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योग के अलावा इन जगहों के लिए भी चर्चित है मुंगेर

गृहलक्ष्मी टीम

14th December 2016

मुंगेर के दर्शनीय स्थल बिहार की आपराधिक घटनाओं के बारे में चर्चा तो सुनी होगी। लेकिन क्या आपने बिहार के दर्शनीय स्थलों के बारे में सुना है। चलिए आज हम सैर करते हैं योग नगरी मुंगेर की। महाभारत में मुंगेर शहर का जिक्र मंदोदरी के रूप में है। बिहार स्कूल ऑफ़ योग के लिए प्रसिद्द मुंगेर में कई सारे दर्शनीय स्थल हैं। आईये जानते हैं कौन-कौन सी हैं ये जगह -

योग के अलावा इन जगहों के लिए भी चर्चित है मुंगेर

 

1. चंडिका स्थान- माँ दुर्गा के 51 शक्तिपीठों से में यह एक है। पुराणों के अनुसार माँ दुर्गा की बायीं आंख यहाँ पर गिरी थी। एक कहावत है कि विक्रमादित्य ने मां से तीन वर मांगे- पहला वो अमृत दे दो, जिसे आप राजा कर्ण को देती है। दूसरा वो सोने का भंडार दे दो, जिसे आप रोजाना राजा कर्ण को देती हो और तीसरा यह मां के नाम के पहले राजा विक्रमादित्य का नाम हो। मां ने वचन के मुताबिक उन्होंने तीन वर दिए। इसलिए आज भी यहाँ माँ दुर्गा की पूजा से पहले राजा विक्रमादित्य का नाम लिया जाता है। विक्रमादित्य को वर देने के बाद माँ उदास हो गई। माँ ने सोचा कि जब राजा कर्ण आएगा तो मैं उसे क्या दूंगी। इस कारण मां ने खौलते हुए तेल की कड़ाही को उलट दिया और उसके अन्दर समा गई। इस मंदिर में आज भी वो कड़ाहीनुमा गुफा मौजूद हैं। इस मंदिर में माँ के नेत्रों की पूजा होती हैं ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों को आंखों की बीमारी होती है, माता के दीये से उठने वाली लौ का काजल लगा लेने से वह बीमारी ठीक हो जाती है। इस वजह से यहां दूर-दूर से लोग मां चंडिका की पूजा अर्चना करने आते हैं।

 

2. कष्टहरनी घाट-  यह घाट अपने नाम को सार्थक सिद्ध करता है। उत्तरवाहिनी गंगा के किनारे उगते सूर्य और डूबते सूर्य को देखना बहुत ही मनभावन होता है। इस घाट पर जाने में सचमुच में आपको आपको ऐसा लगेगा किसी ने आपकी पीड़ा हर ली हो। गंगा किनारे अठखेली करती डॉलफिन को देखकर मन प्रसन्न हो उठता है। माना जाता हैं कि भगवान राम जब मिथिला से देवी सीता से शादी कर लौट रहे थे तो उन्होंने अपनी थकान दूर करने के लिए यहीं पर विश्राम किया था। इस पवित्र घाट के समीप ही नदी के बीच में माता सीताचरण का मंदिर स्थित है। इसे मनपत्थर के नाम से भी जाना जाता है। यहां जाने के लिए नावों का सहारा लिया जाता है।

3. मछली तालाब - शिव मंदिर के बीचों बीच बना मछली तालाब लोगों के आकर्षण का केंद्र है। यहाँ रंगीन मछलियाँ अठखेली करती दिख जाएँगी जो वातावरण को और मनमोहक बनता है। यहाँ शिव मंदिर के साथ साथ पंचमुखी हनुमान का मंदिर भी है। चारों ओर लगे उद्यान और तालाब के किनारे लगे फव्वारे मंदिर की सुन्दरता को निखारते हैं। इस मंदिर को श्री सेठ गोयनका द्वारा बनवाया गया था,इसलिए इसे गोयनका शिवालय भी कहते हैं।

 

 

4. मुंगेर का किला - मुंगेर का किला बेहद प्रसिद्ध है। इसे बंगाल के अंतिम नवाब मीरकासिम ने बनाया था। इस किले में चार दरवाजें हैं, जिसमें उत्‍तरी दरवाजें को लाल दरवाजा के नाम से जाना जाता है। यह विशाल दरवाजा नक्‍काशीदार पत्‍थरों से हिन्‍दू और बौद्ध शैली में बना हुआ है। किले में स्थित गुप्‍त सुरंग पर्यटकों के लिए मुख्‍य आकर्षण का केंद्र है। इस सुरंग का इस्तेमाल राजा एक शहर से दुसरे शहर जाने के लिए करते थे।

5. पीर शाह नूफा का गुंबद- पीर शाह नूफा का गुंबद किला के दक्षिणी द्वार के सामने एक टीले पर स्थित है। गुंबद के अंदर नक्‍काशी किए हुए पत्थर हैं। यह गुंबद हिंदू और मुस्लिम दोनों संप्रदायों के लिए समान रूप से पूज्‍यनीय है। पीर शाह नुफा एक सूफी संत थे। इन्हें इनके गुरु ख्वाजा मोईनुद्दीन चिस्ती ने मुंगेर भेजा था।

 

6. बिहार स्कूल ऑफ़ योग- बिहार स्कूल ऑफ़ योग की स्थापना स्वामी सत्यानन्द सरस्वती ने सन 1964 में की थी। यह विश्व का प्रथम योग विश्वविद्यालय है। इसे गंगा दर्शन के नाम से भी जाना जाता है। योग की शिक्षा प्राप्त करने के लिए विश्व के कोने-कोने से लोग आते हैं।

7. सीता कुंड - इस कुंड का नाम भगवान राम की धर्मपत्‍नी सीता के नाम पर रखा गया है। कहा जाता है कि जब राम सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाकर लाए थे तो उनको अपनी पवित्रता साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी। धर्मशास्‍त्रों के अनुसार अग्नि परीक्षा के बाद सीता माता ने जिस कुंड में स्‍नान किया था यह वही कुंड है। यहां पर माघ मास के पूर्णिमा (फरवरी) में स्‍नान करने के लिए भारी संख्‍या में श्रद्धालु आते हैं। इस कुंड का पानी कभी-कभी 138° फॉरेनहाइट तक गर्म हो जाता है।

 

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