ईशान कोण की उपयोगिता

कलीम आनंद

16th July 2021

वास्तुशास्त्र में चार दिशाओं-पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण के साथ-साथ चार कोणों-ईशान (उत्तर-पूर्व), आग्नेय (पूर्व-दक्षिण), नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) तथा वायव्य (पश्चिम-उत्तर) का भी काफी महत्त्व है।

ईशान कोण की उपयोगिता

इन कोणों में ईशान को अत्यंत लाभदायक माना गया है। यदि इस कोण में किसी प्रकार की त्रुटि न हो तो जीवन में सदैव सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। इस क्षेत्र में पूजाघर बनाने से ईश्वर की अनुकंपा प्राप्त होती रहती है। अत: ईशान कोण के विषय में पर्याप्त जानकारी होना अनिवार्य है-

  • ईशान कोण को गंदा नहीं रखना चाहिए। अत: यहां शौचालय या स्नानाघर आदि कदापि न बनवाएं।
  • ईशान कोण का स्थान सबसे नीचा होना चाहिए। यहां बिजली का खंभा या पेड़ आदि नहीं लगाना चाहिए।
  • ईशान कोण को सदैव खुला रखना चाहिए ताकि सूर्य की अधिकतम ऊर्जा हमारे भवन में प्रवेश कर सके।
  • ईशान कोण से निकाला गया जल अत्यंत पवित्र माना गया है। यदि यहां हैंडपाइप आदि लगवाया जाए तो बहुत शुभ फलदायक होता है।
  • यदि आप फ्लैट में रहते हों तो अपने घर में जल की व्यवस्था इसी स्थान पर करें।
  • ईशान कोण की ओर मुंह करके पूजा नहीं करनी चाहिए। पूजा सदैव पूर्व की ओर मुख करके करना लाभदायक होता है।
  • ईशान कोण में सीढ़ियां या चबूतरा नहीं बनवाना चाहिए। यहां तुलसी का पौधा किसी गमले में लगाकर रख सकते हैं।
  • ईशान कोण को कभी बंद नहीं रखना चाहिए। यहां पर पूजाघर के अलावा अध्ययन कक्ष और बैठक कक्ष बनवाया जा सकता है।
  • किसी विवाहित व्यक्ति का शयनकक्ष ईशान कोण में कदापि नहीं बनवाना चाहिए।
  • ईशान कोण में रसोईघर का निर्माण भी नहीं करना चाहिए। इससे अनेक प्रकार के संकट उत्पन्न होते हैं।
  • दुकान या व्यवसाय स्थल का ईशान कोण भी स्वच्छ एवं पवित्र होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो व्यवसाय आदि में रुकावट आती है।
  • ईशान कोण को सबसे ऊंचा नहीं रखना चाहिए। यदि इसे सबसे ऊंचा रखा जाता है तो सुख-समृद्धि का नाश होता है।
  • ईशान कोण में बड़ा हाल या बरामदा होने से काफी शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
  • ईशान कोण में पश्चिमी द्वार की अपेक्षा पूर्वी द्वार ऊंचाई पर नहीं होना चाहिए।
  • ईशान कोण में उत्तर और पूर्व दिशा जुड़ी नहीं होनी चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों का जीवन नीरस बन जाता है।
  • चहारदीवारी की ईशान दिशा भले ही ठीक हो परंतु घर का ईशान कोण लुप्त नहीं होना चाहिए।
  • पूर्वी या उत्तरी दिशा का क्षेत्रफल घटाकर पूर्वी या उत्तरी सीमा पर भवन निर्माण नहीं करना चाहिए।
  • यदि ईशान ब्लॉक की चहारदीवारी के फाटक पूर्व या उत्तर दिशा में ऊंचे हों तो यह काफी हानिकारक होता है।
  • यदि ईशान कोण में पूर्व या उत्तर की ओर सड़कें मकान की अपेक्षा ऊंचाई पर हों तो परिवार के सदस्यों को शुभ परिणाम नहीं मिलते।
  • यदि ईशान की पूर्वी दिशा में स्थित सड़क घर के पास पश्चिम की ओर मुड़ी हो, उत्तर दिशा की सड़क पूर्वी दिशा की ओर सीधी न होकर दक्षिण की ओर मुड़ी हो या उस स्थान में पूर्व और उत्तर दिशा सटी हो तो भी बहुत अशुभ परिणाम मिलते हैं।
  • ईशान कोण में घर का कबाड़ रखने से भी अशुभ फल मिलता है। 

यह भी पढ़ें -धर्म एवं पूजा-पाठ के पीछे वैज्ञानिक कारण

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