मृत्यु का भय...

मृत्यु का भय - सद्गुरु

जाहिर है, कोई बीमारी नहीं चाहता। कोई भी रोगी होने का चुनाव नहीं करेगा, है कि नहीं? कोई भी बीमार पड़ना नहीं चाहता; हर व्यक्ति स्वस्थ...

काम का आचरण ...

काम का आचरण - आचार्य महाप्रज्ञ...

प्रशन आता है कि आदमी प्रिय-अप्रिय संवेदनों को कैसे कम करे? जीवन के ये दो तत्त्व हैं- प्रियता और अप्रियता। इनसे प्रत्येक व्यक्ति संदानित...

प्रकृति का स...

प्रकृति का स्वभाव - श्री श्री रविशंकर...

 साधारणतया हम एक दोष या त्रुटि से दूसरे दोष या त्रुटि की ओर गति कर जाते हैं। जैसे कोई लोभी है और उसके इस विकार के कारण तुम क्रोधित...

ध्यान और कर्...

ध्यान और कर्म का संतुलन - परमहंस...

सांसारिक जीवन से विशुद्ध शान्ति और आनन्द प्राह्रश्वत करने की आशा न रखें। यह आपकी नई प्रवृत्ति होनी चाहिए। चाहे आपके अनुभव कैसे भी क्यों...

धर्म जगत के ...

धर्म जगत के वैज्ञानिक हैं- पतंजलि...

पतंजलि दुर्लभ हैं। वे एक सम्बुद्ध व्यक्ति हैं जैसे बुद्ध, जैसे कृष्ण, जैसे क्राइस्ट, जैसे महावीर, मोहम्मद, जरथुश्त्र, परन्तु वे एक...

सत्य की ओर -...

सत्य की ओर - स्वामी चिन्मयानंद...

हमारे अनुभव में आने वाला यह संसार विभिन्न नाम-रूप-रस-स्पर्श-गंध का एक विशाल, विस्तृत संघात है। इन विषयों की सूचना ज्ञानेन्द्रियों के...

सतोगुणी होने...

सतोगुणी होने के लिए यत्न करना होगा...

मान लो रूमाल के तीन कोने हैं। रूमाल को हम तह इस तरह से लगाएं कि इसके तीन कोने दिखें। एक कोने को हम हाथ में पकड़ें तो बाकि के दो कोने...

जितने पर्याय...

जितने पर्याय हैं, वे सारे बदलते...

ध्यान के द्वारा चिन्तन में सृजनात्मक शक्ति का विकास होता है। उसका साधन बनता है- अनावेश। यह है आवेश का अभाव। चिन्तन का एक दोष है- संदेह।...

ईश्वर की सुन...

ईश्वर की सुन्दरता अपार है - परमहंस...

जहां भी आपका मन है, वहीं आप अपना समय बिताएंगे। यदि ईश्वर ने आपको खेलने, पढ़ने या कार्य करने की शक्ति न दी होती तो क्या होता? आप कुछ...

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जन-जन के प्र...

जन-जन के प्रिय तुलसीदास...

भगवान राम के नाम का ऐसा प्रताप है कि जिस व्यक्ति को...

भक्ति एवं शक...

भक्ति एवं शक्ति...

शास्त्रों में नागों के दो खास रूपों का उल्लेख मिलता...

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अभूतपूर्व दार्शनिक...

श्री अरविन्द एक महान दार्शनिक थे। उनका साहित्य, उनकी...

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जब मॉनसून में सताए...

मॉनसून आते ही हमें डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जैसी...

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