कैसे बढ़ता है भावात्मक अनाचार

मोनिका अग्रवाल

7th July 2021

माता पिता का अपने बच्चे के साथ रिश्ता काफी अटूट होता है, ये रिश्ता ताउम्र एक जैसा नहीं रहता। कभी माता पिता की तरफ से तो कभी बच्चों की तरफ से कुछ न कुछ ऐसा हो ही जाता है, जिससे भावनाओं को ठेस पहुंचती है।

कैसे बढ़ता है भावात्मक अनाचार

कैसे बढ़ता है भावात्मक अनाचार

कोई भी पेरेंट्स हो, वो सबसे ज्यादा करीब अपने बच्चे के रहना चाहते हैं। एक अच्छा रिश्ता तभी कायम रह सकता है जब माता-पिता अपने रिश्तों को मजबूत रखने के लिए बच्चों की भावात्मक जरूरतों का ख्याल रखते हैं। लेकिन जैसे जैसे जैसे बच्चे बड़े होते हैं, माता-पिता से उनका भावात्मक रिश्ता मानों खत्म सा होने लगता है। उनका बचपन भी उनसे दूर हो जाता है। जब माता पिता ए बच्चों का भावात्मक रिश्ता खत्म हो जाता हो जाता है तो बच्चा टूटने की कगार पर आ जाता है। जब बच्चा बड़ा होता है, उसके जीवन में कई ऐसी चीजें होती हैं, जिनके चलते वो खुद को अकेला महसूस करने लगता है। हालांकि कभी कभी माता पिता ना चाहते हुए भी अपने बच्चों को चोट पहुंचा देते हैं। वजह और इरादा कोई भी हो, लेकिन प्रभाव काफी गहरा होता है।

कैसे बढ़ता है भावात्मक अनाचार- काफी बच्चे हैं जो भावात्मक अनाचार की स्थिति का सामना करते हैं। इससे उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा कहने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे वो अपनी कामुकता के साथ यौन परिवर्तनों को भी साझा नहीं कर पाते। बात भावात्मक अनाचार की करें तो भावात्मक अनाचार पैरेंट्स के प्रति वफादारी और अपने दायित्वों के बीमार कर सकते हैं। जिससे माता पिता से बच्चों का रिश्ता कमजोर होने लगता है, और नफरत बढ़ सकती है। और यही वो वजह जिससे बच्चे गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं।

समझें अपना दायित्व- जितना बच्चों को माता पिता को समझने की जरूरत है, उतना ही माता पिता को भी अपने बच्चों को समझने की जरूरत है। जिससे रिश्ते में मजबूती रहे। बच्चें अकेलेपन में कहीं गलत रास्ते का चुनाव ना कर लें। इसकी जिम्मेदारी पैरेंट्स की है ताकि उनका रिश्ता अच्छा बना रहे।

क्या करें-भावात्मक अनाचार का अनुभव काफी बच्चे करते हैं, इसके उपचार के लिए कई तरीके भी हैं। जिनकी मदद से इससे निकलना सम्भव है। चलिए जानते हैं इनके उपचारों के बारे में भी।

सलाह और थेरेपी- जब आपका बच्चा इन परिस्थियों से जूझ रहा हो तो, आप एक सलाहकार की मदद लें, जो बच्चों में उनके व्यवहार को समझने में एक्सपर्ट हो। जो आपके बच्चों की जरूरत को पहचान सके।

सेल्फ हेल्प मीटिंग आएगी काम- सेल्फ हेल्प मीटिंग आपका अच्छा साथ दे सकती हैं। लेकिन इसका हिस्सा बनने से पहले इसकी पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। आप इस बात को समझने कि जरूरत है कि बच्चा आखिर किस बात का सामना कर रहा है। अगर आप एक बार इस बात को अच्छे से समझ गये, तो सेल्फ हेल्प मीटिंग से बेहतर आपकी अच्छी माद कोई और कर ही नहीं सकता।

मनोशिक्षा- इस विषय में लिखना काफी मुश्किल हो सकता है। लेकिन ऐसी जानकारी को उपलब्ध करने में आपको मदद मिलती है। मनोशिक्षा की मदद से आपको लाइफ और रिश्तों में पड़ रहे प्रभाव को अच्छे से समझ सकते हैं। और आप इससे अपनी समस्या को हीलिंग भी कर सकते हैं।

रिश्तों में समझ, समर्पण और उसके प्रति भागीदारी होनी बेहद जरूरी है। क्योंकि कभी कभी बच्चों से माता पिता का रिश्ता काफी गहरा होता है। इस गहराई और प्यार के बीच भावात्मक अनाचार ना आ पाए इसका खयला भी खुद रखना होगा।

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