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समझदारी से कंट्रोल करें बच्चे को

राजलक्ष्मी त्रिपाठी

1st August 2018

कुछ बच्चे पैरेंट्स से आसानी से कंट्रोल नहीं हो पाते। अगर आप चाहती हैं कि आप अपने बच्चे की भावनाओं को समझकर उसके लटकों-झटकों को कंट्रोल करें, तो कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा।

समझदारी से कंट्रोल करें बच्चे को

 

आप अपने पांच साल के बच्चे के साथ बाजार गई हैं। अचानक वो आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है। जो भी देखता है, लेने की जिद करने लगता है ना दिलाने पर जमीन पर लेट कर रोने लगता है। ऐसे में आप क्या करेंगी? उसे वो सामान दिला देंगी जिसकी वो जिद कर रहा है या एक थह्रश्वपड़ मारकर उसे चुप करा देंगी। कई बार बच्चे को नियंत्रित करने के लिए किस तरह का व्यवहार किया जाये, समझ नहीं आता। बच्चे का व्यवहार बहुत कुछ उसके पारिवारिक परिवेश पर निर्भर करता है। अगर आप चाहती हैं कि आप अपने बच्चे की भावनाओं को समझकर उसके लटकों-झटकों और नखरे को नियंत्रित करें, तो इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा।
 
अपने व्यवहार में बदलाव लाएं
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉक्टर नितिन शुक्ला का कहना है कि बच्चे का व्यवहार कैसा हो, यह आप पर निर्भर करता है। बच्चे को स्वस्थ बनाने के साथ उसके व्यवहार में अच्छी बातें भरने का जिम्मा भी आपका है। उसे कोई बात डांटकर बताने की बजाय प्यार से समझायें। अगर आप यह चाहती हैं कि आपका बच्चा संयमित और नियंत्रित रहे, तो इसके लिए आपको अपने व्यहार में बदलाव लाना होगा। अगर आपकी आदत चिल्लाकर बात करने की है, तो आप अपनी इस आदत पर विराम लगायें अन्यथा बड़ा होने के बाद आपका बच्चा भी तेज आवाज में चिल्लाकर ही बात करेगा। इसी तरह से अगर आप चाहती हैं कि बच्चा बड़ों का आदर करना सीखे तो इसके लिए आपको भी अपने बड़ों को सम्मान देना होगा। सच तो यह है कि दो साल से लेकर दस साल तक का बच्चा वही करता है, जो उसके पैरेंट्स करते हैं।
 
बच्चे के साथ बिताएं समय
अपने बच्चे की भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप अपने बच्चे को पूरा समय दें। अगर यह दोनों पैरेंट्स के लिए एकसाथ संभव ना हो, तो आप अपने बच्चे के साथ अलग-अलग ही समय बिताएं। अगर आप वर्किंग नहीं हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि जब भी बच्चा स्कूल से घर आये, तो आप घर में उपस्थित रहें। यह कतई जरूरी नहीं है कि आप पूरा दिन अपने बच्चे के साथ चिपकी रहें। आप अपने बच्चे को क्वांटिटी यानी ज्यादा समय देने की बजाय क्वालिटी समय दें। जितनी देर भी आप उसके साथ रहें, आपका पूरा ध्यान बच्चे की ओर ही रहे। पिता के लिए भी जरूरी है कि प्रतिदिन वह अपनी व्यस्तताओं को भूलकर अपने बच्चे के साथ कम से कम आधा घंटा बितायें। इस दौरान आप अपने बच्चे के साथ उसके स्कूल की बातें कर सकते हैं या फिर उसके साथ कोई गेम खेल सकते हैं। आप जब भी अपने बच्चे के साथ रहें उसमें सकारात्मक सोच विकसित करें।
 
दिन में आराम की आदत डालें
अपने बच्चे को दिन में कुछ देर के लिए जरूर सुलायें। इससे उसके अंदर की चिड़चिड़ाहट खत्म होगी। आप खुद सोचें जब आप बहुत ज्यादा थक जाती हैं, तो आपको बिना बात के गुस्सा आता है। इसी तरह बच्चे को भी महसूस होता है। उसे पता नहीं चल पाता है कि उसे आराम करना चाहिए। बच्चे तो खेलने और टीवी देखने में व्यस्त रहते हैं, यह आपका काम है कि स्कूल से आने के बाद बच्चों का हाथ मुंह धोकर उसके कपड़े बदलने के बाद खाना खिलाकर उसे थोड़ी देर सुला दे। इससे बच्चा तरोताजा महसूस कर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं करता है।
 
 
दिनचर्या का रखें ख्याल
बच्चे को सही आदत सिखाने के लिए बेहद जरूरी है कि आप उसकी दिनचर्या का एक टाइम टेबल बनायें और उसे उसके अनुरूप व्यवहार करने के लिए प्रेरित करें। मसलन उसके सुबह उठने और सोने का समय निश्चित हो। जब बच्चा स्कूल जाता है, तो उसे पता होता है कि सुबह उठकर ब्रश करने के बाद नहाना है फिर ब्रेकफास्ट करना है और तैयार होकर स्कूल जाना है। छुट्टी के दिन भी उसे रोज का रुटीन फॉलो करने के लिए प्रेरित करें। अगर बच्चा अपने सारे काम दिनचर्या के अनुरूप करेंगे, तो उन्हें हड़बड़ी नहीं होगी, इस वजह से वो रिलैक्स रहेंगे और बेहतर व्यवहार करेंगे।
 
छोटे-छोटे कामों में लें मदद
घर की व्यवस्था तभी सुचारू रूप से चलती है जब परिवार के सभी सदस्य सहयोग करते हैं। अपने बच्चे में यह आदत डालने के लिए उससे छोटी उम्र से ही छोटे-छोटे कामों में मदद लें। आप अपने टोडलर्स से भी मदद ले सकती हैं। आप उनसे कह सकती हैं कि सब्जी की टोकरी से आलू ह्रश्वयाज लायें या इसी तरह के और छोटे-छोटे काम उनसे करवा सकती हैं इसके दो फायदे होंगे, बच्चा काम करने के साथ-साथ वो चीजों को पहचानना भी सीखेगा। बच्चों से आप घर को समेटने में मदद ले सकती हैं मसलन उनसे कहें कि वो अपनी किताबें और अपने खिलौनों को ठीक से उस जगह पर रखें, जहां से उठाया है। जब आप अपने बच्चों को गतिविधियों में शामिल करती हैं, तो उनमें जिम्मेदारी का भाव आता है और वे अपने परिवार के समीप आते हैं। बच्चों को व्यस्त रखने की कोशिश करें, वो व्यस्त रहेंगे तो उनका व्यवहार नियंत्रित रहेगा।
 
मुश्किलों से निबटना सिखायें
बच्चे को व्यवहार कुशल बनाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप उसकी समस्याओं को तुरंत खुद ही सुलझाने की बजाय अपने बच्चे को स्वयं ही अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए प्रेरित करें। जब बच्चा अपनी समस्याओं का समाधान खुद ढूंढेगा तो आत्मविश्विास में बढ़ोतरी होगी।
 
एक जैसा हो व्यवहार
बच्चे को अच्छी तरह से व्यवहार करना सिखाने के लिए यह जरूरी है कि आप उसके लिए जो भी नियम बनायें, वो हर दिन एक ही तरह से फॉलो करें अपनी सुविधा के अनुसार उसमें ढील या टाइट ना करें। ऐसा न हो कि आपने उसके टीवी देखने का समय एक घंटे का निर्धारित किया है, लेकिन आप अपनी किसी सहेली से बात कर रही हैं। इसमें बच्चा अवरोध ना पैदा करे, इसलिए उसे लगातार टीवी देखते रहने दें। आपके इस तरह के व्यवहार से बच्चा कन्फ्यूज होता है। उसके सही विकास के लिए उसके लिए बनाये नियमों में कंसिसटेंसी रखें। 
 
 

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