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ऑनलाइन गर्भपात की तरफ बढ़ते कदम

गीता सिंह

21st November 2015

इंटरनेट ने जहां एक तरफ संपूर्ण विश्व की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ युवा लड़कियों के लिए इंटरनेट बड़ा खतरा साबित हो रहा है।

ऑनलाइन गर्भपात की तरफ बढ़ते कदम

प्राची शाह, (बदला हुआ नाम), का अपने सहकर्मी के साथ प्रेम संबंध था। अक्सर ऑफिस के काम से उन्हें साथ में ही शहर से बाहर जाना पड़ता था। काम के दौरान मौजमस्ती के बीच एक दिन प्राची को पता चला कि वह गर्भवती है। यह जानकर उसके होश उड़ गए। घर परिवार व समाज में बदनामी के डर से उसने बिना कुछ सोचे-समझे खुद ही गर्भपात करने का निश्चय कर लिया। गर्भपात करने की जानकारी के लिए प्राची ने इंटरनेट पर सर्च करना शुरू किया ताकि किसी डॉक्टर के पास जाने से बचा जा सके। इंटरनेट पर मिली जानकारी के मुताबिक ओरल पिल्स द्वारा एबॉर्शन प्राची को बहुत सरल उपाय दिखाई दिया। वह दवाई खरीद कर लाई तथा खुद ही बिना डॉक्टर की सलाह लिए गोलियों का सेवन कर लिया। लेकिन दवा की दूसरी डोज़ लेते ही प्राची को बहुत तेज ब्लीडिंग शुरू हो गई। उसे लगातार कई दिनों तक ब्लीडिंग होती रही, जिससे वह काफी कमजोरी महसूस करने लगी। बदनामी के डर से उसने यह बात किसी को भी नहीं बताई, किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना भी उचित नहीं समझा। आखिर में उसकी हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाया गया।


नर्चर आईवीएफ सेंटर में गाइनॉकोलॉजिस्ट एवं ऑब्स्टेट्रीशियन डॉ. अर्चना धवन बजाज कहती हैं कि जब मैंने प्राची का परीक्षण किया तब उसका हीमोग्लोबिन घटकर 5 ग्राम रह गया था। उसके शरीर में मौजूद रक्त की मात्रा में से आधे से अधिक खून बह गया था। तब उसे 4 यूनिट खून चढ़ाया गया और आपातकालीन डी तथा सी उपचार दिया गया। उसके यूट्रस से बहुत बदबूदार अवशेष निकाला गया। बिना डॉक्टर की निगरानी में एबॉर्शन पिल लेने की वजह से उसका गर्भपात पूरी तरह से नहीं हो पाया था और संक्रमण भी बहुत अधिक फैल गया था। सौभाग्यवश समय रहते प्राची की स्थिति को संभाल लिया गया वरना उसकी जान को भी खतरा हो सकता था।

आखिर क्यों बढ़ रहा ऑनलाइन गर्भपात का चलन
यह सिर्फ एक प्राची की बात नहीं बल्कि आजकल वेब के माध्यम से एबॉर्शन की जानकारी एक सामान्य बात होती जा रही है। हम यहां यह कहकर भी बचाव नहीं कर सकते हैं कि यह लड़कियां कम पढ़ी-लिखी या अनपढ़ हैं, जो जानकारी के अभाव में ऐसी हरकतें कर रही हैं। अच्छी खासी पढ़ी-लिखी होने के बावजूद लड़कियां एबॉर्शन करने के लिए इंटरनेट का सहारा ले रही हैं, जो उनके लिए एक बड़ा खतरा साबित हो रहा है। इन दिनों ऐसे मामले बहुत सार्वजनिक हो रहे हैं। इंटरनेट के जरिये भारत में बहुत गर्भपात हो रहे हैं, खासकर नवयुवतियों में, और इसका खासा असर देखने को मिल रहा है।  जैसे-

  • मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से गर्भ समापन के लिए एबॉर्शन पिल्स मिल जाती हैं। जिससे जब चाहे कोई भी लड़की गर्भ समापन कर सकती है। इन पिल्स को बिकने से औषधि नियंत्रक कानून भी रोक नहीं पा रहा है। दवा द्वारा एबॉर्शन की प्रक्रिया को परिवार एवं स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2002 में मान्यता प्रदान की गई है। मेडिकल एबॉर्शन निर्देशों के अनुसार प्रेग्नेंसी के 7 हफ्तों के भीतर दवा द्वारा एबॉर्शन किया जा सकता है। लेकिन यह दवा हमेशा डॉक्टर की निगरानी में ही ली जानी चाहिए।
  • लड़कियों ने निर्धारित दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर दिया है क्योंकि दवा लेने की विधि व समय सभी कुछ इंटरनेट पर मिल जाता है। इसलिए उन्हें डॉक्टर की कोई जरूरत महसूस नहीं होती।
  • एक अनुमान के मुताबिक हर साल 18 लाख से 67 लाख गर्भपात खुद ही कर लिए जाते हैं। 

खतरों भरी है यह राह 

  • डॉ. अर्चना बताती हैं कि इंटरनेट से मिली जानकारी से गर्भपात करना खतरे से भरा होता है। उन्हें हर हफ्ते कई कॉल आते हैं, जब लड़कियां इंटरनेट पर दिए गए तथ्यों को पढ़ती हैं और पूछती हैं कि क्या ये तरीके सही हैं? वो लड़कियां बिना डॉक्टर के सुपरविजन के खुद एबॉर्शन करना चाहती हैं, लेकिन ऐसा करना बिल्कुल गलत है। उनकी जान के लिए खतरा है।
  • सेल्फ एबॉर्शन के कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसे कि अत्यधिक ब्लीडिंग, अधूरा गर्भपात, डी और सी की जरूरत, रक्त में इन्फेक्शन, सदमा तथा मृत्यु की संभावना। कभी-कभी बांझपन की समस्या भी हो सकती है।
  • नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत महिला मृत्यु दर का सालाना 8 प्रतिशत (अर्थात 4600 मृत्यु) एबॉर्शन के कारण होती हैं। एबॉर्शन एक सरल प्रक्रिया है लेकिन यह हमेशा डॉक्टर के सुपरविजन में ही किया जाना चाहिए। सबसे जरूरी बात है कि स्वयं को संयम में रखें ताकि आपको एबॉर्शन जैसी दर्दनाक प्रक्रिया का सहारा ना लेना पड़े। जीवन आपका है और उसकी कद्र भी आपको खुद ही करनी है। इसलिए ऐसा कोई कदम ना उठाएं कि आपको स्वयं की और अपने परिवार की नजरों में गिरना पड़े।

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