यह सही तरीका है बच्चों से खबरों पर बात करने का

Spardha Rani

14th June 2021

यह सही तरीका है बच्चों से खबरों पर बात करने का

प्रियंका शर्मा 34 साल की है। वह दिन भर काम के सिलसिले में बाहर रहती है। शाम को जब घर लौटती है तो पाती है कि उसकी 7 साल की बेटी प्रथा टीवी पर आंखें गड़ाए बैठी है। उसका पसंदीदा चैनल कार्टून वाला है या फिर वह जिस पर मार- धाड़ के शोज आते हैं। कई बार वह कोरोना से जुड़ी खबरें भी देखती हैं। इसी का नतीजा है कि प्रथा के मन में कई ऐसे ख्याल आते हैं, जिनके बारे में प्रियंका नहीं चाहती कि वह सोचे। प्रियंका चाहती है कि उसकी प्रथा को भी इसमें रुचि हो, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह कहानी सिर्फ प्रथा जैसे बच्चों की नहीं है।

आपका बच्चा टीवी पर कार्टून देखना पसंद करता है या फिर गाने। थोड़ा बड़ा है तो उसे हॉलीवुड फिल्में देखना अच्छा लगता होगा। आप कितना भी चाह लें, वह खबरें देखता तो है लेकिन उसे सही तरह से ग्रहण नहीं करता है। आप चाहती हैं कि आपका बच्चा खबरों के बारे में जाने और समझे, साथ ही इस समहय खुद को सही तराईके से रखे तो इसके लिए आपको अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत है।

उम्र के अनुसार खबरों की समझ जरूरी

बच्चा कितनी जल्दी खबर को ग्रहण करता है यह बात इस पर निर्भर करती है कि खबर को उसके सामने कैसे प्रस्तुत किया जा रहा है। यह तो सबको पता है कि आज के युवा के पास इंफॉरमेशन की कमी नहीं है। आपके बच्चे के लिए क्या सही है और क्या नहीं, इसके लिए बच्चे की उम्र के अनुकूल खबरों को बांटिए। छह से कम उम्र वाले कल्पना और सचाई में अंतर नहीं समझते। इस उम्र के बच्चे कुछ विशेष खबरों को देखकर डर भी जाते हैं। इसलिए इस उम्र के बच्चे को हर तरह की खबरों से बचाकर रखना चाहिए। छह से दस के बीच वाले बच्चे कल्पना और असल जिंदगी में फर्क करना जानते हैं लेकिन पूरी तरह से समझ नहीं पाते। इस समय बच्चे के साथ खबर पर नजर रखना चाहिए। यदि वह कुछ खास खबरों को सुन- देखकर परेशान हो रहा है तो इससे बचिए। यदि बच्चे को मर्डर, चोरी आदि से डर लग रहा हो तो उसे समझाएं कि ये आम है। उन्हें खतरे के सही मायने समझाएं। ग्यारह से अधिक उम्र वाले बच्चे मीडिया सैवी होते हैं। वे कल्पना और सचाई के बीच के फासले को भली-भांति समझते हैं और अपनी राय भी बनाते हैं। पर कई दफा मीडिया पर लगातार नजर उनके मन में संशय पैदा कर सकता है। बेहतर होगा कि आप उसके संशय को दूर करने के लिए हमेशा उसके साथ हों।

अकेले नहीं देखने दें, साथ में देखें

बच्चे के मन से खबरों से पनपते डर को निकालने के लिए अच्छा यह है कि आप उसके साथ ही खबरों पर नजर रखें। साथ में अखबार पढ़ें, टीवी देखें, आपको समझ में आएगा कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है और आपको उससे खबरों पर किस तरह से बात करनी है। बड़े बच्चों के लिए आप समय सीमा का निर्धारण भी कर सकती हैं।

शेयर करना सिखाएं

यदि आपका बच्चा युद्ध होने के प्रति आशंकित है और भयभीत हो रहा है तो उसे हर बात साफ करके समझाएं। यह भी सुनिश्चित करें कि यदि उसे कोई बात परेशान कर रही है या वह शर्मिंदगी महसूस कर रहा है तो आपसे अपने मन की इस बात को शेयर करे। खबरों के माध्यम से आप उससे कठिन से कठिन मुद्दों पर बात कर सकती हैं, फिर चाहे वह मुद्दा सेक्स हो या दोस्ती का। स्कूल में होने वाले अपराधों पर भी आप उससे बात करके समझा सकती हैं।

किसी भी खबर के फैक्ट्स उसे कंफ्यूज कर सकते हैं, इसलिए खबरों के बहाने ही उसके अंदर जीवन मू्ल्य की भावना का विकास करें। ऐसा आप उदाहरण के जरिए कर सकती हैं।

गलत और सही के बीच का अंतर समझाएं

कौन सी खबर सही है और कौन सी गलत, यह भी उसे समझाएं। स्कूल में होने वाले अपराधों पर बच्चे के साथ अभिभावक भी परेशान हो जाते हैं। जबकि अध्ययन तो यह बताते हैं कि स्कूल में होने वाली दुर्घटना से दो करोड़ में से एक बार बच्चे को नुकसान पहुंचता है। बच्चे को सुनिश्चित कराएं कि चूंकि खबरों में ऐसा देखा-सुना गया है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसके साथ भी कुछ ऐसा ही होगा।

 

डर और सुरक्षा के बीच का भेद जानना है आवश्यक

 

अधिकतर खबरें आपके बच्चे के जीवन में असल में नहीं घटती, फिर भी बच्चे उनके बारे में जानकर परेशान हो जाते हैं। खबरों का प्रभाव ही ऐसा होता है कि वे डर जाते हैं। इसलिए बच्चे को यह समझाएं कि कुछ लोग सिर्फ इसलिए काम करते हैं ताकि वह सुरक्षित रह सके। उसे कहें कि मुझे पता है कि तुम फलां खबर के बारे में जानकर भयभीत हो गए है लेकिन डरने की आवश्यकता नहीं है। मैं तुम्हारी सुरक्षा के लिए हूं। बड़े बच्चे को यह कह सकती हैं कि सिर्फ मैं और तुम्हारे पापा तुम्हारी सुरक्षा नहीं करते बल्कि पुलिस, शिक्षक और पास-पड़ोस के लोग भी तुम्हारी सुरक्षा करते हैं।

कुछ बातें बड़े होने पर ही आती हैं समझ

अभिभावकों को सबसे ज्यादा दिक्कत यह होती है कि वे कैसे अपने बच्चे को समझाएं कि युद्ध क्यों होता है, नेता झूठ क्यों बोलते हैं आदि। यदि आप उसे समझाती भी हैं तो वह समझ नहीं पाता। उसे यह समझाएं कि दुनिया बहुत कठिन है और जब वह बड़ा हो जाएगा तो इन बातों को बेहतरी से समझेगा।

खबरों का चयन समझ कर करें

यह ध्यान रखें कि बच्चे के लिए आप अच्छी खबरों का चयन करें। स्थानीय खबरों में अपराध और हिंसा की भरमार रहती है। इसलिए उन खबरों पर जोर दें जिससे आपके बच्चे को परेशानी न हो। कुछ चैनलों पर इस तरह की खबरें आती भी हैं। ऐसे कार्यक्रम दिखाएं जो विशेषकर बच्चों के लिए बनाए जाते हैं। चाहें तो उसके लिए कुछ खास पत्रिकाएं और वेबसाइट का चयन कर सकती हैं। जिस तरह से आप उसके लिए खास डाइट का चयन करती हैं उसी तरह खास खबरें भी चुनें।

 

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