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दुल्हन और लाल रंग

ऋचा कुलश्रेष्ठ

27th November 2015

हिंदू धर्म में शादी और दुल्हन का जो संबंध है वही शादी और लाल रंग का भी है। इस नज़रिये से तो शादी, दुल्हन और लाल रंग एक-दूसरे के पर्याय से बन गए हैं, जानते हैं कैसे...

दुल्हन और लाल रंग

लाल रंग प्यार, रोमांस और पैशन का प्रतीक माना जाता है। हमारे यहां लाल रंग के बिना शादी की कल्पना भी संभव नहीं है। शादी में लाल रंग के महत्व का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि शादी के बाद जब दुल्हन अपने ससुराल में पहला कदम रखती है तो इससे पहले उसके पैरों को रोली यानी लाल रंग के पानी में रखवाया जाता है। इसके बाद जब वह घर में नंगे पांव प्रवेश करती है तो उसके पैरों के लाल निशान अंदर तक जाते हैं। इसी तरह जब बात दुल्हन के लिबास और एक्सेसरीज़ की होती है तो भी लाल रंग को ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। 

 

ज्योतिषियों का कहना है कि विवाह का प्रमुख ग्रह मंगल लाल रंग का है इसीलिए हिंदू दुल्हन शादी के रीति रिवाज़ों के दौरान ज्यादातर लाल रंग का ही जोड़ा पहनती है। विवाह की रस्में पहले कई-कई दिनों तक चलती थीं। विवाह रूपी इस उत्सव का पहला दिन मेंहदी से शुरू होता था, इसके बाद तिलक, संगीत, बारात, फेरे, विदाई और अंत में एक औपचारिक रिसेप्शन। शादी के बाद एक सप्ताह तक दुल्हन के ससुराल में भी तरह-तरह के रस्मो रिवाज़ के आयोजन किए जाते थे। इन रस्मों को निभाते-निभाते दुल्हन का कैसा भी हाल होता हो, फिर भी वह रोज अपने दुल्हनिया के रूप में ही दिखा करती थी यानी लाल जोड़े में। लाल रंग को भारत में खासतौर से हिंदू समाज में बेहद शुभ माना जाता है जो प्रेम, साहस, सौंदर्य और ताकत का प्रतीक होता है।

दुल्हन का लाल जोड़ा

भारतीय दुल्हन की तमन्नाओं की पहली उड़ान है शादी का लाल जोड़ा। लाल रंग की घाघरा चोली या साड़ी जब सोने के या सुनहरे आभूषणों और हल्के से घूंघट के साथ पहना जाता है तभी भारतीय पारंपरिक दुल्हन का रूप श्रृंगार परिपूर्ण माना जाता है।

 

 

 

  

सिर्फ परम्परा ही नहीं है बल्कि पारंपरिक भारतीय विवाह की पहचान बन गया है दुल्हन का लाल जोड़ा। भारत की हर लड़की अपने सबसे अहम् दिन लाल रंग का जोड़ा पहन कर आकर्षक, अपूर्व सुंदरी और एक रानीराज कुमारी सी नज़र आना चाहती है। लाल के विभिन्न शेड्स में रंगे कपड़ों पर सुनहरे रंग से कारीगरी की जाती है जो दुल्हन को बेहद खूबसूरत और विवाह समारोह की खास शख्सियत बना देता है। 

लाल सिंदूर

इस सौंदर्य के पीछे का सच वैज्ञानिकों का कहना है कि लाल रंग में महिलाएं सबसे ज्यादा सुंदर दिखती हैं और लाल रंग के कपड़े पहनने वाली स्त्रियों की ओर पुरूष ज्यादा आकर्षित होते हैं। एक शोध में कहा गया है कि लाल रंग के कपड़े पहनने पर महिलाओं की सेक्स अपील बढ़ जाती है जिससे पुरूषों का ध्यान उनकी तरफ जल्दी जाता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि लाल रंग हमारी इंद्रियों तथा भाव-भंगिमाओं को उत्तेजित करता है। इसका सकारात्मक पक्ष देखा जाए तो यह शक्ति, ऊर्जा तथा जीवन के प्रति उत्साह को भी दर्शाता है और जीवन में ताकत, खुशी-सुख एवं प्रेम देने वाला होता है। उगते हुए सूरज और अग्नि का प्रमुख रंग गहरा लाल होता है। मां लक्ष्मी को भी लाल रंग प्रिय है। मां लक्ष्मी लाल वस्त्र पहनती हैं और लाल रंग के कमल पर शोभायमान रहती हैं।

हमारे देश में सिंदूर की महत्ता के बारे में कुछ कहने की जरूरत नहीं है। शादी के रीति रिवाज़ों के बीच दूल्हा दुल्हन के गले में मंगलसूत्र बांधता है और मांग में पहली बार सिंदूर भरता है। लाल रंग प्यार और प्रतिबद्धता से जुड़ा हुआ है। शायद यही वजह है कि इसका प्रयोग नए जीवन की शुरूआत के प्रतीक के रूप में किया जाता है। नए जोड़े के नए जीवन की शुरूआत कराता है सिंदूर। इसके बाद सभी विवाहित हिंदू महिलाएं अपनी मांग में सिंदूर धारण करती हैं। लाल सिंदूर एक महिला के विवाहित होने की पहचान है। माना जाता है कि सिंदूर के साथ पति के लंबे जीवन की मनोकामना जुड़ी होती है। सिंदूर का लाल रंग सौभाग्य का भी प्रतीक है।

 

 

लाल बिंदी

शादीशुदा महिलाओं द्वारा लगाई जाने वाली लाल बिंदी प्यार और समृद्धि की प्रतीक है। माना जाता है कि बिंदिया महिलाओं को अनहोनी से बचाती है। हिन्दू धर्म में शादी के बाद हर स्त्री को माथे पर लाल बिंदी लगाना आवश्यक माना गया है। बिंदी स्त्रियों के 16 शृंगार में से एक है। लड़कियां बिंदी का उपयोग सुंदरता बढ़ाने के उद्देश्य से करती हैं।

 

लाल मेंहदी

शादी पर किए जाने वाले सोलह श्रृंगारों में मेंहदी का भी महत्वपूर्ण स्थान है। जहां विवाह में सब कुछ लाल रंग का होता है तो मेंहदी भी रचने के बाद अपने पूरे लाल रंग में दुल्हन के रूप रंग को चार चांद लगा देती है। मेंहदी केवल सौंन्दर्य ही नहीं बढ़ाती बल्कि इसे लगाने के पीछे का तथ्य इसकी ठंडी तासीर है। दुल्हन के हाथों और पैरों में मेंहदी लगाए जाने का उद्देश्य उसके धैर्य और शांतिको नाए रखना है

 

 

 

 

 

लाल चूडिय़ां

चूडिय़ों के बिना भी पारंपरिक दुल्हन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। खासतौर पर उत्तर भारत में महिलाएं विभिन्न आकार- प्रकार में लाल रंग की चूडिय़ां पहनती हैं। प्राचीन काल में भी हमारे यहां की स्त्रियां बाजू तक चूडिय़ां पहनती थीं। सुहाग चिह्न के तौर पर पहनी जाने वाली लाल चूडिय़ां असल में किसी भी विवाहिता का महत्वपूर्ण श्रृंगार साधन है। विवाहित स्त्री चूड़ी को सुहाग के प्रतीक के रूप में पहनती हैं तो कुंवारी लड़कियां इसे फैशन के तौर पर पहनती हैं। विवाहित स्त्री के लिए चूड़ी पहनने के अपने-अपने अलग विधान हैं। उत्तर प्रदेश में दुल्हनें लाल और हरी चूडिय़ां सुहाग की निशानी के तौर पर पहनती हैं।

 

लाल आभूषण

जब दुल्हन का शादी का जोड़ा लाल रंग का होता है तो उसके आभूषणों में भी लाल रंग को शामिल कर उसे और अद्भुत रूप दिया जा सकता है। लाल रंग की पारंपरिक पोशाक के साथ आजकल लाल रंग के आभूषणों के अच्छे विकल्प मौजूद हैं। आपके शादी के जोड़े में जिस तरह की कारीगरी है, यदि उससे मिलते जुलते आभूषण भी धारण कर लें तो सोने पर सुहागा ही हो जाए। और आपके सैंडल्ज़ और क्लचेज़ के साथ भी ऐसा ही किया जाए। लाल रंग के जोड़े से मिलती जुलती एक्सेसरीज़ आपको शहर की सबसे खूबसूरत दुल्हन बनाने में मददगार होगी।

 

लाल गुलाब

गुलाब कई रंगों में पाया जाता है परंतु उसका मुख्य व नैसर्गिक रंग लाल है। शादी ब्याह में जितना लाल गुलाब का महत्व है उतना किसी दूसरे फूल का नहीं है। गुलाब प्रेम का प्रतीक है। गुलाब की तरह प्रेम का एहसास तो कोमल होता है परंतु मार्ग कांटों की तरह मुश्किल होता है।

इस तरह, आप किसी भी शादी में जाएं, हर जगह लाल रंग ही सबसे ज्यादा दिखेगा। दुल्हन की बात न भी करें तो मेहमानों के कपड़ों से लेकर इनविटेशन कार्ड, शामियाना, सजावट, मिठाई के डिब्बे इत्यादि सारे सामान पर लाल रंग छिटका हुआ दिखता है। लाल रंग उत्सव और सत्य को भी परिभाषित करता है, इसीलिए यह देश के हर संप्रदाय के व्यक्ति के जीवन से जुड़ा हुआ है।

 

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