GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

योग करें और खुशनुमा जिंदगी जिएं

अर्पणारितेश यादव

4th June 2016

अगर जीवन में तनाव के चलते आपका मूड खराब हो जाता है तो हम आपको बता रहें कुछ ऐसे योगासन जिससे आप इन दोनों चीजों से छुटकारा पाकर जिंदगी को खुशनुमा तरीके से जी सकते हैं।

योग करें और खुशनुमा जिंदगी जिएं

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना बेहद मुश्किल है। कई लोग जिम सेंटर ज्वाइन तो करते हैं पर समयभाव के चलते वहां जा नहीं पाते। जिसका परिणाम यह होता है कि वह अपने स्वास्थ्य के साथ तो नाइंसाफी करते ही हैं साथ अपने रुपयों को भी गंवा देते हैं। अगर आप अपने समय के अनुसार व बिना रुपये खर्च किए अपने को फिट रखना चाहते हैं तो योगा अपनाएं। क्योंकि निरंतर योग से आप पाएंगी अच्छी एनर्जी और तनाव रहित जीवन। योग केवल हमारे शरीर को ही नहीं बल्कि हमारी काममेंद्रियों, ज्ञानेन्द्रियों को भी मजबूत बनाता है। मन की नकारात्मकता को दूर कर उसे सकारात्मकता प्रदान करता है। यह हमारे मन को प्रसन्नता व आनन्द का अनुभव प्रदान करता है। इससे बुद्धि के विकास के साथ-साथ शरीर भी स्वस्थ बना रहता है।

योगासनों से तनाव को कहें अलविदा
आज की बदलती जीवनशैली में हर एक इंसान एक-दूसरे से आगे निकलने के दबाव से गुजर रहा है। परिणाम यह कि जाने अनजाने वह कई तरह के तनाव से घिर गया है, जिससे स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। इन तनाव से छुटकारा पाना के लिए जरूरी है कि इन योगासन को अपनाएं-

पश्चिमोत्तान आसन :-

आसन पर बैठ जाएं और अपने दोनों पैरों को इस प्रकार सीधे फैला दें कि दोनों पैर आपस में मिले रहें। अब अपनी हथेलियों को जांघों पर शिथिलता पूर्वक रखें व शरीर को सीधा कर लें। श्वास लेते हुए दोनों भुजाओं को एक साथ ऊपर उठाते हुए माथे तक ले आएं और भुजाओं को कान से सटा दें। अब श्वास को छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर से ऊपरी भाग को आगे की ओर झुकाएं। अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठों को एक साथ पकडऩे का प्रयास करें। कपाल से दोनों घुटनों को स्पर्श करने की कोशिश करें। किन्तु यह ध्यान रहे कि दोनों घुटने मुडऩे न पाएं। अब 5 से 10 सेकेंड तक रूकें। इस दौरान पीठ की मांसपेशियों पर ध्यान केन्द्रित करें। अब श्वास लेते हुए पुन: हाथों को ऊपर की ओर सिर तक उठाएं और फिर अगल बगल से हाथों को घुमाते हुए उन्हें जंघाओं पर लाकर रख दें। इस क्रिया को तीन-चार बार करें।

वीरभद्र आसन :-

 

सीधा तन कर खड़े हो जाएं। अपने दाएं पैर को 2 से 4 फीट आगे ले जाएं। दाएं घुटने को हल्के से मोड़ें। इस अवस्था में बायां पैर सीधा और तलवा जमीन से लगा होना चाहिए। गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को छत की दिशा में सीधा ले जाएं। इस स्थिति में दोनों हथेलियां एक दूसरे के सामने हों। कंधों को आरामदायक स्थिति में रखें। दोनों कंधे कान से कुछ दूर होने चाहिए। सिर को सीधा रखें और सामने देखें। इस मुद्रा में 15 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बने रहें। सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में लौट आएं। इस क्रिया को दो या तीन बार करें।

भ्रामरी प्राणायाम :-

एक स्वच्छ और समतल जगह पर ध्यान लगाने वाले आसन जैसे की पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपनी दोनों आंखों को बंद तथा मन और चित्त को शांत रखें। अपने मेरुदंड को बिलकुल सीधा और दोनों हाथों को बगल में अपने कंधों के समांतर फैलाएं। अब अपने हाथों को कुहनियों से मोड़ते हुए हाथ को कानों के समीप ले जाएं। दोनों हाथों के अंगूठों से दोनों कानों को बंद कर लें। इस प्राणायाम में नाक से श्वांस भर कर धीरेधीरे गले से भ्रमर की गुंजन के साथ श्वांस छोडऩा होता है, इसलिए पहले नाक से श्वांस अंदर लें और फिर बाहर छोड़ें। इस बात का ध्यान रहे कि श्वांस बाहर छोड़ते समय कंठ से भंवरे के समान आवाज हो। यह आवाज पूर्ण श्वांस छोडऩे तक निरंतर निकालनी है और आवाज आखिर तक एक समान होनी चाहिए। ध्वनि तरंग को अपने मस्तिष्क में अनुभव करें व गुंजन करते वक्त जीभ को तालु से लगाएं। दांतों को खुला रखें किन्तु होठ बंद रहने चाहिए। इस अभ्यास को 5 से 10 बार तक करें।

अनुलोम-विलोम :- 

 

आसन में बैठकर अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से सांस अंदर की ओर फिर बाई नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। उसके बाद दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और सांस को बाहर निकालें। अब दाई नासिका से ही सांस अंदर की ओर भरें और दाई नाक को बंद करके बाई नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती कर बाहर निकालें। इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक और फिर इसका अभ्यास बढ़ाते हुए 10 मिनट तक करें।

ओम का जाप :-
साफ आसन पर पद्मासन बैठें और आंखें बंद कर पेट से आवाज निकालते हुए जोर से ओम का उच्चारण करें। ओम को जितना लंबा खींच सकें, खींचें। सांस भर जाने पर रुकें और फिर यही प्रक्रिया दोहराएं। उच्चारण तेज आवाज में करें। उच्चारण खत्म करने के बाद 2 मिनट के लिए ध्यान लगाएं और फिर उठ जाएं। इस मंत्र के नियमित जाप से तनाव से पूरी तरह मुक्ति मिलती है। ओम के जाप से दिमाग शांत होता है और बहुत-सी शारीरिक तकलीफें दूर होती हैं।

 

 


 

 

 


 
 

 

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

पोल

अगर पेपर लीक हो जाए तो क्या फिर से एग्ज़ाम होना चाहिए?

गृहलक्ष्मी गपशप

इनडोर प्लांटिंग : सुंदरता भी, फायदे भी

इनडोर प्लांटिंग...

अपने घर में पौधे लगाना जहां घर के सौंदर्य में चार...

स्मार्ट करियर गोल्स बनाने की सलाह देती हैं गृहलक्ष्मी ऑफ द डे दीपशिखा वर्मा

स्मार्ट करियर गोल्स...

गृहलक्ष्मी ऑफ द डे

संपादक की पसंद

फिक्स्ड डिपॉजिट करने के पहले जान लें ये जरूरी बातें

फिक्स्ड डिपॉजिट...

वर्तमान में कम निवेश में अधिक रिटर्न के लिए वर्तमान...

तेजाब खोखला नहीं कर पाया मेरे हौसलों को

तेजाब खोखला नहीं...

लड़कियों के चेहरे पर तेजाब डालने वालों के लिए ये कविता...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription