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13 टिप्स न्यू मॉम से सुपर मॉम बनने के

सुचिता माहेश्वरी

19th August 2015

हर नयी माँ अपने नवजात की देखभाल को लेकर बहुत चिंतित रहती है। नवजात शिशु की देखभाल करना उतना ही आसान है जितना कि उसे प्यार करना। बस जरूरत है तो बिना घबराए नए शिशु के साथ अपनी दिनचर्या,अपने काम-काज,अपनी जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बनाने की।

13 टिप्स न्यू मॉम से सुपर मॉम बनने के

 माँ बनना जीवन की एक स्वर्णिम अनुभूति है जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। बच्चें का पहला कोमल स्पर्श मानो इस एक पल को महसूस करने के लिए लिए हम जी रहे थे।हर नयी माँ अपने नवजात की देखभाल को लेकर बहुत चिंतित रहती है। नवजात शिशु की देखभाल करना उतना ही आसान है जितना कि उसे प्यार करना। बस जरूरत है तो बिना घबराए नए शिशु के साथ अपनी दिनचर्या,अपने काम-काज,अपनी जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बनाने की। फिर देखिये चाहे आप गृहणी हो या कामकाजी दोनों ही सूरतो में बड़ी आसानी से अपने बच्चे के साथ सारे काम कर पाएंगी।

दैनिक कामकाज और नवजात शिशु की देखभाल में कैसे संतुलन करें उसके लिए हम आपको बता रहे है कुछ टिप्स -
1- सबसे पहले अपने बच्चें के सोने और जागने का समय सुनिश्चित करे। इससे वह हर रोज़ एक ही समय पर सोने लगेगा । रोज़ एक ही समय पर सोने -जागने से उसे आदत पद जाएगी और आपके तय समय पर जगाने से चिड़चिड़ा महसूस नहीं करेगा।

2- पॉटी ट्रेनिंग देना भी बहुत जरूरी है, बच्चे को जब भी बाथरूम ले जाये उसे बताये कि आप उसे कहां ले जा रही है। सुबह उठने के बाद उसे पॉटी ट्रेनिंग जरूर दें. सुबह से शाम में हर 1 घंटे में उसे बाथरूम ले जाये, इससे उसे समझ आने लगेगा और आपका बार -बार साफ़-सफाई में समय व्यर्थ नहीं होगा।

3- 5 माह से अधिक के शिशु को उठते ही गुनगुना पानी पिलाये चाहे तो उसमे 10 बूंदे जन्म घुट्टी की मिलाकर भी दे सकती हैं, इससे उसका पेट साफ़ रहेगा। 5 माह से कम के शिशु को सबसे पहले अपना दूध ही पिलाये,पेट साफ़ रहे इसके लिए उसे आप 4 बूंदे जन्म घुट्टी की दे सकती है। ऐसा करने से आपके बच्चे की पाचन -शक्ति बढ़ेगी और बड़ा होने पर कुछ खाने से उसे बदहज़मी या मोशन नहीं होंगे। 

4- छोटे शिशुओं को ग्राइप वाटर ना दे उनके लिए यह सुरक्षित नहीं होता। उसकी जगह सादा पानी या ओ आर एस का पानी पिला सकते है। पेट की तकलीफ होने पर उनकी सूंडी पैर हींग का पेस्ट बनाकर लगा दें। गैस,पेट दर्द होने पर इससे उन्हें बहुत आराम मिलेगा।

5- जब भी आप अपने शिशु को खिलाना शुरू करें तो पहले देखें कि वह कितना खाना चाह रहा है उस पर नज़र रखें।उस पर खाने के लिए दबाव न बनाये,सही मात्रा में खिलाने के लिए उसका एक बर्तन अलग रखें और फिर उसी अनुपात में उसे खिलायें। इससे वह आपको खाने में तंग नहीं करेगा और आपको उसके पीछे नहीं भागना पड़ेगा और आपका काम भी निपट जायेगा।

6- छोटे बच्चे को न तो बहुत सुबह निहलाएं न ही देर से। उनके हर कार्य का समय तय कर दें। उसे नहाने ले जाने से पूर्व रोज़ बोले की अब हम शावर लेंगे और टब में थोड़ा सा पानी भर कर उसमे उनके हाथ-पाँव डुबाकर पानी के स्पर्श से परिचित करवायें। इससे आपका शिशु पानी ने नहीं डरेगा और मस्त होकर नहा लेगा। आपकी परेशानी भी कम होगी।

7- छोटे बच्चों की मालिश बहुत जरूरी है कम से कम एक वर्ष का होने तक नवजात शिशुओं की मालिश की जानी चाहिए।कोशिश करें कि मालिश सुबह-शाम दो बार ही करें.सुबह मालिश करके वह सो जायेगा और उतनी देर में आप अपना दैनिक कार्य सकती है. अगर आप कामकाजी महिला है तो रात में भी मालिश कर सकती है। इससे बच्चा जल्दी सो जायेगा और आप भी सही समय पर सो सकेंगी। 

8- ध्यान रखे कि ओलिव ऑयल और लाल तेल से सिर्फ सर्दियों में ही मालिश करे ये बहुत गर्म करते है। अगर अपने इनका उपयोग मई-जून के महीने में पैदा हुए बच्चो के लिए किया तो उन्हें लाल दाने ,रैशेज़ ,फुंसी आदि हो सकते है। लाल तेल से पैरो और कमर की मालिश करने से हड्डिया मजबूत होती है पर ठन्डे मौसम में ही इसका उपयोग करे। मालिश करने के तुरंत बाद बच्चें को कभी ना निहलाएं ,कम से कम एक घंटे के अंतराल पर निहलाएं।

9- छोटे शिशुओ का शरीर एक मिटटी की तरह होता है उसे जिस साँचे में हम ढा़ले वह ढ़ल जाता है। इसीलिए ध्यान रखें कि नवजात के सर के नीचे हमेशा राई वाला गोल तकिया ही लगायें ताकि सर गोल रह सके। अगर लड़का है तो उसे सीधा सुलायें, यदि शिशु लड़की है तो उसे हमेशा करवट में सुलायें।एक सही मुद्रा में सोने से वे आपको तंग नहीं करेंगें और देर तक सोयेंगें।

10- नवजात की त्वचा बहुत ही नाजुक होती है इसीलिए उस पर किसी भी साबुन-शैम्पू का प्रयोग न करें।नवजात शिशु को हमेशा कच्चे दूध ,दही से ही निहलायें। इससे उनकी त्वचा की कोमलता बनी रहेगी और किसी तरह का इन्फेक्शन भी नहीं होगा। 

11- उबटन के लिए आप दही, बेसन, चन्दन पाउडर, हल्दी का पेस्ट बनाये। इससे जन्म पर रहने वाले बाल भी हट जायेंगे और त्वचा भी साफ़ रहेगी। बच्चों की देखभाल को एक बढे हुए काम के बोझ की तरह न लें। संयम रखे और खुद से कहे कि आप सब कर लेंगी आखिर आप है आज की सुपर मॉम।

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