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होली का चांद

गुरदयाल सिंह सलारिया

30th July 2018

होली का चांद
 
बात होली के दिन की है, तब मैं छह-सात साल का था। होली खेलने व बधाई देने सुबह से लोग आ रहे थे। तभी पापा के ऑफिस के दोस्त बहुत सालों बाद घर आए तो मम्मी बोली, 'देखो वर्षों बाद ईद का चांद आया है। पापा ने बाहर आकर उनको देखा तो बोले, 'तुम सच कहती हो यह वाकई ईद का चांद है। तो मैं झट से बोल पड़ा, 'पापा ईद नहीं यह होली का चांद है। आज होली है न। यह सुन सभी ठहाके मार कर हंसने लगे।
 
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