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रूढ़ियों को ध्वस्त करती महिला ब्रोकर्स

पूर्णिमा गोस्वामी शर्मा

23rd May 2016

रीयल एस्टेट उद्योग में अब तक पुरुषों का वर्चस्व रहा है लेकिन पिछले कुछ सालों में इस उद्योग में महिलाओं का प्रवेश भी होने लगा है। इसके बावजूद अब तक ब्रोकरेज के काम में पुरुषों का वर्चस्व बना हुआ है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की कामयाबी की कहानियां खास तौर से प्रेरणादायक है।

रूढ़ियों को ध्वस्त करती महिला ब्रोकर्स

 

‘शुरूआती शंकाओं को दरकिनार कर पति ने कारोबार में साथ दिया’ - शांता छाबड़ा, तुलसी प्रॉपर्टीज, पुणे

शांता छाबड़ा ने अपने पति के राजस्थान से पुणे शिफ्ट करने के बाद रीयल इस्टेट कारोबार में कदम रखा। फिर भी उन्होंने अपना अनुभव बताया कि कैसे ‘शुरू-शुरू में पुरूष ब्रोकरों ने मेरे साथ बिल्कुल सहयोग नहीं किया। हालांकि कुछ वर्षों के बाद मेरे पति ने मेरा साथ दिया और अब हम एक टीम के रूप में काम करते हैं।’ यह कहते हुए उनकी आंखें में गर्व का भाव चमक रहा था।

एक घटना की याद करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार एक बैंक ने उनके क्लाइंट को ठीक प्रॉपर्टी के पंजीकरण के दिन पहले से स्वीकृत होम लोन देने से मना कर दिया। ‘हम बैंक में गए और काफी लंबी बहसों और कागजी कारवाई के बाद हमने अंतिम क्षण में जाकर प्राॅपर्टी का पंजीकरण कराया। क्लाइंट मेरे काम से काफी खुश हुआ था’ मुस्कराते हुए उन्होंने बताया। फिर भी, वह स्वीकार करती हैं कि उनका सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। ‘मगर महिलाएं अनेक दायित्वों और घर-बाहर दोनों संभालने में सक्षम तो होती ही हैं।’

 

‘मेरी बेटी को गर्व है कि उसकी मां एक ब्रोकर है’ - कविता किरण साद्रे, किरण हाउसिंग, ठाणे की संस्थापिका एवं प्रबंध निदेशक

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 ठाणे इस्टेट एजेंट्स असोसीएशन की ज्वाइंट सेक्रेटरी साद्रे ने बताया कि ‘250 सदस्यों में 10 प्रतिशत भी महिलाएं नहीं हैं।’कॉमर्स गै्रजयुट कविता किरण साद्रे शुरूआत में भवन निर्माण सामग्रियों के कारोबार में थीं। इसके बाद उन्होंने रीयल इस्टेट कंसल्टेंट बनने का फैसला किया । उन्होंने बताया कि ‘2005 में मैंने ठाणे में किरण हाउसिंग की शुरूआत की। उन्हें इस बात का दुःख है कि, ‘दुर्भाग्य’ से अनेक ग्राहक महिला उद्यमियों से मुफ्त में सेवा चाहते हैं। उन्हें लगता है कि हमें 2 प्रतिशत या 1 प्रतिशत कमीशन का भी अधिकार नहीं है। 

एक घटना की याद करते हुए साद्रे बताती हैं कि, जब मेरी बेटी की सहेली ने एक बार उससे कहा ‘तुम्हारी मां ब्रोकर है’ तो मेरी बेटी कंफ्यूज्ड हो गई थी। फिर एक बार जब मैं उसे विभिन्न साइट्स पर लेकर गई और अपने काम के बारे में बताया तो उसे मुझ पर गर्व हुआ।’

‘महिला ब्रोकरों में सौदेबाजी की मजबूत योग्यता होती है।’ - सरला मेहता, श्री इस्टेट एजेंसी, मुम्बई

 

 

 

सरला मेहता वैसे तो एक सामान्य, मृदुभाषी गुजराती गृहिणी लगती हैं, लेकिन विले पारले, मुम्बई स्थित यह रीयल इस्टेट ब्रोकर 20 वर्षों से इस पेशे में हैं।

मेहता ने संयोगवश इस क्षेत्र में कदम रखा, जब उनके भाइयों (जो भवन निर्माता है) एक भवन का निर्माण किया और वह उनमें से एक फ्लैट को बेचने में कामयाब रहीं थीं जिससे उन्हें एक लाख रुपये ब्रोकरेज की कमाई हुई। मेहता ने आर्ट्स में ग्रेजुएट हैं और बताती हैं कि, ‘ब्रोकर के काम में काफी समय और कठिन परिश्रम की जरूरत होती है। मैंने जब यह शुरू किया था तब इस क्षेत्र में अधिक संख्या में महिलाओं को आते देखकर मुझे खुशी होती है और अब उनके पास मजबूत सौदेबाजी क्षमता आ गई है जो इस प्रोफेशन में काफी मायने रखता है।’

 

सौदा पक्का होने की सच्ची खुशी से बढ़ने की प्रेरणा मिलती है’ - ऋतु अरोड़ा, पुण्याज़ प्रॉपर्टी सॉल्युशंस, बेंगलौर

 

 

 

ऋतु अरोड़ा ने एक गिफ्ट शॉप खोलकर अपना करियर आरंभ किया था। वे याद करती हैं, अंततः लोगों के साथ मेरी बहुत बढ़िया ताल्लुकात के कारण मैंने प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी में कदम बढ़ाया। ’ अब अरोड़ा को रियल्टी व्यवसाय में काम करते हुए 15 वर्ष हो चुके हैं और एक साझेदार के साथ मिलकर निर्माण कारोबार भी खोल लिया है।

वे बताती है कि, ‘आज बेंगलौर में हर जगह मेरा मजबूत नेटवर्क है और धीरे-धीरे दूसरे राज्यों में भी विस्तार कर रही हूं।’ अरोड़ा ने बताया कि यह एक कठिन कारोबार है और सिंगल पेरेंट होने के नाते उनके लिए घर और काम दोनों के बीच संतुलन बिठाना आसान नहीं था। ‘फिर भी, सौदा पक्का होने पर जो सच्ची खुशी मिलती है उसी के दम पर मैं आगे बढ़ती रहती हूं, अरोड़ा ने बताया।

 

‘मुझे अपने काम से ही अनुराग है’ - सुजाता दूरै, चैन्नई ड्रीम होम्स, चेन्नई की मैनेजिंग पार्टनर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सुजाता दुरै (नीता के नाम से लोकप्रिय) ने अपने पार्टनर के साथ मिलकर 2004 में चेन्ने ड्रीम होम्स आंरभ किया था। दुरै ने बीएड की डिग्री हासिल की है और पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं। उन्होंने अनेक व्यवसाय आजमाने के बाद रील्स इस्टेट व्यवसाय को अपनाया।

वे बताती हैं कि, ‘मैंने बहुत छोटे पैमाने पर आंरभ किया था। मेरा कारोबार बढ़ता गया है और आजकल केवल मंहगी लग्जरी प्रॉपर्टीज का कारोबार करती हूं। ’ हालांकि, उन्होंने बताया कि किस तरह चेन्ने रीयल इस्टेट एजेंट्स एसोसिएशन (सीआरईएए) में पिछले पांच वर्षों से बाकी 106 सदस्यों के बीच एक एकमात्र महिला स्थाई सदस्य बनी हुई है।

वे कहती है कि, ‘रीयल इस्टेट को खरीदना या बेचना एक जटिल प्रक्रिया है। एक अनुभव महिला रीयल्टर होने से मदद मिलती है। ’ दुरै ने स्वीकार किया कि घर और पेशेवर काम की जवाबदेहियों के बीच संतुलन बिठाना कठिन काम है। अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘तथापि, मुझे अपने काम ही से अनुराग है और इससे मुझे उपलब्धि का अहसास होता है।

‘इस उद्योग ने मुझे सुपर कॉन्फीडेंट बनाया है’ - अनुजा सिन्हा, संस्थापिका निदेशक, हमिंमग होम्स

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अभी तक एसोसिएशन ऑफ प्रॉपर्टी प्रोफेशनल्स, दिल्ली एनसीआर की पूर्व प्रेसीडेंट, मिरांडा हाउस, दिल्ली यूनिवर्सिटी की ग्रेजुएट अनुजा सिन्हा ने कॉरपोरेट सेक्टर में अपना करियर 1996 में आरंभ किया था। हालांकि 2008 में अनुजा ने अपनी कॉरपोरेट काम छोड़ दिया क्योंकि उन्हें खुद और परिवार के लिए समय की जरूरत थी। वह चहकते हुए बताती है कि, ‘उस वक्त ब्रिक्स ऐंड मोर्टार ग्लोबल का विचार की चल रहा था। मैंने इसे बतौर मार्केटिंग हेड ज्वाइन किया और बाद बाकी सब, लोग कहते हैं इतिहास की बात है।’

आगे चलकर वे नेशनल एसोसिएशन ऑफ रीयल्टर्स (एनएआर) इंडिया के बोर्ड की पहली महिला सदस्य और पहले, एनएआर- इंडिया की बैठकों में पूरे भारत से वे एकमात्र महिला प्रतिनिधि हुआ करती थीं। फिलहाल हमिंमग होम्स की संस्थापिका निदेश, सिन्हा का कहना है कि इस तरह मैंने महिला कर्मियों का झंडा बुलंद रखने की जवाबदेही खुद ही ओढ़ ली थी।’ 

सौजन्यः हाउसिंग डॉट कॉम

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