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भइया मेरे! राखी के बंधन को कुछ ऐसे निभाना

अन्शु पाठक

17th August 2016

इस रक्षाबंधन के त्योहार पर हर बहन अपने भाई से यह वचन लें कि वह किसी अन्य भाई की बहन को बुरी नजर व गलत नीयत से नहीं देखेगा, फिर चाहे 16 साल को हो या साठ बरस का..

भइया मेरे! राखी के बंधन को कुछ ऐसे निभाना

 


रक्षाबंधन का त्योहार हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को संभवतः इसलिए मनाया जाता है इस दिन सरस्वती की आवृत्ति पृथ्वी पर अत्यधिक प्रतिष्ठित रहती हैं भविष्यपुराण में कथा आती है दानवराज बली की जिन्होंने वामन अवतार के रूप में आए भगवान विषणु को तीन पग भूमि देने का वचन दिया और वामन ने दो डग में पृथ्वी व आकाश नाप लिए तो तीसरा पग रखने को राजा बलि ने अपना शीश आगे कर दिया। विष्णु के प्रसन्न होने पर बलि ने उनसे वर मांगा कि विष्णु सदा के लिए उनके महल में रह जाएं। भगवती लक्ष्मी विष्णु भगवान के वापस न लौटने पर स्वयं बली के पास गई व उन्हें रक्षासूत्र बांध कर अपने पति को वापस बैकुंठ ले जाने का उपहार मांगा। यही राखी का पहला विवरण, आज भी रक्षासूत्र बांधते समय उस प्रसंग को 'येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबला' श्लोक के उच्चारण से याद किया जाता है।

कलांतर में अनेक कथाएं इस पवित्र त्योहार से जुड़ती चली गई। भागवत पुराण, अग्निपुराण महाभारत सब में किसी न किसी रूप् में रक्षासूत्र का वर्णन है। मुगलकाल में रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजी थी, तो सिकंदर की पत्नी ने पोरस को। राजपूत रानियां पड़ोसी राज्यों के शक्तिशाली राजाओं को रक्षासूत्र भेज अपने पति की रक्षा का वचन लेती थी। द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण की उंगली में बांधा गया जरा सा चीर चीरहरण के समय कैसे रक्षा सूत्र बना, हम सभी जानते हैं।

रक्षा बंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम व असीम स्नेह का प्रतीक है और इस दिन हर भाई पालने में लेटा नन्हा शिशु हो या अस्सी पार के दादाजी की कलाई रंग-बिरंगी राखी से सजी मिलेगी व ललाट पर होगा रोली अक्षत तिलक।

कैसा विचित्र समाज है मेरा कि जो भाई सुबह बहन से राखी बंधवाते समय उसके सिर पर स्नेह से हाथ रखकर उसकी रक्षा करने का वचन देता है वही अपनी गली से बाहर आते ही राह चलती किसी और की बहन का छेड़ता है बस में सट कर खड़ा होता है, चाय पान की दुकान पर घंटों आने-जाने वाली लड़कियों को घूरता है?

संपूर्ण विश्व में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां ये त्योहार मनाया जाता है। जिस देश में बहन की ये त्योहार मनाया जाता है। जिस देश में बहन की रक्षा की जरूरत पड़ती हो उसी देश में छेड़छाड़ की घटनाएं सबसे ज्यादा घटती हैं। क्या ये त्रासदी नहीं? एक ओर जहां पश्चिम ने औरत को स्वतंत्रता दी कि वो अकेली कहीं भी किसी भी समय आ जा सकती हैं, वहीं दूसरी ओर नारी को देवी कहने वाले हमारे समाज ने, आजादी तो दूर की बात, पुरूष के बिना स्त्री को घर से निकलने का अधिकार देना भी वांछनीय नहीं समझा, क्यों?

भारतीय पुरूष की मानसिकता आज भी वही है कि चाहे जैसे भी हो, औरत को दबाए रखो। आज जब महिलाएं पढ़-लिख कर उंचे ओहदों पर कार्यरत हैं तो पुरूष के अहम को ठेस लगी है और वो कदम-कदम पर स्त्री का उत्पीड़न कर रहा है, फिर चाहे राह चलते छींटाकशी हो या ऐसिड अटैक। यह पुरूष की असुरक्षा की भावना ही तो है । क्या राह चलती, मेट्रो, बस मे सफर करती स्त्री किसी अन्य पुरूष की बहन, मां, बेटी, पत्नी, बहू नहीं? हमारी फिल्में भी ऐसी घटनाओं के लिए कम जिम्मेदार नहीं, जहां अक्सर ही हीरो गाने में नायिका से छेड़खानी करता है व गाना खत्म होते-होते नायिका पट जाती है। अब ये देखकर युवा स्वयं को किसी सलमान खान से कम तो समझते नहीं। किंतु जो लड़की ऐसी ईवटीजिंग का शिकार बनती है उससे पूछिए क्या गुजरती है? क्या ईव टीजिंग लिटिल रेप नहीं?

आइए अब गंभीरता से विचार करें कि आज के समय में रक्षाबंधन का क्या अर्थ है जब देश की राजधानी दिल्ली को ‘रेप कैपिटल’ और वल्र्ड की मोस्ट डेंजरस’ सिटी कहा जाने लगा है । आज क्या ये उचित न होगा कि इस वर्ष रक्षाबंधन के त्योहार पर हर बहन अपने भाई के उपहार स्वरूप् यह वचन ले कि वह किसी अन्य भाई की बहन को बुरी नजर व गलत नीयत सेनहीं देखेगा, फिर भाई चाहे 16 साल का हो या साठ बरस का क्योंकि छेड़ने का अवसर तो कोई भी नहीं छोड़ता। इस बार हर बहन जब आरती का दीप जलाए तो वचन ले अपने भाई से कि वो भी समाज को अपने श्रेष्ठ संस्कारों से आलोकित करेगा।

जब भाई के माथे पर कुमकुम केसर तिलक लगाए तो ले वचन कि भाई चित्त का शुद्धिकरण न केवल अपनी बहन के लिए बल्कि हर भाई की बहन के लिए भी रखेगा, जब अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधे तो वचन ले कि भाई नैतिक आचरण का, सिद्धांतों के मूल्यों को समझने का दायित्व भी उठाएगा और यदि बहन ऐसा करने में शर्म महसूस करती है तो फिर तैयार रहे छेड़े जाने का कष्ट झेलने को क्योंकि वो पुरूष जो आपके टीज़ करेगा किसी और का भाई ही तो होगा। तो अब इस रक्षा बंधन से करने देना, होने देना, झेलना, भोगना, भुगतना, सहन करना के बंधन से स्वयं की रक्षा करें या फिर जब तक पुरूष ‘हाउ टू ट्रीट वूमेन’ नहीं सीखता, तब तक अपनी रक्षा स्वयं किजिए, साथ रखिए जूडो कराटे व मार्शल आर्ट और फिर जहां कहीं भी कोई पुरूष अभद्र हरकतें करता दिखें तो साहस से उसकी आंखों में देखकर जोर से चीख कर याद दिलाएं ‘भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना।’

 

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