GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

जुनूनी अपराध है स्टॉकिंग

प्राची भारद्वाज

4th November 2016

फिल्म ' रांझणा में हीरो को हीरोइन का प्यार पाने हेतु पीछा करते, ज़बरदस्ती अपनी कलाई काटते दिखाया है, जिस पर हीरोइन हामी भर देती है। तो क्या आशिकों के दिलों में ये भावना कि 'होंठों पर तेरे ना है लेकिन दिल में तो हां है बरकरार रहेगी?

जुनूनी अपराध है स्टॉकिंग

 

 सन 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून की छात्रा प्रियदर्शिनी मट्टू का उसके ही घर में बलात्कार व हत्या कर दी गई। अपराध करने वाला संतोष सिंह कॉलेज में प्रियदर्शिनी से एक वर्ष आगे पढ़ रहा था और 2 वर्षों से उसके पीछेथा। प्रियदर्शिनी ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और उसे पुलिस संरक्षण भी दिया गया था, फिर भी अपराध को अंजाम दे दिया गया। सन 2011 में दिल्ली विश्वविद्यालय की एक और छात्रा राधिका तंवर की उसके पीछा करने वाले 25 वर्षीय विजय ने गोली मार कर हत्या कर दी। कारण था बदला। करीब ढाई सालों से परेशान करने पर राधिका के मित्रों ने विजय को पीट दिया था।

स्टॉकिंग का कानूनी परिप्रेक्ष्य
स्टाकिंग का शब्दकोश अर्थ है किसी की ओर दूसरे इंसान या झुंड का अवांछित या जुनूनी तौर से ध्यान देना। स्टॉकिंग के परिणाम में लड़की के साथ दुष्कर्म या उसकी हत्या के अलावा तेज़ाब फेंकने के मामले भी हैं। लक्ष्मी अगरवाल सुबूत है कि स्टॉकिंग करने वाला घिनौने अपराध कर सकता है। दिसंबर 2012 के निर्भया कांड के बाद आये आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 में स्टॉकिंग को भी शामिल कर दिया गया। इसके अनुसार स्टॉकिंग एक अपराध है और पकड़े जाने पर 3 साल तक की जेल और जुर्माना, दूसरी बार पकड़े जाने पर 5 साल की जेल हो सकती है।

साइबर स्टॉकिंग - ऑनलाइन पीछा
भारत के पहले साइबर स्टॉकिंग केस में मनीष कथुरिया को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा। मनीष, ऋतु कोहली के नाम से अश्लील चैट करता था जिसके कारण ऋतु को कई अश्लील फोन आने लगे। ऋतु ने पुलिस का सहारा लिया और पुलिस ने बिना समय बर्बाद किए मनीष को ऋतु कोहली का शील भंग करने के आरोप में पकड़ा।

क्या कहते हैं कानून के रखवाले
सीनियर वकील पिंकी आनंद कहती हैं कि स्टॉकिंग केस को फौरन निबटाना चाहिए वरना परिणाम घातक हो सकते हैं, जैसे बलात्कार या शारीरिक उत्पीडऩ। इस संशोधन से पीडि़त, आक्रामक के खिलाफ निरोधक आदेश ले कर सुरक्षित महसूस कर सकता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लौ का मानना है कि आवश्यकता है ऐसे अपराधों से जुड़ी हर आशंका को संभालने, कोर्ट को ऐसे आर्डर पास करने की शक्ति की, जिससे पीडि़त को हर नुकसान से बचाया जा सके। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व मुख्य निदेशक संस्कार सेन कहते हैं कि ऐसे कानून लागू किए जाएं जिनसे अपराधी जल्द पकड़े जाएं और अधिक महिला पुलिस भर्ती हो।

मनोवैज्ञानिकों का मत
अवधेश शर्मा के अनुसार स्टॉकर अपनी फेंटसी दुनिया में किसी स्त्री के साथ एक रिश्ता निभाते हैं और जब असल दुनिया में इनको ठेस पहुंचती है तो वो सह नहीं पाते। आपराधिक मनोविज्ञानी रजत मित्रा कहते हैं कि यदि पांचवे फोन पर महिला एक वाक्य भी बोलती है तो स्टॉकिंग सौ बार फोन करेगा ताकि वो 'हां तक पहुंचे।

तो कैसे बचाएं खुद को?

  • अकेले, खासकर रातों को न निकलें।
  • उसके परिवार तथा पुलिस द्वारा दबाव बनाएं।
  • स्टॉकर के निकट आने की स्थिति में पुलिस
  • को 100 नम्बर पर फोन करें। स्टॉकर से बदतमीजी ना करें।
  • अपने साथ कालीमिर्च-स्प्रे या
  • चाकू रखें।
  • आत्मरक्षा हेतु तकनीक सीखें।
  • पुलिस कमिश्नर के पास लिखित शिकायत
  • दर्ज कराएं।
  • अपने आइएसपी विक्रेता (जैसे बीएसएनएल)
  • तथा ईमेल विक्रेता (जैसे याहू, हॉटमेल) के
  • यहां भी उत्पीडऩ की शिकायत दर्ज कराएं।

आवश्यकता है तो बस जागरूकता, कुछ बातों का ध्यान रखने और हिम्मत रखने की।

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

पोल

अगर पेपर लीक हो जाए तो क्या फिर से एग्ज़ाम होना चाहिए?

गृहलक्ष्मी गपशप

इनडोर प्लांटिंग : सुंदरता भी, फायदे भी

इनडोर प्लांटिंग...

अपने घर में पौधे लगाना जहां घर के सौंदर्य में चार...

स्मार्ट करियर गोल्स बनाने की सलाह देती हैं गृहलक्ष्मी ऑफ द डे दीपशिखा वर्मा

स्मार्ट करियर गोल्स...

गृहलक्ष्मी ऑफ द डे

संपादक की पसंद

फिक्स्ड डिपॉजिट करने के पहले जान लें ये जरूरी बातें

फिक्स्ड डिपॉजिट...

वर्तमान में कम निवेश में अधिक रिटर्न के लिए वर्तमान...

तेजाब खोखला नहीं कर पाया मेरे हौसलों को

तेजाब खोखला नहीं...

लड़कियों के चेहरे पर तेजाब डालने वालों के लिए ये कविता...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription