घर के काम करना चाहता है बेटा तो दीजिए उसका साथ

चयनिका निगम

19th June 2021

बेटे घर के काम करें,ये बात ज्यादतर परिवारों को पसंद नहीं आती हैं। लेकिन समय बदला है तो आपको अपनी सोच बदलकर उसको सपोर्ट करना होगा।

घर के काम करना चाहता है बेटा तो दीजिए उसका साथ

अक्सर घरों में बेटों के काम करने पर मानो मनाही ही होती है। कई बार तो घर के बड़े बुजुर्ग लोग नाराज भी हो जाते हैं। उन्हें बेटों का घर के कामों से जुड़ाव पसंद ही नहीं आता है। दरअसल सालों से ये ही सोच भारतीय समाज में बुनी हुई है। यही वजह है कि खुद पुरुष भी ज्यादातर बार घर के कामों को करने से बचते रहते हैं।लेकिन अब समय बदला है और इसी के साथ बदली है पुरुषों की खुद की सोच भी। पुरुष अब खुद भी घर के काम करने में रुचि दिखाते हैं। घर के बड़ी उम्र के पुरुषों को ऐसा करते देख कर अब छोटे बच्चे भी ऐसा करने लगे हैं। पर अब जरूरत है कि कोई परिवार वाले इस काम में उन्हें प्रोत्साहित करें। उन्हें रोकें नहीं,उन्हें ये न कहें कि‘अरे तुम तो लड़के हो,ये काम तुम्हारा नहीं है।'ऐसी बातें बेटों को लैंगिक भेदभाव के चक्रव्यू में फंसा देती हैं। फिर बेटा घर के कामों को अपना नहीं मानता। पर जब आपका बेटा घर के कामों में रुचि दिखाए तो आपको क्या करना चाहिए जान लीजिए-

आम बात है-

बेटों का काम करना आम बात है,पहले ये बात आपको खुद समझनी होगी। आपको खुद ये बात माननी होगी कि बेटों का काम करना कोई नई बात बिलकुल नहीं है। ये सामाजिक बदलाव है जो बहुत पहले हो जाना चाहिए था। घर के काम तो हर इंसान का काम है। जब आप ये बात खुद मान लेंगी तो आपके लिए बच्चे को सपोर्ट करना आसान हो जाएगा। वो ये करते हुए शर्मिंदा नहीं होगा।

लड़कियों वाला काम-

बेटा ऐसा करेगा तब उसे ये पता रहे कि ये सिर्फ लड़कियों का काम नहीं है। इसे सिर्फ लड़कियां नहीं करती हैं बल्कि सबको ही ये काम करने चाहिए। इसमें लड़कियों का एकाधिकार नहीं है और ना ही ये उनकी जिम्मेदारी है। ये तो सभी की ज़िम्मेदारी है। लड़कियों वाला काम कह कर आप घर के कामों को बहुत खास बना देती हैं,जबकि ये कोई खास काम नहीं हर इंसान की जरूरत है। ये बात आपके बेटे को समझ आनी चाहिए।

जरूरी स्किल-

सबसे पहले आपको घर के कामों को जरूरी स्किल मानना होगा। जब आप इसे स्किल मानेंगी तब ही बच्चा भी इसे एक जरूरी स्किल की तरह समझेगा। जब एक बार वो ये बात समझ जाएगा तो फिर वो खुद इन कामों को करने लगेंगे। जब वो करने लगेंगे तो आपको बुरा इसलिए भी नहीं लगेगा क्योंकि ये बात तो आपने ही उन्हें समझाई है।

अब दूसरों की बारी-

ऊपर लिखी बातें दूसरों को और खुद को समझाने के बाद अब बारी परिवार की है। परिवार ये बात समझेगा तब ही बेटे को हतोत्साहित नहीं करेगा। बल्कि वो उसे ऐसा करने के लिए कहेगा। बेटा न भी करना चाहे तो परिवार उसको ये करने के लिए कहेगा और बेटा इन चीजों को समझेगा तो है ही। ऐसा होगा जब पूरा परिवार उसे ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। फिर घर से बाहर कोई उसे कुछ भी कहता रहे,उसे फर्क पड़ेगा नहीं।

जवाब क्या देना है-

हो सकता है बेटे को घर के काम करते देख कर कई बाहर वाले‘उसे लड़कियों वाला काम कर रहे हो'जैसे बातें कहें। अब इस वक्त बेटे को बताइए कि कहना क्या है?उसे बताइए कि इस वक्त शर्मिंदा बिलकुल नहीं होना है। इस वक्त खुद को दूसरों से बेहतर महसूस करें। महसूस करें कि आपको वो काम आता है जो ज्यादातर लड़कों को नहीं आता है। इस मौके के लिए बेटे को जवाब देना भी सिखाएं। दरअसल वो शर्मिंदा न हो इसके लिए उसके पास कोई कारण होना चाहिए,जिससे वो संतुष्ट हो और दूसरों को भी यही कारण बता सके जैसे-

  • ये सिर्फ लड़कियों का काम नहीं है।
  • खाना खाते हैं तो बनाने में क्या दिक्कत है।

इस तरह के वाक्य उसे आत्मविश्वास देंगे। वो अपने कामों को लेकर संतुष्ट होगा और दूसरों की बातें उसे खराब नहीं लगेंगी।

भविष्य में आएगा काम-

आजकल ज्यादातर बच्चे पढ़ने के लिए घर से बाहर जाते ही हैं। अब ऐसे में खाना बनाने का स्किल तो उन्हें आना ही चाहिए। क्योंकि कब कैसी स्थिति होगी ये कोई नहीं जानता है।

ये भी करें-

  • गाड़ी चलाते हुए बेटे को बताएं कि जैसे मैं गाड़ी चला सकती हूं वैसे ही तुम किचन का काम भी कर सकते हो।
  • किचन में काम करें तो पति से भी भले थोड़ा लेकिन सहयोग करने के लिए कहें।
  • कोशिश ये भी करें कि लड़कियों को कमतर दिखाने वाली बातें कम से कम बेटे के सामने न करें।
  • ‘लड़के रोते नहीं'टाइप की बातें भी बेटों के सामने न करें।

ऐसा नहीं करेंगी तो ये बातें बेटे को अहसास कराएंगी कि लड़कियां कमतर होती हैं। जब वो ये फील करेगा तो सामाजिक तौर पर लड़कियों के कामों को भी कमतर मानेगा और उन्हें करने के बारे में तो कभी नहीं सोचेगा।

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