जीने का यही ...

जीने का यही तरीका है अब - गृहलक्ष्मी...

तन से दूर थे ही मन से मन की भी दूरी हैै बेटों को कमाना जरूरी है परिवार चलाना जरूरी है वे भी जानते हैं उनके बेटे पढ़-लिखकर...

'गर साथ तुम्...

'गर साथ तुम्हारा मिल जाता' - गृहलक्ष्मी...

रुई के फाहे से गिरते हिम के टुकड़े, मेरे मन को करते विह्वल आंखो से बहते निर्झर, बन के पानी ये पिघल-पिघल बिसरी यादों की कुछ कड़ियां,...

नारी -  गृहल...

नारी - गृहलक्ष्मी कविता

किसी किताब के पन्नों में लिखा था नारी को देवी का रूप कहा था पर आज नारी को कोई देवी  नहीं मानता उसे खुलेआम बदनाम करने से...

खालीपन - गृह...

खालीपन - गृहलक्ष्मी कविता

एक अजीब सी बात हो गई, कुछ अलग सी बात हो गई। यूं तन्हा से जब कर गए, तो जिंदगी वीरान सी हो गई। मेरे ख्यालों को कर गए खाली,...

मेरा कसूर क्...

मेरा कसूर क्या था? - गृहलक्ष्मी...

नवजीवन के स्वप्न आंखों में संजोये अर्जुन की नववधू बन तेरे द्वार पे आई बांट दिया अज्ञानवश मुझको पांचों पांडवो में और जीवन पर्यन्त...

हिंदी पखवाड़...

हिंदी पखवाड़ा मनाना मजबूरी या मोहब्बत...

14 सिम्बर का महीना आते ही साहित्य के गलियारे में सुगबुगाहट तेज हो जाती है, कथित लेखक और बुद्धिजीवी कहलाने वाले लोगों में हिंदी पखवाडा़...

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गृहलक्ष्मी गपशप

जन-जन के प्र...

जन-जन के प्रिय तुलसीदास...

भगवान राम के नाम का ऐसा प्रताप है कि जिस व्यक्ति को...

भक्ति एवं शक...

भक्ति एवं शक्ति...

शास्त्रों में नागों के दो खास रूपों का उल्लेख मिलता...

संपादक की पसंद

अभूतपूर्व दा...

अभूतपूर्व दार्शनिक...

श्री अरविन्द एक महान दार्शनिक थे। उनका साहित्य, उनकी...

जब मॉनसून मे...

जब मॉनसून में सताए...

मॉनसून आते ही हमें डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जैसी...

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