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क्या आपको डिटोक्स करवाने की जरूरत है?

कविता देवगन

5th December 2017

क्या आपको डिटोक्स करवाने की जरूरत है?
डिटोक्स करना क्यों जरूरी है, किसलिए जरूरी है, किस हालात में जरूरी है और क्या वाकई आपको डिटोक्स करने की जरूरत है... कुछ ऐसे ही प्रश्नों के जवाब दे रही हैं अपने लेख के माध्यम से प्रख्यात न्यूट्रीशनिस्ट कविता देवगन
 
जब सेलेब्रिटीज़ डिटोक्स जैसे विषयों पर बात करते हैं, तो यह न्यूज़ बन जाती है। डिटोक्स क्या होता है और सेलेब्रिटीज़ कौैन सा डिटोक्स करवा रहे हैं, ये सब जानने को लोग बहुत उत्सुक रहते हैं। मास्टर क्लीनस, लिक्विड डिटोक्स डाइट, हर्बल तरीके जैसे डिटोक्स से लीवर को शु़द्ध करने की बात कही जाती है और माना जाता है कि इससे सभी तरह की बीमारियों से आराम मिलेगा। ऐसे विषयों पर न जाने कितने लेख मिल जाएंगे और कोई भी त्योहार खत्म होने पर अकसर कहा जाता है कि ज्यादा खाना खाने के बाद शरीर को डिटोक्स करने की बहुत जरूरत होती है। लेकिन क्या शरीर को डिटोक्स करने की वाकई जरूरत है या यह सिर्फ मार्केटिंग फंडा है... तो इस विषय पर मैं आप सब को बताना चाहूंगी कि आपको इस तरह के कठोर उपाय करने की कोई जरूरत नहीं है।
 
 
लिक्विड या वास्तविक भोजन
ज्यादातर डिटोक्स डाइट में फल और सब्जियों के जूस को ही जोड़ा जाता है और इसमें चबाने वाले आहार नहीं होते, क्योंकि इसमें सख्त फूड खाना मना होता है। किंतु मैं मानती हूं कि यह बहुत ग़लत तरीका है, क्योंकि लगातार तरल पदार्थ की डाइट से फाइबर की कमी हो जाती है। लिक्विड डाइट कम समय के लिए तो काम कर सकती है या उन लोगों के लिए काम करती है जिनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता, खासतौर से बड़ी सर्जरी में ऐसा होता है। लेकिन आम लोगों के लिए यह बहुत व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि जैसे ही डिटोक्स के बाद लोग खाने की डाइट पर वापस आते हैं वह बहुत ज्यादा खा सकते हैं। तो अगर आप सच में अपने शरीर को डिटोक्स करना चाहते हैं, तो मैं आपको सलाह दूंगी कि आप रोज़ाना अपनी डाइट में फल, सब्जियां, मेवे, साबुत अनाज और मछली को शामिल करें। लिक्विड डाइट से आपको मोडरेशन में खाने की समझ नहीं आएगी।
 
दवाइयों के प्रति सावधान रहें
कई ऐसी डिटोक्स के उपाय और सप्लीमेंट्स दावा करते हैं कि उनके उत्पाद से शरीर के विषाक्त पदार्थ और कोलन दोनों साफ हो जाएंगे। चाहे यह उत्पाद हर्बल हो, लेकिन इसके बावजूद इन सप्लीमेंट को शरीर के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि इसमें कई ऐसे पदार्थ होते हैं, जो जुलाब या दस्त लगा सकते हैं। ऐसे डिटोक्स करना बिलकुल सेहतमंद नहीं है और मैं ऐसे तरीके से बिलकुल सहमत नहीं हूं कि एक साथ पेट को डिटोक्स करने से आपको आराम बिलकुल नहीं मिलेगा। सोचिए अगर झील के नीचे की कीचड़ को हिला दिया जाएं तो क्या होगा। ठीक ऐसे ही हमारे शरीर का हाल होगा।
 
वज़न कम करना
कुछ लोग डिटोक्स सेहत के चलते करते हैं लेकिन बहुत सारे लोग इसे अपना वजऩ कम करने का तरीका मानते हैं। अगर आपको छुट्टी के दिन एक तंग ड्रेस पहननी है और उसे पहनने के लिए आप यह तरीका अपनाते हैं, तो आपके लिए हानिकारक हो सकता है। हालांकि इस तरह के छोटे-छोटे डिटोक्स जिंदगी के लिए घातक नहीं होते, किंतु मैं इस तरह के उपाय के खिलाफ हूं क्योंकि जब लोग इस तरह के डिटोक्स का तरीका अपनाते हैं तो वह वापस अपनी पुरानी डाइट पर आ जाते हैं और इससे शरीर को नुकसान पहुंचता है। वज़न तब तक कम नहीं होगा, जब तक आप अपनी जीवनशैली में बड़ा बदलाव नहीं करते। डिटोक्स को आप इस तरह से देख सकते हैं कि जब आप काम करते-करते थक जाते हैं तो आपको छुट्टी की जरूरत होती है लेकिन छोटे ब्रेक के बाद आपको फिर से तनावभरे काम पर लौटना ही पड़ता है। इसलिए ऐसे सख्त डिटोक्स तरीकों को अपनाने का कोई खास फायदा नहीं मिलता। वजऩ कम करने का कोई शॉर्टकट नहीं है। कसरत, संतुलित तरीके से पौष्टिक आहार और पर्याप्त नींद लेने से वजऩ कम किया जा सकता है। 
 
 
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