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स्माइल प्लीज

स्माइल प्लीज

एक शादी में धोखा खा चुकी मान्या अब ऐसे किसी झंझट में नहीं फंसना चाहती थी। जिंदगी ने उसके साथ ऐसा खेल खेला कि फिर एक बार वह उसी जंजाल...

सूनापन

सूनापन

कान उल्टे ढोलों की आवाज से सुन्न पड़ गए थे। वो ऑंखें हमेशा के लिए बंद हो चुकी थी। सारा दोष तो आखिर इन्हीं ऑंखों का था। अब खुली ऑंखों...

पितृविहीना

पितृविहीना

एक सुबह खबर आई कि दीदी का एक्सीडेंट हो गया। मैं स्तब्ध रह गयी। लगा कि काश मेरे पास पंख होते तो उड़कर दिल्ली से जौनपुर चली जाती...

मुंशी प्रेमच...

मुंशी प्रेमचंद की 'प्रेरणा'

एक शिक्षक और उसके शिष्य के अपने- अपने अनुभव की कहानी है 'प्रेरणा'। पढ़िए-

जज़्बा

जज़्बा

राधिका को क्या पता था कि एक दिन यह नौबत आ जाएगी। जिस बेटी को पद्मा ने बोझ मानकर पैदा होते ही त्याग दिया था, आज एक मुकाम पर पहुंच चुकी...

दादी की दीदी...

दादी की दीदीनुमा हसरत और हरकत

अरे एक दिन तो हद ही हो गई। सासू मां मेरी चेहरे पर लगाने वाली महंगी क्रीम मजे से बड़ी मात्रा में पैरों में लगा रही थीं। मुझे देखते हुए...

बस, अब और नहीं

बस, अब और नहीं

नटखट और चुलबुली तश्शू कैसे एक राजनेता बनी और कैसे उसने निर्णय लिया अपने पति से अलग होने का... पेश है, भावनाओं के सूत्र में पिरोई गई...

श्रीमती जी क...

श्रीमती जी की नाराजगी

समाज से बहिष्कृत लेखक नामक इस प्राणी को इस स्थान से अधिक सकून और कहां मिल सकता है। नैतिकता के बोझ तले दबा यह प्राणी एकांतवासी न हो...

पाप का ताप

पाप का ताप

शिवानी के प्रति गजेन्द्र सिन्हा का व्यवहार जरूरत से ज्यादा उदार रहता था। वह न सिर्फ शिवानी की हर बात मान लेता था अपितु उसकी तरफदारी...