मानसिक सेहत से संबंधित समस्या को ना ओढ़ें समझे और सुलझाएं

मोनिका अग्रवाल

6th July 2021

आजकल हर कोई तनाव से ग्रसित है। लेकिन तनाव इमोशनली यानि कि भावात्मक है तो वो सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इससे निपटने के लिए आपको कुछ खास टिप्स फॉलो करनी होगी।

मानसिक सेहत से संबंधित समस्या को ना ओढ़ें समझे और सुलझाएं

मानसिक सेहत से संबंधित समस्या को ना ओढ़ें

चिंता, भय, अवसाद, क्रोध और उदासी सभी सामान्य, स्वस्थ भावनाएँ हैं, जब तक कि वे उन चीज़ों को करने की आपकी क्षमता में हस्तक्षेप न करें,जो आप चाहते हैं या करने की आवश्यकता है। कई प्रबंधन तकनीकें हैं जो आपके भावनात्मक तनाव से निपटने में आपकी मदद कर सकती हैं। यदि आपने कुछ उपायों की कोशिश की है और अभी भी अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक से सहायता लें।

भावनात्मक तनाव के चेतावनी संकेत और लक्षण क्या हैं?

भावनात्मक तनाव के लक्षण शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक दोनों हो सकते हैं।

शारीरिक लक्षणों में शामिल हैं:

  • आपकी छाती में भारीपन, हृदय गति में वृद्धि या सीने में दर्द।
  • कंधे, गर्दन या पीठ दर्द; सामान्य शरीर में दर्द और दर्द।
  • सिरदर्द।
  • अपने दाँत पीसना या अपने जबड़े को बंद करना।
  • सांस लेने में कठिनाई।
  • चक्कर आना।
  • थका हुआ, चिंतित, उदास महसूस करना।
  • वजन कम करना या बढ़ना; आपके खाने की आदतों में बदलाव।
  • सामान्य से कम या ज्यादा सोना।
  • पेट खराब, दस्त या कब्ज सहित गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं।
  • यौन कठिनाइयाँ।

मानसिक या व्यवहार संबंधी लक्षणों में शामिल हैं:

  • सामान्य से अधिक भावुक होना।
  • अभिभूत या किनारे पर महसूस करना।
  • चीजों पर नज़र रखने या याद रखने में परेशानी।
  • निर्णय लेने में परेशानी, समस्याओं को हल करना, ध्यान केंद्रित करना, अपना काम करना।
  • अपने भावनात्मक तनाव को दूर करने के लिए शराब या ड्रग्स का उपयोग करना

भावनात्मक तनाव से बेहतर तरीके से कैसे निपटें 

ऐसी कई तकनीकें हैं जिनकी मदद से आप अपने भावनात्मक तनाव को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं। जैसे

आराम करने के लिए कुछ समय निकालें: अपना ख्याल रखने के लिए कुछ समय निकालें। यहां तक ​​कि अगर आप दिन में केवल पांच से 15 मिनट आराम करने के लिए निकाल सकते हैं, तो भी आप एक ब्रेक लें। 

कौन सी गतिविधि आपको आराम करने में मदद करती है

  • एक किताब पढ़ें।
  • अपने कंप्यूटर या फोन पर प्रकृति की आवाज़ या बारिश की आवाज डाउनलोड करें और सुनें।
  • टहलें। योग का अभ्यास करें।
  • संगीत सुनें, गीत के साथ गाएं या संगीत पर नृत्य करें।
  • सुखदायक स्नान का आनंद लें।
  • आंखें बंद करके मौन में बैठें।
  • सुगंधित मोमबत्ती जलाएं।

माइंडफुलनेस का अभ्यास करें:माइंडफुलनेस से सीखें  कि कैसे अपना ध्यान केंद्रित करें और अधिक जागरूक बनें। 

आप अपने शरीर में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को महसूस करना सीख सकते हैं जो आपकी बदलती भावनाओं की वजह से होते हैं। इस मन-शरीर के संबंध को समझना आपके तनाव को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने का पहला कदम है और भावनाएं आपके शरीर को कैसे प्रभावित करती हैं इसको समझें। माइंडफुलनेस आपको अपने दिमाग को तुरंत केंद्रित करने में भी मदद कर सकती है। यदि आप यह पता लगा सकते हैं कि उस पल में आपको अधिक शांत और आराम महसूस करने में क्या मदद मिलती है, तो आप जानते हैं कि आपने अपने तनाव को ट्रिगर करने वाले कारणों में से एक का पता लगा लिया है और इसे प्रबंधित कर सकते हैं।

इमोशनल यानि की भावात्मक तनाव 

आज के समय में काफी लोग इमोशनल यानि की भावात्मक तनाव से जूझ रहे हैं। ये काफी दर्दभरा हो सकता है। इससे निपटना आसान नहीं है। इसी की वजह से कई और अन्य तनाव भी जन्म लेने लगते हैं। अगर समय पर इससे छुटकारा पाने के बारे में नहीं सोचा गया तो जानलेवा हो सकता है। इसके समाधान के बारे में आप अपने करीबी से चर्चा कर सकते हैं। देखा जाए तो आजकल अफवाह आपके इमोशनल तनाव को बढ़ा भी सकती है। इसलिए आपको इस तरह के तनाव से कैसे निपटना है तो एक हेल्दी रणनीति बनानी होगी। आप खुद को अफवाह से दूर रखे।

मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक बीमारी एक ही चीज नहीं हैं।रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, मानसिक बीमारी "ऐसी स्थितियाँ हैं जो किसी व्यक्ति की सोच, भावना, मनोदशा या व्यवहार को प्रभावित करती हैं।" इनमें शामिल हो सकते हैं लेकिन अवसाद, चिंता, द्विध्रुवी विकार या सिज़ोफ्रेनिया तक सीमित नहीं हैं।मानसिक स्वास्थ्य "हमारी भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक भलाई" को दर्शाता है। "हम कैसे सोचते हैं, महसूस करते हैं और कार्य करते हैं" को प्रभावित करते हुए, मानसिक स्वास्थ्य का दूसरों के साथ बातचीत करने, समस्याओं को संभालने और निर्णय लेने के तरीके पर एक मजबूत प्रभाव पड़ता है।

इमोशनल तनाव के कारण-इस तरह का तनाव रिश्ते के साथ साथ जीवन में काफी असर डालता है। जिससे स्थिति बद से बदतर हो जाती है। इसके क्या कुछ कारण हो सकते हैं, आइये जानते हैं।

  • एक अच्छा रिश्ता, अच्छा समय ला सकता है। आप जितने ही तनाव में क्यों ना हो, आप उससे निकल ही जाएंगे। लेकिन रिश्ते में लचीलापन नहीं हुआ तो आप इमोशनली टूट जाएँगे। जिससे शरीर को नुकसान भी पहुंच सकता है।
  • रिश्ते की वजह से इमोशनली तनाव होना एक मात्र कारण नहीं है। कभी कभी फाईनेंशियल समस्या, काम की तेंश्हं य्यर और भी कई तरह के कारण होते हैं। जिससे परिस्थितियां और भी खराब होने लगती हैं।
  • इमोशनली तनाव से निपटना चुनौती से भरा हो सकता है। इसमें कई पहलुओं में से स्थितियों को बदल सकती हैं। क्योंकि बढ़ता तनाव आपको तोड़ सकता है।

इमोशनली तनाव से कैसे निपटें?- जब आप अपने तनाव को लाख कोशिश करने के बाद भी कम नहीं कर पाते तो आपके पास सिर्फ एक ही रास्ता बचता है। वो है खुद की मदद। जी हां आप खुद इससे निपटने के लिए काफी हैं। वो कैसे चलिए जानते हैं।

माइंडफुलनेस करेगा मदद- हम जब भी इमोशनली तनाव महसूस करते हैं, तो शरीर में दर्द होना भी लाजमी है। इससे छाती में भारी पन भी होने लगता है। आप खुद को बेचैन महसूस कर सकते हैं। आप माइंडफुलनेस की मदद से खुद को इससे दूर रख सकते हैं माइंडफुलनेस इससे आप बेहतर महसूस करेंगे।

खुद की भावनाओं को समझें-  अगर आप अपनी भावनाओं को किसी से भी व्यक्त नहीं करते तो आपके पास कई तरीके हैं। आप अपनी भावनाओं को पहले अच्छे से समझें, कि आखिर आप चाहते क्या हैं। अगर आप ऐसा नहीं करते तो समस्या आपके लिए बढ़ सकती है।

‘ध्यान' करने में लगाएं ध्यान-तनाव किसी भी तरह का क्यों ना हो, ध्यान हर मर्ज की दवा है। इमोशनली तनाव से निकलने में भी आपकी ये अच्छी मदद करेगा। आप किसी जानकार की  मदद ले सकते हैं। ध्यान करने से आप दिमाग में चल रही अफवाहों को शांत कर पाएंगे। इससे अच्छे विचार दिमाग में चलेंगे। 

थेरेपिस्ट की मदद आएगी काम- अगर आपको लगता है कि इमोशनल तनाव का स्तर सिन पर दिन बढ़ रहा है तो, ये आपके लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसी में आपकी मदद एक अच्छा और अनुभव थेरेपिस्ट ही कर सकता है। वो आपका इमोशनल तनाव कम सकता है। जिससे आप खुद को बेतर महसूस कर पाएंगे। 

तनाव किसी की भी सेहत के लिए अच्छा नहीं होता। फिर वो इमोशनली हो या कोई और। आप भी खुद को इमोशनली तनाव से ग्रसित समझते हैं, और उसे कम नहीं कर पा रहे तो हमारा ये लेख आपकी काफी मदद करेगा। आप इसके साथ एक अच्छे थेरेपिस्ट से सलाह भी ले सकते हैं।

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