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छोटी स्पेस को डिजाइनिंग की ज्यादा जरूरत

ऋचा कुलश्रेष्ठ

2nd July 2016

सीजन का लेटेस्ट ट्रेंड है- प्यूजन यानी पुराने और नये का सम्मिलन। एंटीक लुक को नये कलर्स के साथ मिलाकर घर को नया रूप दिया जा सकता है। पेश है नीलांजन गुप्तो से ऋचा कुलश्रेष्ठ की बातचीत के अंश-

छोटी स्पेस को डिजाइनिंग की ज्यादा जरूरत

नीलांजन गुप्तो ऐसे थीम कलर्स का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं जो घर को जीवंतता दें और शांति भी। घर में यदि एंटीक लुक वाला फर्नीचर और डेकोर होगा तो वह आपकी थीम को और उभार देगा। इसके साथ प्रयोग करने वाले रंगों में मरून, सन ड्रेंच्ड यलो, वुडलैंड ग्रीन अच्छे विकल्प हैं। 

अपने सपनों के घर के बारे में बताएं। आप इसकी सजावट या डिजाइनिंग कैसे करेंगे? 

यादगार अनुभव समेटे पुराने जमाने जैसा भव्य बंगला, जहां पत्थर व लकड़ी जैसी नैसर्गिक चीजों का समावेश किया जा सके। साथ ही एक ओपन फ्लोर प्लान हो जहां पुरातन सभ्यता वाले बड़े पोर्च हो, लिविंगरूम में फायरप्लेस हो, टाइमलैस वैल्यू वाले एलीगेंट मास्टर बेडरूम हों और एक फंक्शनल किचन हो जिसमें सही स्पेस प्लानिंग हो। बहुत सी प्राकृतिक रोशनी हो, ताजा हवा के उपाय हों। कुल मिलाकर वहां का वातावरण शांत, सुरम्य और ईको फ्रेंडली हो। इंटीरियर डिजायनिंग के नए ट्रेंड क्या हैं?

 


रोज क्वार्टज़ व शांति, प्राकृतिक व ऑर्गेनिक सामग्रियों का इस्तेमाल, म्यूटेड कलर्स व मोनोक्रीम थीम, सॉफ्ट टोन्स, ईको फ्रेंडली, आवश्यकतानुसार रोशनी, हॉट मेटल्स, मॉडर्न देसी, रेट्रोटेक और 70 के दशक से प्रेरित थीम आजकल नये ट्रेंड हैं।

छोटी जगहों को आप कैसे डिजाइन करते हैं? 

माना जाता है कि छोटी स्पेसेज को इंटीरियर डिजाइनिंग की जरूरत नहीं होती लेकिन सच यह है कि ऐसी जगहों को कैलकुलेटिव स्पेस प्लानिंग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। आपके पास कम स्पेस है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप क्रिएटिव यानी रचनात्मक नहीं हो सकते। ऐसी जगह के लिए सही रंग, टेक्सचर शेल्वज़ और योजनाबद्ध स्टोरेज ही इंटीरियर का मंत्रा है। आप कमरे के अलग-अलग हिस्से की जोनिंग या मैपिंग से शुरूआत कर सकते हैं, ताकि यह देख सकें कि सब मिलकर कैसा लगेगा। छोटे कमरे के लिए कुछ टिप्स इस प्रकार हैं-

 

 

  •  कमरे में ऐसा बंकबेड डालें जिसमें स्टडी भी हो तो एक सोफे की जगह बच सकती है।
  •  कमरे में बनाबनाया स्टोरेज, बेड के नीचे स्टोरेज, दरवाजों के पीछे छिपी लटकती रेल्स और दीवारों की खूंटियों हों, ताकि कमरा साफ- सुथरा रहे।
  •  दीवार पर लटके शेल्वज या सीढिय़ों के नीचे वाली स्पेस को स्टोरेज के लिए केबिनेट यूनिट या मेज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आप छोटी कंसोल टेबल या ड्रॉप-डाउन टेबलटॉप भी रख सकते हैं, ताकि जब उनका इस्तेमाल न हो, तब उन्हें हटाकर रखा जा सके।

 

आपकी पसंदीदा इंटीरियर डिजाइनिंग?

इंटीरियर डिजाइनिंग में मुझे समकालीन यानी कंटेम्परेरी और मॉडर्न का सम्मिश्रण पसंद है। कमरे को डिजाइन करते समय आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या होता है, जिस पर खास ध्यान देना जरूरी हो?

 


इसके लिए मैं अपने क्लाइंट के लाइफस्टाइल और डिजाइन को एकसाथ रखकर देखता हूं ताकि इंटीरियर पर एक नये नजरिये के साथ काम किया जा सके और उसे इच्छित रूप दिया जा सके। 

छोटी जगह में बुक शेल्वस को कैसे फिट किया जाना चाहिए?

पहले तय करें कि आपको कितनी किताबों का स्टोरेज करना है। कम स्टोरेज के लिए किताबों के फ्लोटिंग शेल्वज (दीवारों पर लटकने वाले) ट्राय कर सकते हैं, ताकि आपका फर्श फ्री रहे। अगर आपके पास बहुत ज्यादा किताबें हैं तो उनके लिए मल्टीफंक्शनल शेल्विंग सही रहती है।


एक छोटे व बड़े कमरे के लिए रोशनी का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए?

  •  रोशनी के लिए बहु-विकल्प योजना बनाएं, उदाहरण के लिए कमरे के ऊंचे भागों पर हाई रिसेसिंग स्पॉट लाइट की इनडायरेक्ट व्यवस्था रखें, पेडस्टल लैम्प हों। अपने पसंदीदा कलात्मक वॉल डेकोर पर आप वॉल ब्रेकेट लाइट का
  • फोकस रखें, जो काफी अच्छा लगता है। बालकनी या बरामदा में बगीचे के लिए जगह का उपयोग विभिन्नता से कैसे कर सकते हैं? इसके विकल्प तो अंतहीन हैं, बालकनी और बरामदे को आप बैठने के लिए, पुस्तकालय के लिए, स्टडी के लिए, योग के लिए, रात में भोजन करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
  •  बाहर बैठने के लिए इन जगहों पर सिर्फ कुछ फर्निशिंग एलीमेंट्स या डेकोर एक्सेसरीज़ को जोडऩा होगा, जिनमें कारपेट, विंड चार्म, केंडल्स, मिरर्स और हैंगिंग लाइट्स शामिल हैं।
  • इसका उपयोग स्टडी की तरह करने के लिए वहां एक बुकशेल्फ व पफी शामिल करें या वहां दिनभर की थकान के बाद बैठने के लिए स्विंग चेयर डालें। आप इसका इस्तेमाल दो के लिए बारबेक्यू रसोईघर या रात्रि भोजन हेतु छोटी जगह के लिए भी कर सकते हैं।
  •  उबाऊ बालकनी को एक सुंदर बगीचे में तब्दील करना काफी आसान है, इसके लिए वहां खूबसूरत पौधे, हैंगिंग पॉट्स लगाकर वर्टिकल बगीचा बनाएं। बालकनी को खूबसूरत बनाने के लिए अलग-अलग आकार के फ्लावर पॉट्स, लकडिय़ों, पत्थरों, मिट्टी व पानी के झरनों जैसे नैसर्गिक तत्वों का उपयोग करें।

इंटीरियर डिजाइनिंग और इंटीरियर डेकोरेशन में क्या फर्क है?

इंटीरियर डिजाइनिंग व्यावसायिक होती है, कोई व्यक्ति जो इसके लिए व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित है, वही किसी स्पेस को सही अनुपात में सही रूप दे सकता है। उन्हें एग्रोनॉमिक्स, लाइटिंग, सामग्री और स्पेस प्लानिंग की गहन जानकारी होती है। जबकि इंटीरियर डेकोरेशन करने वाला एक ठेकेदार होता है, जो इंटीरियर डिजायनर के मार्गदर्शन में ठेके पर काम करवाता है। उसका काम सामग्री लाना, मजदूरों को व्यवस्थित करना व इंटीरियर डिजाइनर के डिजाइन को सही रूप में ढालना होता है।

गृहलक्ष्मी के पाठकों के लिए आपका संदेश?

आपका घर आपका प्रतिबिंब है, जो आपके नेचर और आपकी जीवनशैली को प्रतिबिंबित करता है। आपका घर सही प्रकार से प्लान  किया गया और कार्यक्षमता वाला होना चाहिए। यदि आप घर की इंटीरियर डिजाइनिंग करने की योजना बना रहे हैं तो व्यावसायिक परामर्श प्राप्त करने में संकोच न करें। इससे निश्चित ही आपका बहुमूल्य समय और अनावश्यक खर्च की बचत होगी।



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