GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

अच्छे दिन आएंगे

संतोष श्रीवास्तव

13th July 2017

अच्छे दिन आएंगे


बचपन में अक्सर पिताजी भाई से कहा करते थे, 'पढ़ोगे-लिखोगे तो अच्छे दिन आएंगे। उस समय मैं सोचती थी, अच्छे दिन का पढ़ाई से क्या मतलब है। तभी मेरे बड़े भैया ने पढ़-लिख कर अच्छी सी नौकरी कर ली। इसके बाद उनकी शादी के लिए बात चलने लगी तो मुझे लगा कि इसे ही कहते हैं अच्छे दिन। एक दिन जब लड़की वाले भैया को देखने आए तब मैंने सबके सामने हंसते हुए कहा, 'तो इसे कहते हैं, अच्छे दिन। अरे पापा, अब तो मैं अभी से पढ़ाई में जुट जाती हूं। मेरी बात पर सब खूब हंसे। आज जब भी मैं पुरानी बात याद करती हूं, तब मन में गुदगुदी सी होने लगती है।

ये भी पढ़ें-
बस पुरानी तो टिकट नया क्यों

पॉपकॉर्न तो छोड़ जाए...

जलेबी मांगने चली गई

आप हमें फेसबुकट्विटरगूगल प्लस और यू ट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकते हैं।

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

पोल

क्या महिलाओं को अपनी सेक्स डिजायर पर खुल कर बात करनी चाहिए ?

गृहलक्ष्मी गपशप

अपने इस ऐप के जरिए डॉ. अंजली हूडा सांगवान लोगों को रखती हैं फिट

अपने इस ऐप के जरिए डॉ....

"गृहलक्ष्मी ऑफ द डे"- डॉ. अंजली हूडा सांगवान

रिंग सेरेमनी से दें रिश्ते को पहचान

रिंग सेरेमनी से...

रिंग सेरेमनी, ये एकमात्रा रस्म नहीं बल्कि एक ऐसा मौका...

संपादक की पसंद

आओ, हम ही श्रीगणेश करें

आओ, हम ही श्रीगणेश...

“मम्मी गर्मी से मैं जला जा रहा हूं, मुझे बचा लो” मां...

रिदम और रूद्राक्ष की प्रेम कहानी

रिदम और रूद्राक्ष...

अक्सर जब किताबों में कोई प्रेम कहानी पढ़ती थी, तब मन...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription