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गर्मी और उमस में बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण बढ़ा

ऋचा कुलश्रेष्ठ

1st August 2016

मॉनसून के मौसम में जब बारिश होने लगती है और उमस बढ़ने लगती है तो अनेक बीमारियां भी तेजी से बढ़ने लगती हैं क्योंकि बैक्टीरिया के पनपने के लिए यह अनुकूल मौसम बन जाता है।

गर्मी और उमस में बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण बढ़ा

मॉनसून निश्चित रूप से भीषण गर्मी से राहत देता है लेकिन इसके साथ ही कई समस्याओं को बढ़ा भी देता है। बारिश और उमस बढ़ने के साथ कई सारे वायरल, बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण सक्रिय हो जाते हैं। इस दौरान डेंगू, मलेरिया, कंजंक्टिवाइटिस तथा कई अन्य वायरल बीमारियां भी तेजी से फैलने लगती हैं। उमस भरे मौसम में डिहाइड्रेशन की समस्या भी काफी बढ़ जाती है। 

बीमारियां

मानसून को शुरू हुए अभी कुछ समय ही हुआ है और पेट और अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों, तेज बुखार तथा आंखों के संक्रमण से पीड़ित मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है। गंदगी, दूषित भोजन और जल की समस्या इस मौसम में बढ़ जाती है। सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार जहां आम हो जाते हैं वहीं लोग पेट संबंधी संक्रमणों की चपेट में भी आ जाते हैं।इस वजह से गैस्ट्रोएंट्राइटिस, टायफॉयड तथा हेपेटाइटिस जैसे बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं।

कारण

इस मौसम में हर साल डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां भी लोगों को जकड़ लेती हैं। लिहाजा डॉक्टर हमेशा अपने मरीजों को स्वास्थ्य, भोजन-पानी की शुद्धता का ख्याल रखने तथा बीमारियों के लक्षणों से सतर्क रहने की सलाह देते हैं। इनमें से यदि कोई लक्षण उभरता है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। इस मौसम में सड़क किनारे खानपान से भी पूरा परहेज़ करना चाहिए।”

संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका मानसून के दौरान बढ़ने वाले इन रोगों के कारणों तथा इनके फैलने के बारे में पूरी जानकारी रखना है। तभी आप इन रोगों से खुद को बचाने के उपायों पर अमल कर सकते हैं। इस दौरान होने वाली बीमारियों पर नजर डालते हैं-

डेंगू चिकनगुनिया

डेंगू और चिकनगुनिया क्रमशः एडीस एजिप्टी तथा एडीस एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने फैलने वाला खतरनाक संक्रमण होता है और ये मच्छर आम तौर पर दिन के वक्त काटते हैं। इन रोगों के एडवांस्ड या गंभीर स्थिति में पहुंच जाने पर ये जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। इन रोगों के सामान्य लक्षणों में बुखार, बदन दर्द, जोड़ों का दर्द और शरीर पर दाने निकलना है।

मलेरिया

मलेरिया भी मच्छरों के काटने से फैलने वाला रोग है जो मानसून की पहली बौछार के बाद तेजी से बढ़ता है। यह बैक्टीरियल संक्रमण मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है और ठहरा हुआ पानी इन मच्छरों के पनपने का माकूल ठिकाना होता है। भारत में हर वर्ष मलेरिया के कारण बहुत सारे लोगों की मौत हो जाती है। इसके लक्षणों में थोड़े-थोड़े अंतराल पर बुखार आना, बार-बार कंपकंपी छूटना, मांसपेशियों में दर्द तथा कमजोरी लगना आदि है और मानसून के दौरान मलेरिया के मामले सबसे ज्यादा देखे गए हैं।

अपने आसपास के इलाकों को साफ और सूखा रखते हुए मच्छरों को पनपने से रोकने, पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनने, दिन के वक्त भी मच्छर भगाने वाले कॉयल और रिपेलेंट्स का इस्तेमाल करने से इन रोगों से बचा जा सकता है। अपने घर या दफ्तर के आसपास ठहरे हुए पानी को हटाना और वाटर कूलर एवं टेंक को सूखा रखना भी जरूरी है। लिहाजा मानसून के शुरू होते ही आपको तत्काल सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि अपने आसपास के क्षेत्र को साफ और सूखा रखें। इस मॉनसून को खुशनुमा और स्वस्थ बनाने के लिए स्वास्थ्य संबंधी कुछ सुझावों का पालन करें-

मच्छरों से बचें

डेंगू और मलेरिया के मामले गर्मी के मौसम के साथ ही शुरू हो जाते हैं लेकिन मॉनसून के मौसम में जब बारिश होने लगती है और उमस बढ़ने लगती है तो ये मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं क्योंकि बैक्टीरिया के पनपने के लिए यह अनुकूल मौसम बन जाता है। जगह-जगह जमा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का माध्यम बन जाता है जबकि हवा में मौजूद नमी उनकी वृद्धि के लिए माकूल माहौल बनाती है इसलिए मॉनसून के मौसम में बैक्टीरिया-जनित बीमारियां खौफनाक तरीके से पांव पसारने लगती हैं। वैसे तो ऐसे वातावरण में आप मच्छरों के काटने से बच नहीं सकते लेकिन कुछ उपायों से इनके आतंक को कम किया जा सकता है।

पानी इकट्ठा न होने दें

अपने बगीचे और लॉन सहित आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। एयर कूलर में भी पानी जमा रहता है जहां मच्छरों को पनपने में सहूलियत होती है। इन स्थानों को बार-बार साफ करें और मच्छर मारने वाली दवाओं का निरंतर छिड़काव करते रहें। कहीं भी जलजमाव होने की शिकायत नगर निगम अधिकारियों को दें।

शरीर ढकने वाले कपड़े पहनें

ऐसे कपड़े पहनें जो आपके शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढंक सके। दो महीनों के लिए अपनी निकर, स्लीवलेस ड्रेस और स्कर्ट न पहनें। पूरी बाजू की शर्ट और पैंट जैसी पोशाकें पहलें ताकि मच्छरों से आपकी त्वचा ज्यादा से ज्यादा बची रह सके।

मच्छर मार दवा छिड़कें

हर जगह मच्छर मारने वाली दवाओं का इस्तेमाल करें, कार्यस्थल पर भी। मच्छर अक्सर ऑफिस के डस्टबिन और टेबल के नीचे पनपते हैं और यह खतरनाक हो सकता है। अपने बैग में मच्छरों से बचाने वाली क्रीम रखें और इसका इस्तेमाल पैरों तथा हाथों पर करें। बस और मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन में भी यह क्रीम लगाकर रखें। मच्छर कार में भी पनप सकते हैं। मच्छरों के पनपने से बचने के लिए हर रात अपनी कार में मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव करें।

बाहर के भोजन और दूषित पानी से बचें

मानसून के दौरान बाहर का भोजन करने से बचें क्योंकि दूषित भोजन और दूषित पानी से भी बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। हेपेटाइटिस और टायफॉयड जैसी जलजनित बीमारियां भी मानसून के दौरान आम हो जाती हैं। 

(डॉ. राजेश कुमार, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, पारस हॉस्पिटल, गुड़गांव और डॉ. सतीश कौल, जनरल फिजिशियन, कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल-गुड़गांव  से बातचीत के आधार पर)

 

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