सशक्तीकरण - ...

सशक्तीकरण - गृहलक्ष्मी कहानियां...

संडे की सुबह, अभी बिस्तर में ही था कि डोरबेल बज उठी। 'कौन होगा इतनी सुबह?' मन में सोचा। घड़ी पर नजर डाली, 'अभी तो नौ भी नहीं बजे। ...

यही सच है - ...

यही सच है - गृहलक्ष्मी कहानियां...

एक क्षण मैं उन्हें देखती रहती हूँ, फिर निरुद्देश्य-सी कपड़ों की अलमारी खोलकर सरसरी-सी नज़र से कपड़े देखती हूँ। सब बिखरे पड़े हैं। इतनी...

जिजीविषा - ग...

जिजीविषा - गृहलक्ष्मी लघुकथा

'जंगली है, सो कैसे?' 'अरे तभी तो बिना देख भाल के इतनी तेजी से बढ़ रही है।' 'हरियाली तो यह भी फैला रही है और देखो इसके पत्ते भी...

गर्माहट - गृ...

गर्माहट - गृहलक्ष्मी लघुकथा

टीवी पर डेली सोप सास-बहू वाला सीरियल लग जाता। और स्टार प्लस की बहू जैसी बहू की कामना की जाती। रसोई घर में काम करती रश्मि सास-ननद की...

एक बूढ़े आदमी...

एक बूढ़े आदमी के खिलौने - गृहलक्ष्मी...

आ ज उस बूढ़े को याद करने से फायदा? मैं सोचता हूं। उसे गुजरे तो कोई साल-भर होने को आया। पिछली सर्दियों की बात थी। जाड़ा उस बरस भी खासा...

मैं हार गई -...

मैं हार गई - गृहलक्ष्मी कहानियां...

एक पिता अपने बेटे के भविष्य का अनुमान लगाने के लिए उसके कमरे में एक अभिनेत्री की तस्वीर, एक शराब की बोतल और एक प्रति गीता की रख देता...

बहू एक मजबूत...

बहू एक मजबूत स्तंभ

पिताजी बोले अवनी बहू मेरे घर का एक मजबूत स्तंभ है, जो हर परेशानी में मजबूती के साथ खड़ी रहती है। पिताजी ने अवनी को अपने पास बुलाया और...

स्त्री-सुबोध...

स्त्री-सुबोधिनी - गृहलक्ष्मी कहानियां...

मैं जानती हूँ कि अपने जीवन के निहायत ही निजी अनुभवों को यों सरेआम कहकर मैं खुद अपने लिए बहुत बड़ा खतरा मोल लूँगी। मेरे मात्र पाँच साल...

एक कमज़ोर लड...

एक कमज़ोर लड़की की कहानी - गृहलक्ष्मी...

आजकल कुछ बोलती नहीं हूँ तो इसका यह मतलब तो नहीं कि जिसकी जो मर्जी हो, वही करता चले।' वह मुट्ठियाँ भींच-भींचकर संकल्प करती रही और पिता...

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गृहलक्ष्मी गपशप

चित्त की महत...

चित्त की महत्ता...

श्री गुरुदेव की कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं। अध्यात्म...

तुम अपना भाग...

तुम अपना भाग्य फिर...

एक बार ऐसा हुआ कि पोप अमेरिका गए, वहां पर उनकी कई वचनबद्घताएं...

संपादक की पसंद

शांति के क्ष...

शांति के क्षण -...

मानसिक शांति के अत्यन्त सशक्त क्षण केवल दुर्बल खालीपन...

सुख खोजने की...

सुख खोजने की कला...

एक महिला बोली : मुनिश्री! मैं बड़ी दु:खी हूं। यों तो...

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