कल रात - गृहलक्ष्मी कहानियां

प्रेमलता यदु

13th July 2021

आज शाम से ही ना जाने क्यों....? बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है। स्वाति भी बेचैनी से इधर उधर टहल रही है। कभी वह खिड़की के पास जा कर खड़ी हो जाती, तो कभी गैलरी में, बचपन से ही स्वाति को बारिश की फुहारें पसंद है। बारिश की फुहारों से चेहरे को भिगोना और बारिश की बूंदों को हथेलियों पर ले कर खेलना उसे अच्छा लगता है किन्तु आज ना जाने क्यों बारिश की ये फुहारें स्वाति को वो खुशी नहीं दे रही है और ना ही उसे बारिश की बूंदों को अपनी हथेलियों पर लेने का मन कर रहा है।

कल रात - गृहलक्ष्मी कहानियां

खिड़की से आती बिजली की चमक स्वाति की आभा को बढ़ा रही हैं।लाल रंग की शिफाॅन साड़ी में वह दुल्हन की तरह लग रही है और लगे भी क्यों ना....? आज स्वाति दुल्हन की तरह ही सजी हुई है क्योंकि आज उसकी और समीर की शादी की पहली वर्षगांठ जो है।स्वाति तो चाहती थी आज समीर ऑफिस ही ना जाए लेकिन काम की अधिकता बता कर और घर जल्दी आने का वादा कर समीर ऑफिस चला गया।

     वैसे तो स्वाति किसी से नहीं डरती लेकिन... आज बिजली की चमक और सरसर करती हुई हवाएं उसे डरा रही है। पिछले एक वर्ष में समीर के प्यार ने उसे थोड़ा कमजोर बना दिया है।वह समीर के प्यार में कुछ इस तरह से खोई हुई है कि वह अपने आप को ही भूल गई है।वह स्वयं को समीर की नजरों से देखने लगी है।

     स्वाति,समीर की खुशी में ही अपनी खुशी तलाशती है और ऐसा हो भी क्यों ना..?समीर ही वह व्यक्ति है जिसे वह सब से ज्यादा प्यार करती है। समीर ही उसकी पूरी दुनिया है। शादी से पहले वह अपने पिता से बहुत प्यार करती थी।वे भी स्वाति की हर छोटी-बड़ी खुशी का पूरा-पूरा ख्याल रखते थे और आज वैसा ही ख्याल समीर भी रखता है स्वाति का बिल्कुल बच्चों की तरह।उसे कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने देता, यहां तक कि स्वाति अपनी व्यक्तिगत उपयोग की चीजें भी स्वयं ले कर नहीं आती समीर ही ले कर आ जाता है।

     शादी से पहले स्वाति एक कंपनी में इवेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थी परन्तु शादी के बाद समीर के कहने पर उसने वह जाॅब छोड़ दिया क्योंकि समीर नहीं चाहता था कि स्वाति सारा दिन घर और ऑफिस के कामों में उलझ कर रह जाए।

     रात के 10:30 बजने को है, समीर अब तक घर नहीं लौटा।उसका मोबाइल भी कभी स्विच ऑफ तो कभी मूव्ड ऑउट ऑफ कवरेज एरिया बता रहा है। ऑफिस में फ़ोन करने पर पता चला समीर तो आज जल्दी ही घर के लिए निकल गया।स्वाति को यह बात और भी ज्यादा बैचेन कर रही है। उसके मन में ना जाने कैसे-कैसे ख्याल आ रहें हैं। समीर इससे पहले तो कभी इतना लेट नहीं हुआ और आज इतने स्पेशल डे पर समीर अब तक घर नहीं पहुंचा और ना ही उसने स्वाति को कॉल किया।

     स्वाति ने आज पूरे घर को बहुत ही खूबसूरत तरीके से सजाया है फ्लोटिंग कैंडल, बैलून, फ्लावर के साथ मद्धिम-मद्धिम जलती कमरे की रोशनी पूरे घर को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही है।स्वाति ने डायनिंग टेबल पर सारा खाना समीर की पसंद का बना रखा है पर अब तक समीर का कुछ पता नही।शाम से ही स्वाति उसका इंतज़ार कर रही है।अब बारिश और भी तेज हो गई है।बादल की गड़गड़ाहट, बिजली की चमक और सरसर करती हवाओं की आवाज स्वाति को भयभीत कर रही है। इंतज़ार करती हुई स्वाति थक कर सोफे पर बैठ गई, बैठते ही उसे झपकी आने लगी तभी तकरीबन 11:00 बजे डोर बेल बजा

     डोर बेल बजते ही स्वाति ने दौड़ कर दरवाजा खोला, सामने समीर खड़ा था। हाथों में फूलों का गुलदस्ता लिए। समीर को देखते ही स्वाति उससे लिपट कर रोने लगी तभी समीर उसे शांत करते हुए बोला-

     "सॉरी डियर आज ऑफिस में बहुत जरूरी डील फाइनल करनी थी इसलिए लेट हो गया।एनी वे लेट्स सेलिब्रेट "।

     घर के अंदर आते ही समीर ने स्वाति को अपनी बाहों में लेते हुए बोला-

    वॉव स्वाति इट्स सो ब्यूटीफुल,रियली यू आर अ गुड इवेंट मैनेजर। तुम ने तो पूरे घर को एक नया लुक दे दिया है।इट्स लुकिंग सो रोमांटिक एण्ड दिस ब्यूटीफुल डायमंड रिंग फार माई मोस्ट ब्यूटीफुल वाइफ"।

     स्वाति इतराती हुई अपने आप को समीर से अलग करती हुई बोली-

     "थैंक्यू"

     तभी समीर,स्वाति को अपनी ओर खींचते हुए बोला-

     " स्वाति तुम फिर से अपना जॉब ज्वाइन कर लो"।

     स्वाति आश्चर्य से समीर की ओर देखने लगी।समीर की बातों में गंभीरता थी, तभी समीर आगे बोला-

     "मैं नहीं चाहता तुम्हारा टेलेंट इन चार दीवारियों के अन्दर दब कर रह जाए और जब तुम जॉब करोगी तो सेल्फ डिपेंड भी हो जाओगी"। 

     समीर की सेफ्लडिपेंड वाली बात स्वाति को अच्छी नहीं लगी। उसके बाद भी स्वाति समीर पर अपना प्यार जताते हुए अपनी दोनों बांहों को समीर के कांधे पर रखती हुई बोली-

     "जनाब मुझे कोई सेल्फ डिपेंड नहीं बनना। मैं तो सारा जीवन तुम पर ही डिपेंड रहना चाहती हूं"।

     तभी समीर स्वाति की बांहों को हटाते हुए बोला-

     " नहीं तुम्हें सेल्फ डिपेंड बनना है, समझी तुम"।इस बार समीर के शब्दों में दृढ़ता थी।

     स्वाति, समीर को खुश करने के लिए बोली-

     "ओके.बाबा ओके। मैं सेल्फ डिपेंड बन जाऊंगी ठीक है। अभी चलो मैं तुम्हारी पसंद का खाना बनाई हूं चल कर खा लो".

     ऐसा कहते हुए स्वाति प्लेट लगाने लगी।

     स्वाति को प्लेट लगाता देख समीर बोला-

     "एक ही प्लेट लगाना मैं खाना खा कर आया हूं"।

     समीर के ऐसा कहते ही स्वाति के चेहरे पर उदासी छा गई और उसकी आंखों से झर झर आंसू बहने लगे। इधर बारिश भी थम चुकी थी,रात और भी अधिक गहरी, काली और पूरी तरह से शांत हो चुकी थी।

     समीर स्वाति की उदासी को भांपते हुए और उसके आंसुओं को पोंछते हुए बोला-

     "चलो आज तुम्हें मैं अपनी हाथों से खिलाता हूं"। 

     ऐसा कहते हुए समीर, स्वाति को चेयर में बिठा खाना खिलाते हुए कहने लगा-

     "मुझसे वादा करो आज के बाद तुम फिर कभी नहीं रोओगी किसी भी बात पर चाहे मैं तुम्हारे साथ रहूं या ना रहूं"।

     समीर के ऐसा कहते ही स्वाति, समीर से लिपट गई और दोनों एक दूसरे से बातें करते एक दूजे की बाहों में खो, निद्रा के आगोश में चले गए।

     सुबह करीब 4:30 बजे मोबाइल फोन के रिंग से स्वाति की नींद खुली। फोन रिसीव करने के पश्चात स्वाति आवाज लगाती हुई समीर को इधर उधर ढूंढने लगी परन्तु वह घर पर नहीं था।

     भागती हुई स्वाति पुलिस स्टेशन पहुंची क्योंकि फोन पुलिस स्टेशन से था। वहां पहुंचते ही स्वाति की आंखे खुली की खुली रह गई।वह कुछ कह पाती इससे पहले एक पुलिस अधिकारी स्वाति के समीप आकर बोला-

     "मैडम कल रात 11:00 बजे रोड एक्सीडेंट में समीर जी की मौत हो गई।इन के पास से हमें यह परिचय पत्र, आप का मोबाइल नंबर, डायमंड रिंग और यह फूलों का गुलदस्ता मिला"।

     स्वाति आश्चर्य से उस डायमंड रिंग और फूलों के गुलदस्ते को देखती रही तभी उसे याद आया,कल रात जब वह समीर से लिपटी तो उसने आश्चर्य भरे शब्दों में समीर से पूछा था-

     " तुम इतने बारिश में भीगे कैसे नहीं और तुम्हारे माथे पर ये चोट के निशान कैसे.."?

     तब समीर ने हंसते हुए कहा था-"माई डियर स्वीटहार्ट यह बारिश मुझे क्या भिगाएगी ? और यह चोट मुझे कभी दर्द नहीं दे सकते।

     स्वाति बुत की तरह खड़ी सोच रही थी तो क्या कल रात उसके साथ समीर नहीं उसकी रूह थी!

यह भी पढ़ें -प्रेम की दीवार - गृहलक्ष्मी कहानियां

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