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नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

अशोक चक्रधर

23rd June 2017

नारी के सवाल अनाड़ी के जवाब

घर का खाना अच्छा या बाहर का खाना?

सारिका वोहरा, हिमाचल प्रदेश

 

बाहर मिले घर जैसा खाना

और घर पर बाहर जैसा मिले,

तो तबियत प्रसन्न हो

और हृदय कमल खिले!

वैसे खाना कहीं का भी हो

हितकारी वही है

जो मौसम, मन और मिजाज़ के

अनुकूल बनाया जाता है,

और प्यार से पकाया जाता है।

 

जो पति पत्नी की बात को चाहकर भी नहीं टाल पाता है, मां-बाप की बात को टाल देता है। आप इस बात पर क्या कहेंगे?

गरिमा शर्मा, भोपाल

 

पति लोग जानते हैं कि

यदि वे अपने माता-पिता की

बातों को टालेंगे,

तो वे मन पर बोझ नहीं पालेंगे!

क्योंकि जबसे उन्होंने

पालने में लिटाया है,

तब से पूरा जीवन

उन्हें पालने में बिताया है।

इसलिए सब कुछ झेल जाते हैं

बच्चों की खातिर,

घर में आई पराई बेटी भी

क्यों हो भला शातिर?

उसे भी भविष्य में

अपने बच्चों को पालना है,

उनके द्वारा किए गए

हर अपमान पर पर्दा डालना है।

इसलिए दोषी न तो चमन है

न चमन के माली हैं,

बस, कलियां और फूल ही

उनसे अधिक शक्तिशाली हैं।

 

महिलाओं को अपने चेहरे और अपनी त्वचा से इतना प्यार क्यों होता है कि वह स्वयं को संवारने के लिए रात-दिन एक कर देती है?

रेखा राय, देहरादून

 

अगर आपने घर में एक आईना

और एक मै खाना सजा रक्खा होगा,

तो जो ज़्यादा देर आईने पर बैठे

वह मक्खी होगी

और जो ज़्यादा देर गिलास पर बैठे

वह मक्खा होगा।

यह तो कुदरत का विधान है,

कि स्त्रियों के पास ही

रूप सौन्दर्य संवर्धन का

प्रसाधन संधान है।

इसीलिए उन्होंने चेहरे और त्वचा को

संवार कर देखा,

समझीं रेखा!

 

अनाड़ीजी, प्यार दिल से करना चाहिए या दिमाग से?

सपना, नई दिल्ली

 

बहुत खतरनाक चीज़ है प्यार,

सपना, इसमें सलाह देना है बेकार।

यों, प्यार करना चाहिए

अन्दर की उमंगों के राग से,

दिमाग में बैठे दिल से

और दिल में बैठे दिमाग से।

 

अनाड़ीजी, आपको सबसे ज़्यादा कौन सी बात परेशान करती है?

अनीता, जम्मू

 

सबसे ज़्यादा परेशान करती है

गरीब के आंखों की नमी,

और इंसान में

इंसानियत की कमी।

बाकी छोटी-मोटी परेशानियों की

लम्बी है सूची,

उस पर फेर दी है कूची।

 

अनाड़ीजी, स्पष्ट करें कि नारी की शोभा साड़ी से होती है कि साड़ी की शोभा नारी से?

अंजलि जैन, दिल्ली

 

सारी बीच नारी है

कि नारी बीच सारी है

सारी ही की नारी है

कि नारी ही की सारी है,

यह पता करने के लिए

कवि-कलाकारों ने

पूरी जि़ंदगी गुज़ारी है।

लेकिन अब सुनो कि

क्या मानता है अनाड़ी-

नारी की शोभा नारीत्व से ही है

क्या जींस क्या साड़ी?

 

क्या नारी मां बनने पर ही संपूर्ण स्त्री कहलाती है?

दिव्या कौशिक

 

मां बनने में

औरत की सम्पूर्णता है

और पिता बनने में मर्द की,

लेकिन मर्द

कल्पना नहीं कर सकता

औरत को होने वाले दर्द की।

 

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