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फिक्स्ड डिपॉजिट करने के पहले जान लें ये जरूरी बातें

गृहलक्ष्मी टीम

1st July 2017

फिक्स्ड डिपॉजिट करने के पहले जान लें ये जरूरी बातें

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वर्तमान में कम निवेश में अधिक रिटर्न के लिए वर्तमान में काफी सारे विकल्प मौजूद हैं। इन विकल्पों में म्यूच्यूल फंड, शेयर, बॉन्ड्स आदि मौजूद हैं। हालांकि एफडी का महत्व इस दौर में भी उतना ही है। इसकी वजह है बेहतर ब्याज दर, अच्छा रिटर्न और कम रिस्क। निवेश में कम जोखिम के कारण ही फिक्स्ड डिपॉजिट आज भी प्रचलित है। हालांकि पहली बार एफडी में निवेश को लेकर आपके मन में कुछ शंकाएं हो सकती हैं, जैसे क्या इसके ब्याज पर टैक्स लगता है या किस दर से टैक्स लगता है। तो इस आर्टिकल के जरिए कीजिए अपनी शंकाओं का समाधान।

 

  • सबसे पहले आप यह जान लें कि फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) राष्ट्रीयकृत बैंक, निजी बैंक के अलावा पोस्ट ऑफिस में भी कर सकत हैं। पोस्ट ऑफिस में एफडी सबसे सुरक्षित मानी जाती है। इसके अलावा कॉर्पोरेट एफडी भी कर सकते हैं, लेकिन इसमें जोखिम अधिक होता है।

 

  • सामान्यत एफडी की ब्याज दर अच्छी होने पर रिटर्न भी अच्छा मिलता है, लेकिन तभी जब आप एफडी बीच में न तुड़वाएं। परिपक्व तारीख पर ही एफडी निकालें। कई बैंक उनकी स्कीम के तहत कुल फिक्स्ड राशि का कुछ हिस्सा निकालने की सुविधा देती हैं, लेकिन उस स्थिति में आपको एफडी की परिपक्व तारीख पर पूरा लाभ नहीं मिलेगा। बैंक में एफडी करवाते समय बैंक की स्कीम की अच्छी तरह जानकारी ले लें।

 

  • एफडी के ब्याज पर कर देना होता है, अगर यह आपकी कुल आय में इनकम फ्रॉम अदर सोर्स में आती है। अगर वित्तीय वर्ष में ब्याज की रकम 10,000 से कम है तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन अगर यह राशि 10,000 रुपए से अधिक है, तो इस पर 10 फीसदी टीडीएस कटता है। हालांकि आयकर का मार्जिनल रेट 20 से 30 फीसदी के बीच रहता है, लेकिन अतिरिक्त टैक्स लाइबिलटी होने पर रिटर्न फाइल करते समय टैक्स का भुगतान करना पड़ता है।

 

  • आयकर अधिनियम 80सी के तहत एफडी के ब्याज पर छूट मिलती है, लेकिन यह छूट सिर्फ उन एफडी पर मिलती है जो पांच साल के लिए की गई हों। अगर आप फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज पर छूट पाना चाहते हैं, तो टैक्स बचाने का विकल्प देने वाली स्कीम चुनें।

 

  • बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के समय आम तौर पर लोग सोचते हैं कि परिवक्व तिथि के पहले एफडी निकालने पर ब्याज कम मिलेगा और रिटर्न प्रभावित होगा। यह काफी हद तक सही भी है, लेकिन कई बैंक और वित्तीय संस्थानों में बिना पेनल्टी आप आंशिक राशि निकाल सकते हैं। निवेश के पहले संस्थान से इस बारे में पूर्णत जानकारी ले लें।

 

क्या है टीडीएस

टीडीएस का मतलब होता है टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स। टीडीएस, व्यक्ति को होने वाली इनकम से टैक्स काटने को कहते हैं। सैलरी, ब्याज, लॉटरी आदि की इनकम पर टीडीएस कटता है। इसके अलावा कॉन्ट्रैक्टर, कमीशन और ब्रोकरेज को प्राप्त हुए पेमेंट पर, प्रोफेशनल-तकनीकी सेवा की फीस पर, इंश्योरेंस, किराए के भुगतान पर और एनएसएस के तहत जमा राशि पर भी टीडीएस काटा जाता है। टीडीएस कटने के बाद भी अगर कोई टैक्स बकाया रहता है तो उसे चुकाना जरूरी होता है। वहीं इनकम टैक्स से टीडीएस ज्यादा होने पर रिफंड क्लेम किया जाता है।

 

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