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प्रेगनेंसी और स्किन केयर

अर्पणारितेश यादव

25th May 2016

गर्भावस्था के पलों को खुशनुमा बनाने के लिए जरुरी है कि आप अपनी खूबसूरती पर भी ध्यान दें ताकि गर्भवस्था के दौरान भी आपका सौंदर्य बना रहे।

प्रेगनेंसी और स्किन केयर

गर्भावस्था के समय स्त्री के शरीर का हारमोनल प्रोफाइल बदलता है और इससे त्वचा में बदलाव आ सकता है। त्वचा में आए परिवर्तन से बहुत ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, बस जरूरत है थोड़ी-सी अतिरिक्त देखभाल की। आइए जानें डाॅक्टर और सौंदर्य विशेषज्ञ त्वचा में आए इस परिवर्तन का क्या कारण मानते हैं और क्या है इस दौरान त्वचा की देखभाल का सही तरीका । डाॅ. मुकेश बत्रा के अनुसार गर्भावस्था के दौरान त्वचा पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, इनमें मुख्य हैं-

मुंहासे:-  गर्भावस्था के शुरू में कुछ महिलाओं को मुंहासे हो जाते हैं, खासकर उन्हें जो गर्भावस्था से पहले मासिक के दौरान इसकी शिकार हो जाती थीं।

नीले या दागदार पांव:-  कुछ महिलाओं, खासकर वे जो ठंडी जगहों पर रहती हैं उनमें ज्यादा हारमोन बनने से पैरों में अस्थायी तौर पर दाग हो जाते हैं या त्वचा का रंग खराब हो जाता है। आमतौर पर यह बच्चे के जन्म के बाद ठीक हो जाता है।

चमकती त्वचा:- गर्भावस्था में शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है। यह प्रवाह आपकी त्वचा की सतह के ठीक नीचे स्थित छोटे वेसेल में भी बढ़ता है। गर्भावस्था के हारमोन से त्वचा की ग्रंथियों तेल छोड़ती हैं। जिससे आपकी त्वचा चमकदार हो जाती है।

 

खुजली:- कई गर्भवती महिलाओं की त्वचा में खुजली होती है, खासकर पेट पर और स्तन के आस-पास। ऐसा दूसरे और तीसरे ट्रमिस्टर में होता है। दरअसल, इस समय शरीर बढ़ रहा होता है और इसके अनुकूल होने के लिए त्वचा में खिंचाव होता है।

लीनिया निगरा (पेट पर गाढ़ी रेखा):- कई महिलाओं की त्वचा में अतिरिक्त पिगमेंट (कलरिंग) से एक गाढ़ी रेखा बन जाती है। यह नाभि से नीचे जांघों के पास तक जाती है। डिलीवरी के बाद यह रेखा हल्की होती चली जाती है।

रैशेज:- गर्भावस्था में कई महिलाओं को पसीना ज्यादा आता है। ऐसा पसीने की ग्रंथियों पर हारमोन के प्रभाव से होता है। इससे हीट रैशेज होने की आशंका बढ़ सकती है। गर्भावस्था के बाद के समय के कुछ महिलाओं केपेट पर लाल बम्प बन जाते हैं। यह नुकसानदेह नहीं होता पर इसमें खुजली होती है। ये बम्प,कूल्हों, बांहों, पैरों तक फैल सकते हैं और इससे असुविधा होती है।

स्ट्रेच माक्र्स (खिंचाव केनिशान):- गर्भावस्था के समय जब पेट और स्तन का आकार बढ़ता है तो ज्यादातर महिलाओं के पेट और स्तन पर खिंचाव के निशान पड़ जाते हैं। भिन्न टेक्सचर वाली त्वचा पर ये छोटी, दबी धारियां, गुलाबी, लाल-भूरी या गहरे भूरे रंग की हो सकती हैं और यह महिला की त्वचा के रंग गर्भावस्था से संबधित ब्रेक आउट का उपचार मुंहासों की परंपरागत दवाइयों से मत कीजिए। अपने डर्मेटोलाॅजिस्ट को बताइए कि आप गर्भवती हैं या गर्भधारण करने की योजना बना रही हैं। इस तरह आप गर्भावस्था के लिए उपयुक्त स्किन केयर नियम का विकास कर पाएंगी।


 

 

गर्भावस्था के दौरान त्वचा की देखभाल:- 

  • गर्भावस्था में तैलीय त्वचा की देखभाल के लिए मेकैनिकल एक्सफोलियंट का उपयोग कीजिए ताकि त्वचा साफ रहे। रोमछिद्रों को बंद करने वाली त्वचा की मृत कोशिकाओं को अपनी त्वचा की सतह से हटाइए। इसके लिए बहुत बारीक कण वाले जेंटल स्क्रब सबसे उपयुक्त है।
  • प्रत्येक दो सप्ताह या आसपास पर अच्छी तरह सौम्य सफाई के लिए किसी सैलून में क्लीजिंग फेशियल जरूर आजमाइए। सैलून को अपनी स्थिति बता दीजिए और यह भी कि आप विटामिन ए प्रीपरेशन और एक्सफोलियंट से बच रही अपने चेहरे पर रोज दोबार किसी सौम्य, नाॅन ड्राइंग क्लींजर का उपयोग कीजिए।
  • माॅयश्चराइजिंग साबुन से बचिए, क्योंकि इनमें इमोलियंट्स होते हैं जो रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं।



  • खुजली रोकने के लिए उन मरहमों का उपयोग न करें, जिसमें कोटिसोन या हाइड्रोकोर्टिसोन है।
  • खूब पानी पीजिए। यह बचाव का पहला तरीका है। इससे त्वचा अंदर और बाहर सेनम रहती है।
  • जिन महिलाओं की त्वचा शुष्क है उन्हें गर्भावस्था के दौरान यह समस्या और गंभीर लग सकती है और इसका असर चेहरे के साथ-साथ पूरे शरीर पर होता है।
  • शुष्क त्वचा केलिए फाॅर्मूलेटेड सौम्य क्लींजर से अपने चेहरे को रोज दोबारा धोइए।
  • एक अच्छे इमोलियंट माॅयश्चराइजर और सन ब्लाॅक का उपयोग कीजिए।
  • अगर आपकी त्चचा ज्यादा शुष्क है तो मृत त्वचा की कोशिकाओं को मेकैनिकल एक्सफोलियंट से हटाइए।
  • सप्ताह में एक बार माॅयश्चराइजिंग मास्क का उपयोग कीजिए।
  • ज्यादा स्नान मत कीजिए और जब कीजिए तो थोड़ी देर कुनकुने पानी से स्नान कीजिए।
  • बहुत शुष्क त्वचा के लिए नहाने के बाद हर बार तेल लगाइए और इसके ऊपर माॅयश्चराइजिंग क्रीम का प्रयोग कीजिए।
  • गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में खून की मात्रा ज्यादा होती है। और इसके साथ गर्भ में पल रहे बढ़ते शिशु को आवश्यक तरल पदार्थ मुहैया कराने की भी आवश्यकता होती है।
  • तरल पदार्थ की इस मांग के कारण आपकी त्वचा की नमी इन जरूरतों को पूर्ण करने में लग जाती हैं नतीजातन त्वचा बहुत शुष्क और अक्सर खुजली वाली हो जाती है।
  • मुस्कराइए और खुश रहिए। वर्षों पुरानी मान्यता है कि मुस्कराने से चेहरे की मांसपेशियों का व्यायाम होता है। खुशी से शरीर केअंदर का रक्त प्रवाह बढ़ता है और इस तरह शरीर स्वस्थ और त्वचा खिली-खिली लगती है।

 

सौंदर्य विशेषज्ञ का नज़रिया:- सौंदर्य विशेषज्ञ शहनाज हुसैन का मानना है कि इस दौरान त्वचा पर आए परिवर्तन देखकर परेशान नहीं होना चाहिए। स्किन केयर का अपना रूटीन जारी रखना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति की त्वचा की जरूरत अलग होती है। बस इस दौरान अपनी त्वचा को समझते हुए थोड़ी अतिरिक्त देखभाल करनी चाहिए।

  • अगर शुष्क त्वचा है क्लीजिंग मिल्क से साफ करके अच्छा माॅयश्चराइजर लगाना चाहिए। दिन में कहीं निकलना है तो सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग करना चाहिए।
  • अगर त्वचा बहुत ज्यादा शुष्क है तो किसी मसाज क्रीम से कुछ मिनट चेहरे पर मसाज करके, चेहरे को साफ करके फिर कोई लोशन या माॅयश्चराइजर लगाएं।
  • तैलीय त्वचा की सफाई के लिए क्लींजिंग लोशन तथा स्क्रब का प्रयोग करें। स्क्रब सप्ताह में दो या तीन बार प्रयोग करना चाहिए।
  • अगर मौसम गर्म है तो हल्की टोनिंग क्रीम या माइल्ड एस्ट्रिजेंट के प्रयोग से त्वचा को रिफ्रेश कर सकते हैं। सर्दियों में त्वचा शुष्क लगे तो माॅयश्चराइजिंग लोशन का प्रयोग करें।

 

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