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देश के 23 प्रतिशत बच्चों का कोलेस्ट्रॉल स्तर चिंताजनक

ऋचा कुलश्रेष्ठ - दरकार

24th November 2015

भारतीयों में कोरोनरी धमनी रोग कम उम्र में ही शुरू हो जाते हैं और इसलिये रोग की शीघ्र पहचान एवं समय पर चिकित्सा बहुत जरूरी है। कुल 2508 भारतीय बच्चों पर किये गये अध्ययन में लड़कों की तुलना में लड़कियों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा अधिक पाया गया।

देश के 23 प्रतिशत बच्चों का कोलेस्ट्रॉल स्तर चिंताजनक

अगर किसी दिन आपको पता लगे कि आपका मात्र 15 साल का बच्चा दिल की बीमारियों से ग्रस्त है तो आपको कैसा लगेगा। जाहिर है कि यह आपके लिए एक बड़ा झटका होगा। कोई भी यह नहीं सोच सकता कि उसका हंसता खेलता बच्चा अचानक एक दिन दिल के दौरे का शिकार हो जाएगा। लेकिन सावधान रहिए, ऐसा कभी भी हो सकता है।

लिपिड एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक अध्ययन में 16 से 18 वर्ष उम्र के 23 प्रतिशत बच्चों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से काफी अधिक पाया गया। कुल 2508 बच्चों पर किये गये इस अध्ययन में लड़कों की तुलना में लड़कियों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा अधिक पाया गया। खास बात यह कि इस अध्ययन में 2.3 प्रतिशत बच्चे अधिक वजन वाले तथा 3.8 प्रतिशत बच्चे मोटापे से ग्रस्त पाए गए हैं। इससे पता लगता है कि भारतीयों में कोरोनरी धमनी रोग कम उम्र में ही शुरू हो जाते हैं और इसलिये रोग की शीघ्र पहचान एवं समय पर चिकित्सा बहुत जरूरी है। ऐसे में हृदय रोगों के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय किशोरों के लिपिड प्रोफाइल की जांच जल्द से जल्द कराई जानी बेहद जरूरी है।

यह तो सभी को पता ही है कि आपका दिल ही आपका सबसे सच्चा साथी होता है लेकिन यह ऐसा साथी है जिसकी हिफाजत पूरे ध्यान के साथ करनी बेहद जरूरी है क्योंकि जिस दिन इसने काम करना बंद कर दिया, उसी दिन जीवन का अंत निश्चित है। भारत कोरोनरी धमनी रोग और स्ट्रोक जैसी हृदय समस्याओं के लिए अधिक अनुकूल है।

पश्चिमी देशों में जहां दिल की बीमारी के कारण होने वाली मृत्यु दर 2001-2011 तक करीब 40 प्रतिशत तक गिर गई है, वहीं भारत में इसमें 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2015 तक, इससे पीडि़त भारतीयों की संख्या 6 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिनमें से 2 करोड़ 30 लाख लोगों की उम्र 40 वर्ष से कम होगी। यह साबित हो चुका है कि दक्षिण एशियाई नस्ल के लोगों में इस रोग का अधिक खतरा रहता है। यह हमारे देश की युवा आबादी के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

लिपिड एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संस्थापक और उपाध्यक्ष तथा अपोलो अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रमन पुरी के इस अध्ययन को द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के पत्र में प्रकाशित किया गया है। डॉ. रमन पुरी ने बताया कि उनके अध्ययन में भारत की किशोर आबादी में दिल के दौरे, स्ट्रोक के कारणों, अधिक बीएमआई का बढऩा और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के काफी कम रहने का पता लगा है। उनके अनुसार कोरोनरी धमनी रोग के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय किशोरों के लिपिड प्रोफाइल की जल्द से जल्द स्क्रीनिंग और मेटाबोलिक सिंड्रोम के अन्य संकेतकों का पता लगाना जरूरी है।

अध्ययन में बच्चों में कोलेस्ट्रॉल स्तर के गलत पैटर्न का खुलासा करते हुए बताया गया है कि 10 प्रतिशत बच्चों में एलडीएल का स्तर और 18 प्रतिशत बच्चों में ट्राइग्लिसराइड का स्तर अधिक पाया गया जबकि 48 प्रतिशत बच्चों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल या एचडीएल का स्तर कम पाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि रक्त में उच्च कोलेस्ट्रॉल कोरोनरी धमनी की बीमारी के लिए बड़े जोखिम का कारक है जो दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी घातक बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है। इस अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार भारतीय लोगों में कोरोनरी धमनी से संबंधित रोग कम उम्र में ही शुरू हो जाते है।

भारतीयों में दिल का दौरा और स्ट्रोक के मामलों को रोकने के लिए भारत की लिपिड एसोसिएशन ऑफ इंडिया दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सभी कॉलेजों के छात्रों के रक्त में कोलेस्ट्रॉल की निशुल्क जांच करेगी। एलआईए प्रस्ताव रखेगी कि कालेजों में प्रवेश के समय ही किशोरों के मुख्य जोखिम कारकों की जांच की जाए ताकि उच्च जोखिम कारकों की पहचान कर जल्द से जल्द उपचार शुरू किया जा सके। एसोसिएशन किशोरों में फास्टिंग लिपिड प्रोफाइल की जांच अनिवार्य बनाना चाहती है।

अध्ययनों में दक्षिण एशियाई देशों के लोगों में हार्ट अटैक की बढ़ती आशंका देखते हुए लगता है कि कार्डियोवास्कुलर रोगों के प्रति किशोरावस्था से ही सावधानी रखना बेहद जरूरी है। देश के स्वस्थ भविष्य और भविष्य की स्वस्थ पीढ़ी के लिए आज दरकार है कि इस रोग की शीघ्र पहचान एवं समय पर चिकित्सा कराई जाए। परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा हो या नहीं, पंद्रह वर्ष की आयु से ही हर पांच साल में अपने बीपी व कोलेस्ट्रॉल स्तर की जांच करवाएं। आयु बढऩे के साथ-साथ जांच का अंतराल घटाते जाएं और अपने वजन को नियंत्रण में रखें।

 

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