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पैर भारी

कमलेश कुमारी

24th July 2018

पैर भारी

मेरी दीदी व जीजा जी हमारे घर आए हुए थे। उन्हें बाजार जाकर कुछ सामान इत्यादि खरीदना था। मुझे अपने लिए चप्पल का जोड़ा भी लेना था। मैंने दीदी से कहा कि शाम को बाजार चलेंगे। जीजा जी कहने लगे कि अभी चलो, शाम को क्यों? अनायास ही मेरे मुंह से निकल गया, शाम तक पैर थोड़े भारी हो जाते हैं, तब चप्पल लेना ठीक रहता है। मेरी बात को सुनकर जीजा जी जोर से ठहाका लगाकर हंसे तो मैंने अपने शब्दों का दूसरा मतलब समझा और एक पल भी उनके सामने खड़ी न रह सकी।

 

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