लगेंगे, उसे अपने दोस्तों के बीच बुरा महसूस हो सकता है। उसे यह समझाएं कि यदि उसकी यह आदत बनी रहेगी तो उसके दांतों में किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं। यदि वह नहीं समझ पा रहा तो आईने में उसे दिखाएं कि उसकी दांतों की शेप बिगड़ रही है।

अंगूठा चूसने से होने वाली परेशानियों के बारे में बताएं

 

 

 

अंगूठा मुंह में लेने की आदत छुड़ाने के क्रम में उसे बताएं कि उसके हाथ के कीड़े अंगूठे के जरिए मुंह में चले जाते हैं। उसे पेट में दर्द इनकी वजह से ही होता है। यही कीड़े मुंह के जरिए पेट में पहुंचकर दर्द करते हैं। दर्द से उसे कितनी परेशानी होती है, यह उसे बताएं। उसे बताएं कि यदि दर्द बढ़ गया तो उसके डॉक्टर अंकल (अस्पताल) तक जाने की नौबत आ सकती है। उसे बताएं कि अब वह बड़ा/बड़ी हो चुके हैं, वह अब कई लोगों के बीच आता-जाता है। यदि वह इसी तरह से अंगूठा मुंह में लेता रहा है उसकी इस आदत का लोग मजाक उड़ा सकते हैं, खासकर उसके दोस्त।

समय देखकर करें बात

 

बच्चे से किस समय किस चीज के बारे में बात करनी है, इस पर जरूर ध्यान दें। संभव है कि वह किसी खास समय पर बात करने के मूड में न हो तो ऐसे संवेदनशी, मुद्दे को वह कैसे समझेगा। आपको भी यह समझने की आवश्यकता है कि बच्चा तनाव से मुक्ति पाने के लिए अंगूठा चूसता है। इसलिए ऐसे समय पर बात करें जब वह आराम के मूड में हो, खुश हो। साथ ही यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि बच्चे तक अपनी बात पहुंचाने के लिए आपको भी आराम और शांत मिजाज में रहना होगा। कोई भी बात उसे शांति से समझाएं, कभी भी चिल्लाने से बचें।

व्यावहारिक तरीका

 

  • पहले सप्ताह तो अपने बच्चे का हाथ खाली न रहने दें। उसके हाथ में कोई खेल या कोई अन्य चीज दे दें।
  • बच्चे का टीवी देखना कम कर दें क्योंकि अधिकतर बच्चे टीवी देखते समय अंगूठा चूसते हैं।
  • चाहें तो बच्चे के अंगूठे पर बैंडएड या कोई पट्टी लगा दें या कोई ऐसी चीज जिससे वह मुंह में अंगूठा न ले पाए।
  • यदि आपके बच्चे के अंगूठे की पट्टी निकल जाए तो अपने बच्चे को बिना कुछ बोले, दूसरी लगा दें। उसे इसके लिए कुछ बोले नहीं, विशेषकर झिड़कें तो बिल्कुल नहीं।
  • बच्चे के सोते समय ध्यान से उसके मुंह से अंगूठा बाहर निकालें। यह याद रखें कि रात में बच्चे द्वारा मुंह में अंगूठा लेने की आदत को छुड़ाना बहुत मुश्किल है।
  • खुद भी आराम से रहें, उसकी बातों को ध्यान से सुनें। खुद सकारात्मक रहें, तभी आपका बच्चा सकारात्मक सोचेगा और रहेगा।
  • अपने बच्चे को हमेशा समझाएं, कभी भी उस पर बल प्रयोग न करें।
  • यदि आपका बच्चा किसी भावनात्मक समस्या के इलाज के तौर पर अंगूठा मुंह में लेता है तो उससे बात करें। उसे समझें।
  • यदि आपका बच्चे ने एक दिन में कुछ समय तक अंगूठा मुंह में न लिया हो तो बच्चे को खुश रखने और आदत छोड़ने के लिए उपहार दें।
  • इसी तरह जैसे-जैसे बिना अंगूठा मुंह में लिए वह रहने लगे, उसे उपहार देती जाएं।
  • उपहार में कोई छोटा खिलौना, टॉफी, कहीं घूमने ले जाना शामिल हो सकता है। ध्यान रखें कि बच्चे को यह घूस न लगे।
  • चाहें तो एक चार्ट बना लें या कैलेंडर से भी काम चल सकता है। इस पर उन दिनों को लिखते जाएं या कैलेंडर पर कलम से निशान लगाती जाएं जब आपके बच्चे ने अंगूठा न लिया हो। निशान लगाने के लिए अपने बच्चे को ही आगे कीजिए। इससे उसे अपनी उपलब्धि पर खुशी होगी और आप अंगूठा लेने की उसकी आदत से मुक्ति पा लेंगी।

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