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जानिए गंगा की कहानी तस्वीरों की जुबानी

अर्चना चतुर्वेदी

14th June 2016

गंगा देश के लिए नदी ही नहीं भक्ति है पूजा है, मां है.... जिसे सब गंगा मैय्या कह कर पुकारते हैं। भारतीय धर्मग्रंथों में इसे पवित्र नदी माना गया है और इसे माता का दर्जा दिया गया है। गंगा केवल नदी ही नहीं, एक संस्कृति भी है। इसी पावन नदी के किनारे कभी बाणभट्ट ने कादम्बरी लिखकर अपनी लेखनी की धाक जमाई थी। इसी की बालू पर पले नन्दराज की शक्ति से डरकर सिकन्दर की सेना ने आगे बढ़ने से इन्कार कर दिया था। यहीं पाणिनी ने व्याकरण लिखा और पतंजलि ने अपना महाभाष्य लिखकर राष्ट्र को योगसूत्र दिए। चाणक्य ने भी यहीं पर अर्थशास्त्र लिखकर पूरे विश्व को सदा के लिए अपना ऋणी बना दिया। कबीर काशी के थे, पाणिनी सीमा प्रान्त से आए थे, चाणक्य पंजाब से और पतजंलि गौड़े थे। गंगा जल का स्पर्श कर वे आज भी नक्षत्र की भांति जगमग हैं। वेदों के अनुसार इसके दर्शन करने वाले की और इसमें स्नान करने वाले की सात पीढ़ियों को यह पवित्र कर देती है। तो आइए कुछ तस्वीरों के माध्यम से जानते हैं गंगा की कहानी -

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