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सपनों का देश सिंगापुर

ऋचा कुलश्रेष्ठ

26th October 2015

आधुनिक चमत्कार के नाम से प्रसिद्ध सिंगापुर एक छोटा सा देश है, जो अपने शुद्ध पर्यावरण, हरे-भरे वातावरण और दुनिया भर की रंगबिरंगी सभ्यता के लिए पहचाना जाता है।

सपनों का देश  सिंगापुर

सिंगापुर जाने की बात सुनकर ही मन में उमंगें हिलोर लेने लगीं। तय हुआ कि सिंगापुर जा ही रहे हैं तो वहां से कुछ ही दूरी पर स्थित मलेशिया भी देख लिया जाए। कार्यक्रम बना तो कुछ ही दिनों में पहुंच भी गए सिंगापुर। मन में जो छवि थी, उससे अलग नहीं था सिंगापुर- सपनों के देश जैसा। दक्षिण-पूर्व एशिया में एक छोटा, सुंदर व विकसित देश सिंगापुर पिछले बीस वर्षों के दौरान ही पर्यटन व व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। हमारे एक शहर जितना छोटा सा देश, साफ-सुथरी सड़कें, शांत, हरा-भरा वातावरण और दुनिया भर की रंग-बिरंगी सभ्यता। यहां कई धर्मों में विश्वास रखने वाले, विभिन्न देशों की संस्कृति, इतिहास तथा भाषा के लोग एकजुट होकर रहते हैं। सिंगापुर को स्वतंत्रता 1965 में मिली। इतने कम समय में इतनी प्रगति संभव है? विश्वास नहीं होता।

सिंगापुर को 'आधुनिक चमत्कार कहा जाता है। हालांकि यहां पानी, दूध, फल मलेशिया से, सब्जियां न्यूजीलैंड व ऑस्ट्रेलिया से, दाल, चावल व अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं थाईलैंड और इंडोनेशिया से आयात की जाती हैं लेकिन फिर भी सिंगापुर की अर्थव्यवस्था दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती जा है। करीब 35 लाख की जनसंख्या वाले इस देश में चीनी, मलय व करीब 8 प्रतिशत भारतीय रहते हैं। ईमानदार, परिश्रमी, अनुशासित एवं लक्ष्य के प्रति समर्पित यहां के वासियों ने कुछ ही वर्षों में अपने देश को संपन्नता एवं प्रगति की सर्वाधिक ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। 

प्रचलित किंवदंती है कि चौदहवीं शताब्दी में सुमात्रा द्वीप का एक हिन्दू राजकुमार जब शिकार के लिए यहां आया था तो जंगल में उसने पहली बार सिंह देखे और इसी वजह से उसने इस द्वीप का नाम सिंगापुरा अर्थात सिंहों का द्वीप रख दिया। 

पर्यावरण
सिंगापुर को अपने पर्यावरण के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। बताया जाता है कि यहां सड़कों और अन्य स्थलों पर लगे पेड़ों की खास देखभाल की जाती है और उन्हें एक विशेष आकार दिया जाता है, जिसकी वजह से सभी पेड़ कमोबेश एक ही जैसे लगते हैं। यदि किसी वजह से कोई पेड़ टूट जाए या सूख जाए तो उसकी जगह उसी आकार का दूसरा पेड़ रोप दिया जाता है।
खूबसूरती सिंगापुर की रात जगह-जगह हो रहे रंग-बिरंगे रोशनियों वाले शोज़ के कारण बेहद खूबसूरत होती है। बड़े-बड़े शानदार शॉपिंग मॉल्स इस खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। पर्यटक यहां क्रूज ट्रिप लेकर जहाजों के माध्यम से द्वीप के हर आकर्षक स्थल को देख सकते हैं। सिंगापुर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में तीन संग्रहालय, जुरोंग बर्ड पार्क, रेप्टाइल पार्क, जूलॉजिकल गार्डन, साइंस सेंटर, सेंटोसा द्वीप, पार्लियामेंट हाउस, हिन्दू, चीनी व बौद्ध मंदिर तथा चीनी व जापानी बाग शामिल हैं।

सेंटोसा द्वीप
सेंटोसा द्वीप सिंगापुर का प्रमुख आकर्षण है। यहां बच्चों और बड़ों के देखने के लिए इतना कुछ है कि एक सप्ताह भी कम पड़ जाए। सेंटोसा द्वीप यूं तो बस या टैक्सी से भी जाया जा सकता है लेकिन वहां जाने के लिए मोनोरेल को विशेष रूप से चलाया गया है। मोनोरेल पर्यटकों के लिए सेंटोसा के तीन अलग-अलग स्टेशनों के बीच कड़ी का काम करती है। पर्यटकों के देखने के लिए यहां बेहद मशहूर यूनिवर्सल स्टूडियो है जहां फिल्मों की तरह सड़कों पर ही म्यूजि़क और डांस शोज़ आयोजित किये जाते हैं। इसके अलावा दुनिया की सर्वश्रेष्ठ राइड्स यहां एंजॉय की जा सकती हैं। सेंटोसा का अंडरवाटर वल्र्ड एक्वेरियम और टाइगर स्काई टावर भी प्रसिद्ध हैं। अंडरवाटर वल्र्ड एक्वेरियम में जाकर लगता है जैसे हम समुद्र में ही घूम रहे हों।

जुरोंग बर्ड पार्क
600 प्रजातियों व 8000 से ज्यादा पक्षियों के संग्रह के साथ जुरोंग बर्ड पार्क एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे बड़ा पक्षी उद्यान है। दक्षिणी ध्रुव का कृत्रिम वातावरण बनाकर यहां पेंग्विन को भी रखा गया है। 30 मीटर ऊंचा मानव निर्मित जलप्रपात व ऑल स्टार बर्ड शो, अन्य प्रमुख आकर्षण हैं।

जूलॉजिकल गार्डन

यहां का चिडिय़ाघर जूलॉजिकल गार्डन और नाइट सफारी पर्यटकों को ज़रूर देखनी चाहिए जहां जानवरों को पिंजरे में नहीं बल्कि खुले में रखा जाता है। पर्यटकों से दूरी बनाने के लिए बीच में या तो गहरा गड्ढा या फिर मोटा कांच लगाया गया है। नाइट सफारी में पर्यटक जानवरों को रात के समय खुले में घूमते हुए देख सकते है। जूलॉजिकल गार्डन में एनिमल फीडिंग शो सी. लायन डांस शो आदि दर्शकों का मन मोह लेते हैं।

 

 

 

म्यूजियम

सिंगापुर म्यूजियम में सिंगापुर की आजादी की कहानी थ्री-डी वीडियो शो के माध्यम से दिखाई जाती है। कल्चर म्यूजियम में विभिन्न जातियों के त्योहारों को दर्शाया गया है, जिनमें दशहरा, दीपावली की झांकियां हैं और साथ लगी पट्टिका में इनका महत्व भी बताया गया है।

इतिहास
मॉडर्न सिंगापुर का उदय 19वीं शताब्दी में हुआ। उस वक्त सिंगापुर क्षेत्र के विशेष व्यापार पोर्ट के रूप में स्थापित होने लगा था। इसी दौरान ग्रेट ब्रिटेन को भी अपनी व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक रणनीतिक पोर्ट की ज़रूरत थी। वहां के तत्कालीन गवर्नर लेफ्टिनेंट सर थॉमस स्टैमफोर्ड रैफल्स ने सिंगापुर को अपार क्षमताओं से भरा बताया। उन्होंने स्थानीय शासकों से संधि कर सिंगापुर को व्यापारिक केंद्र बना दिया। द्वीप की मुक्त व्यापार नीति ने एशिया-मध्य पूर्व और अमरीका तक से व्यापारियों को आकर्षित किया। 1832 तक सिंगापुर पेनांग, मलक्का और आसपास के क्षेत्र का केंद्र बन चुका था। 1869 में स्वेज नहर के खुलने और टेलीग्राफ और स्टीमर के आगमन के साथ, सिंगापुर का महत्व और बढ़ गया लेकिन 1941 में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जापान के हमले ने देश की शांति और समृद्धि को एक बड़ा झटका दिया। अभेद्य किले के रूप में माना जाने वाला सिंगापुर अगले साढ़े तीन साल तक जापान के कब्जे में रहा। अनेक राजनीतिक उतार-चढ़ाव से गुजरने के बाद आखिरकार 9 अगस्त 1965 में सिंगापुर एक स्वतंत्र और संप्रभु लोकतांत्रिक राष्ट्र बना।

विकास का मॉडल
सिंगापुर का चांगी हवाई अड्डा 1981 में शुरू हुआ और सिंगापुर एयरलाइंस एक प्रमुख एयरलाइन बन गई। सिंगापुर का बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक बन गया और इस दौरान सेवा एवं पर्यटन उद्योग में भी तेजी से वृद्धि हुई। धीरे-धीरे सिंगापुर अपने सीमित संसाधनों के बावजूद एक महत्वपूर्ण परिवहन हब, प्रमुख पर्यटन स्थल और अनेक देशों के लिए विकास का एक मॉडल बन गया है। भारतीय उद्योगपतियों का मानना है कि यदि भारत में श्रम कानूनों को उदार बनाया जाए और मौजूदा संसाधनों का बेहतर ढंग से उपयोग किया जाए तो देश में भी सिंगापुर के विकास मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है। 

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