जब चीटों ने ...

जब चीटों ने दिखाया रास्ता

मैं बचपन से ही बेहद नटखट थी व खाने की बेहद शौकीन। एक दिन पिताजी आए, उनके हाथों में कई पैकेट व एक हाथ में बड़ा सा बर्तन था। पिताजी ने...

सिनेमा घर का...

सिनेमा घर का चक्कर

एक दिन देखा सुबह-सुबह इतवार के दिन खुशगवार दिन माताजी मुंह फुलाए बैठी थीं और पिताजी उन्हें मना रहे थे। मुझे समझ में आ गया कि वे फिल्म...

चूहा स्टोव ग...

चूहा स्टोव गिरा गया

बात उस समय की है, जब मेरी उम्र पांच साल रही होगी। मेरे पिताजी टूर पर बाहर गए हुए थे। गॢमयों का समय था, मेरी मम्मी स्टोव पर दूध रखकर...

मैं भी तेरी ...

मैं भी तेरी तरह थी

बचपन में यूं तो सभी बच्चे शरारतें करते ही हैं। बड़े होने पर उन शरारतों को याद करने पर खट्टी-मीठी यादें मन को गुदगुदा जाती हैं। बात तब...

बहुत शर्म आई

बहुत शर्म आई

जब मैं 5-6 साल की बच्ची थी तो अपनी कोई चीज संभाल कर नहीं रखती थी। अपना बैग, कपड़े, जूते सब इधर-उधर फेंक देती थी। चॉकलेट का रैपर हो या...

पापा मुझे फि...

पापा मुझे फिल्म देखने जाने दो

यह किस्सा उस समय का है जब मैं कक्षा 8वीं का विद्यार्थी हुआ करता था, चूंकि उस समय आठवीं कक्षा बोर्ड हुआ करती थी तो पढ़ाई का दबाव भी अधिक...

कुत्ता और इंसान

कुत्ता और इंसान

ङ्खक बार पापा का किसी काम से आगरा जाना हुआ पापा गए तो अकेले थे लेकिन जब शाम को वापस आये तो उनके साथ एक 18 या 19 साल का लड़का था।  पापा ने बताया कि ये दीपक चाचू हैं और आज से ये हम सब के साथ ही रहेंगे। दीपक चाचू रिश्ते में तो हमारे कुछ नहीं लगते थे लेकिन उनके पिता मेरे दादाजी के यहां नौकरी करते थे। बस इसी नाते पापा उनको अपने छोटे भाई की तरह मानते थे। पापा का उनको भाई मानना और अपने साथ घर ले आना, यहां तक तो सब ठीक था लेकिन असली गाज तब गिरी जब पापा ने मेरा बेड दीपक चाचू को दे दिया और मुझे मेरी बहन के साथ एडजस्ट होना पड़ा। बस उस दिन से दीपक चाचू का आना मुझे बहुत अखरने लगा। एक दिन दीपक चाचू को बुखार था। मम्मी ने मुझे पैसे देते हुए कहा कि जाओ दीपक को पास वाले क्लिनिक ले जाओ। मेरा जाने का बिलकुल मन नहीं था लेकिन मम्मी को मना करना भी मुश्किल था।...

टू एग्जाम पेपर

टू एग्जाम पेपर

वो अपनी सहेली जो बगल में थी उससे कहा, रिम्पी हमारे पास सैकेंड एग्जाम पेपर है। एक मैं टीचर को दे देती हूं। उसने कहा, नहीं-नहीं, प्रियांजली...

दूधो नहाओ पू...

दूधो नहाओ पूतो फलो

दूसरे दिन रविवार था। घर में मेहमान आए हुए थे। मम्मी ने कहा- बेटे आज अपने आप नहा लो। मैं तुरंत दौड़कर किचन में गई व दो लीटर दूध से नहा...

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रम जाइए 'कच्छ के...

गुजरात का कच्छ इन दिनों फिर चर्चा में है और यह चर्चा...

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