सिजेरियन से बनी हैं मां तो टांकों को पकने नहीं देंगी ये सावधानियां

Chayanika Nigam

13th July 2021

सिजेरियन के बाद टांकों का ठीक होना एक लंबी प्रक्रिया होती है। लेकिन थोड़ी दी सावधानी से ये प्रक्रिया आसान जरूर हो सकती है।

सिजेरियन से बनी हैं मां तो टांकों को पकने नहीं देंगी ये सावधानियां

नॉर्मल या सी सेक्शन डिलिवरीशायद आप कहेंगी सी सेक्शन डिलिवरी,इसके साथ बिना लेबर पेन के ही आप मां बन सकती हैं। लेकिन आपकी बात पूरी तरह सही नहीं है। सी सेक्शन डिलिवरी में ज्यादा दिक्कतें होती हैं और इनका ख्याल रखने की जरूरत भी ज्यादा होती है। दरअसल सिजेरियन  के बाद नई माओं को एक लंबी लड़ाई लड़नी होती है। उनको अंदरूनी दिक्कतें तो हो ही जाती हैं लेकिन साथ में टांकों के पक जाने की परेशानी भी अक्सर महिलाएं सहन करती हैं। शुरुआती द्दीनोन में तो उठने-बैठने की भी दिक्कत का सामना भी मां करती है। लेकिन कुछ सावधानियां बरत कर सिजेरियन के बाद भी कम से कम टांके से जुड़ी कोई दिक्कते नहीं होती है।इस तरह से मां के लिए ये अनुभव दर्दभरा नहीं बल्कि यादगार भी बन जाएगा-

 

हायजीन का मामला-

टांके ठीक से सूख जाएं इसके लिए उन्हें साफ रखना भी जरूरी है। सफाई न होने पर इनमें इन्फेक्शन भी हो सकता है। इसलिए टांके वाली जगह पर नमी ना रहने दें और बैंडेज भी रोज बदलें। आप चिकित्सक से भी सलाह ले सकती हैं।

सिकाई करेगी कमाल-

बर्फ की सिकाई से टांकों के आसपास होने वाली सूजन और दर्द से छुटकारा मिल सकता है। इसलिए दिन में कम से कम एक बार बर्फ से सिकाई जरूर करें।

उठते बैठते रखें ध्यान-

टांकें लगने के बाद उठते बैठते समय इनका बहुत ध्यान रखना होता है। क्योंकि इनके साथ एक खास स्थिति में ही आराम मिलता है। उससे इतर पोजीशन होने पर टांकों पर दबाव पड़ने लगता है।

क्रीम सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर-

कई बार महिलाएं अपने मन से ही टांकों पर कोई भी क्रीम लगा लेती हैं लेकिन ये सही नहीं है। आपको किसी भी तरह के कॉस्मेटिक का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना है। क्योंकि अपनी मर्जी से लगाए प्रोडक्टस में कुछ हानिकारक केमिकल हो सकते हैं। जिनकी वजह से संक्रमण भी हो सकता है।

पोषण वाला खाना-

डिलिवरी के बाद पोषण वाला खाना भी अहम भूमिका निभाता है। फीड कराने वाली मां को एक दिन में कम से कम 500 कैलोरी का पोषण लेना ही चाहिए। जरूरी विटामिन और खनिज मां को जरूर मिलने चाहिए। कम वजन वाली मांओं को तो और ज्याद पोषण तत्वों की जरूरत होती है। आपको कुछ खास चीजों का सेवन करना ही होगा,जैसे-

  • विटामिन बी,विटामिन डी,प्रोटीन और कैल्शियम के लिए दूध,पनीर को खाने में शामिल करें।
  • आयरन और कैल्शियम से भरपूर रागी भी आपकी मदद ही करेगी। लैक्टोसइंटोलरेंसहै तो रागी आपकी पूरी मदद करेगी।
  • हरी पत्तेदार सब्जियां इस दौरान काफी पोषण देती हैं।
  • कमर और जोड़ों में दर्द की दिक्कत भी डिलिवरी के बाद आम बात है। इसके लिए मेथीदाना काफी कारगर होगा।
  • एंटी इंफलामेट्रीगुणों के कारण हल्दी को खाने में ज्यादा से ज्यादा शामिल करें इससे टांकों को जल्दी ठीक होने में आसानी होगी।
  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्‍सऔर कोल्ड ड्रिंक्स से भी दूरी बनाएं।

कब्ज न हो-

डिलिवरी के बाद अगर आपको अक्सर कब्ज रहता है तो टांकों पर इसका गलत असर पड़ सकता है।इसलिए जरूरी है कि खाने में वो चीजें शामिल करें,जिनसे कब्ज बिलकुल न हो। खाने में फाइबर से भरपूर भोजन खाना कब्ज से दूरी बना सकता है।अजवाइनभी कब्ज होने से बचाता है।पत्ता गोभी,फूलगोभी,ब्रोकली और भिंडीआदि से भी गैस हो सकती है,इसे बिलकुल ना खाएं।

छह हफ्ते लगेंगे-

जानकारों की मानें तो सिजेरियन होने के छह हफ्तों बाद तक टांकें पूरी तरह ठीक हो पाते हैं। इस पूरे समय में आपको सावधान रहना होता है ताकि टांकें अपने समय में ठीक हो सकें। इस दौरान शरीर को पूरा आराम दें,कुछ भारी न उठाएं।

ऊतक बनेंगे,घाव भरेंगे-

टांकें सही होने के लिए ऊतक बनने की जरूरत होती है। जिसको अच्छे पोषण के साथ जल्द ठीक किया जा सकता है। इसलिए इस दौरान सिर्फ हेल्थी खाना ही खाएं।

मालिश नहीं-

सामान्य डिलिवरी में अक्सर महिलाओं की मालिश की जाती है। लेकिन सिजेरियन के बाद ऐसा बिलकुल ना करें। 45 दिनों तक पेट और कमर की मालिश से बचें। इस तरह से टांकों पर पड़ने वाले दबाव से बचा जा सकता है। लेकिन हां,बाकी शरीर की मालिश हल्के हाथों से की जा सकती है। इससे आपको थोड़ा आराम महसूस होगा।

याद रखिए-

भले ही लोग मानते हों कि सामान्य डिलिवरी ज्यादा दुख-दर्द देती है। लेकिन असल में जानकारों की मानें तो सिजेरियन से मां बनने ले बाद आपको ज्यादा दिक्कत का सामना करना होता है। इसमें डिलिवरी के बाद ज्यादा दिक्कतें होती हैं। जबकि सामान्य डिलिवरी के दौरान ज्यादा दिक्कतें होती हैं। इसलिए सिजेरियन के बाद उबरने में काफी समय अलग जाता है। इस दौरान आपको खुद का ख्याल तो रखना ही होता है अपने मानसिक स्वास्थ्य को भी इस दौरान ठीक रखना होता है। खुद को ये समझाना होता है कि ये दौर निकल जाएगा। क्योंकि मन से निराश हो गए तो शरीर से ठीक होने थोड़ा कठिन हो जाता है।

 

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